राजा वड़िंग के इस्तीफे और राहुल गांधी से मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद तेजी से बदला घटनाक्रम, सिंगला के नाम पर कुछ बड़े नेताओं की आपत्ति के बीच परगट सिंह के नाम पर लगी मुहर

आरके सेठी,
चंडीगढ़,2 अक्तूबर।
पंजाब कांग्रेस में शुक्रवार का दिन बड़े राजनीतिक बदलाव के नाम रहा। सुबह राजा वड़िंग ने राहुल गांधी से मुलाकात कर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपा, पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और पार्टी की चुनौतियों पर चर्चा की और कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस हाईकमान ने नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया। जिस नाम की चर्चा गुरुवार रात और शुक्रवार सुबह तक सबसे ज्यादा थी, वह विजय इंदर सिंगला था, लेकिन आखिरी दौर में पूरा समीकरण पलट गया और परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंप दी गई। AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, परगट सिंह को तत्काल प्रभाव से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। साथ ही चुनाव से जुड़ी विभिन्न कमेटियों के चेयरपर्सन और को-चेयरपर्सन को फिलहाल पहले की तरह जारी रखा गया है। यानी कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा बदला है, लेकिन चुनावी ढांचे को पूरी तरह नहीं छेड़ा।
वड़िंग की विदाई, राहुल से मुलाकात और फिर नया चेहरा
राजा वड़िंग करीब साढ़े चार साल तक पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। शुक्रवार को राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा दे दिया है। उनके मुताबिक राहुल गांधी ने पंजाब के हालात, आम आदमी पार्टी की सरकार और आगे कांग्रेस को किस तरह काम करना चाहिए, इस बारे में जानकारी ली। वड़िंग ने अपने कार्यकाल के अनुभव, पार्टी की ताकत और सामने खड़ी चुनौतियों को भी राहुल गांधी के सामने रखा। वड़िंग ने यह भी कहा कि उन्होंने इस्तीफा अपनी इच्छा से दिया और पार्टी जब भी उन्हें जिम्मेदारी देगी, वह काम करने के लिए तैयार रहेंगे। इसी मुलाकात के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा का रास्ता साफ हुआ और कांग्रेस ने ज्यादा देर लगाए बिना परगट सिंह के नाम पर मुहर लगा दी।
सिंगला का नाम सबसे आगे था, फिर आखिरी घंटों में बदला फैसला
वड़िंग के हटने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा विजय इंदर सिंगला के नाम की थी। 1 अक्टूबर से ही कांग्रेस के अंदर सिंगला को मजबूत दावेदार माना जा रहा था। कई रिपोर्टों में उन्हें सबसे आगे बताया गया था, जबकि परगट सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा केपी सिंह और कुछ अन्य नाम भी चर्चा में थे। लेकिन शुक्रवार को तस्वीर अचानक बदल गई। सिंगला के नाम को लेकर पार्टी के भीतर कुछ वरिष्ठ नेताओं की आपत्ति की चर्चा के बीच परगट सिंह का नाम आगे आया और आखिरकार वही नाम आधिकारिक हुआ। यानी जिस चेहरे को कुछ घंटे पहले तक संभावित नया प्रदेश अध्यक्ष माना जा रहा था, वह अंतिम सूची में पीछे रह गया और परगट सिंह ने बाजी मार ली।
सिंगला का नाम पहले भी क्यों अटका था?
सिंगला के नाम को लेकर इस बार पहली बार चर्चा नहीं हुई थी। इससे पहले भी उन्हें पंजाब कांग्रेस की कमान देने की बात सामने आई थी। उस समय भी पार्टी के कुछ वरिष्ठ सिख नेताओं की आपत्ति के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया था। इस बार वड़िंग के हटने के बाद उनका नाम फिर तेजी से ऊपर आया, लेकिन आखिरी फैसला एक बार फिर उनके पक्ष में नहीं गया। यही वजह है कि परगट सिंह की नियुक्ति को कांग्रेस के भीतर चल रही नामों की सामान्य कवायद से अलग करके देखा जा रहा है। हाईकमान के सामने सिर्फ नया अध्यक्ष चुनने का सवाल नहीं था, बल्कि ऐसा चेहरा चुनने की जरूरत थी जो पार्टी के अलग-अलग खेमों के बीच काम कर सके और 2027 के चुनाव से पहले संगठन को मैदान में उतार सके।
परगट सिंह पर ही क्यों लगी मुहर?
परगट सिंह पंजाब की राजनीति में नया चेहरा नहीं हैं। जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वह पंजाब सरकार में मंत्री रह चुके हैं और कांग्रेस संगठन में भी अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान पंजाब की जमीनी राजनीति के साथ-साथ एक जट्ट सिख चेहरे की भी है। कांग्रेस के लिए पंजाब में यह सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी 2027 के चुनाव की तैयारी में है, हाईकमान ने एक बार फिर प्रदेश संगठन की कमान जट्ट सिख नेता को देकर अपना राजनीतिक संतुलन तय किया है। हालांकि सिर्फ सामाजिक पहचान से चुनाव नहीं जीते जाते। परगट सिंह के सामने अब असली काम संगठन को एकजुट करना और अलग-अलग नेताओं को एक चुनावी लाइन पर लाना होगा।
हॉकी के मैदान से पुलिस सेवा तक
परगट सिंह की पहचान राजनीति में आने से काफी पहले हॉकी के मैदान में बन चुकी थी। वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे और 1992 बार्सिलोना तथा 1996 अटलांटा ओलंपिक में भारत की कप्तानी की। इससे पहले 1988 सियोल ओलंपिक में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे। हॉकी से संन्यास के बाद वह पंजाब पुलिस में एसपी के पद पर रहे और बाद में पंजाब के डायरेक्टर स्पोर्ट्स की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्हें 1989 में अर्जुन अवॉर्ड और 1998 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यानी राजनीति में आने से पहले परगट सिंह की पहचान एक अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी, कप्तान और पुलिस अधिकारी के रूप में बन चुकी थी।
सचिन पायलट की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ बदलाव
प्रदेश अध्यक्ष बदलने की जमीन पिछले कुछ समय से तैयार हो रही थी। पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रदेश के नेताओं और संगठन के साथ बातचीत की थी। पार्टी के भीतर गुटबाजी, नेताओं के बीच तालमेल और चुनाव से पहले संगठन की स्थिति को लेकर हाईकमान तक फीडबैक पहुंचा। इसी दौरान वड़िंग के नेतृत्व में बदलाव की चर्चा तेज हुई। वड़िंग के इस्तीफे के बाद खुद उन्होंने सचिन पायलट की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और कहा कि उन्हें ठोस सबूत नहीं है, लेकिन उन्हें लगता है कि पायलट चाहते थे कि उन्हें हटा दिया जाए।
चेहरा बदला, चुनावी कमेटियां नहीं
परगट सिंह की नियुक्ति के साथ कांग्रेस ने एक और साफ संकेत दिया है। AICC की प्रेस रिलीज के मुताबिक चुनाव से जुड़ी कमेटियों के मौजूदा चेयरपर्सन और को-चेयरपर्सन पहले की तरह काम करते रहेंगे। यानी कांग्रेस ने फिलहाल पूरा चुनावी ढांचा बदलने के बजाय प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा बदला है। इसका मतलब यह भी है कि पार्टी जिन नेताओं को पहले ही चुनावी जिम्मेदारियां दे चुकी है, उनके अनुभव का इस्तेमाल जारी रहेगा।
परगट के सामने पहली चुनौती अपनी टीम बनाना
अब परगट सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के भीतर के अलग-अलग राजनीतिक खेमों को साथ लेकर चलने की होगी। पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी खींचतान से जूझती रही है। अलग-अलग नेताओं के अपने-अपने समर्थक और राजनीतिक समीकरण हैं। परगट सिंह को अब प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर सिर्फ संगठन चलाना नहीं है, बल्कि उन नेताओं को भी साथ लेकर चलना है जो खुद इस पद की दौड़ में थे या जिनके नाम पर अलग-अलग समय में चर्चा होती रही।
यही कारण है कि आने वाले दिनों में परगट सिंह की टीम और संगठन में होने वाली अगली नियुक्तियां काफी अहम होंगी। इन नियुक्तियों से यह पता चलेगा कि हाईकमान ने सिर्फ अध्यक्ष बदला है या पंजाब कांग्रेस के काम करने का तरीका भी बदलने जा रहा है।
2027 से पहले कांग्रेस ने बदल दिया अपना चेहरा
पंजाब विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे समय में करीब साढ़े चार साल बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलना कांग्रेस के लिए बड़ा संगठनात्मक फैसला है। वड़िंग की विदाई, राहुल गांधी से उनकी मुलाकात, सिंगला के नाम की आखिरी दौर तक चर्चा और फिर परगट सिंह की नियुक्ति- पूरे घटनाक्रम ने 24 घंटे के भीतर पंजाब कांग्रेस की तस्वीर बदल दी। अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या परगट सिंह सिर्फ नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे या 2027 के लिए पार्टी के नए चुनावी चेहरे की भूमिका भी निभाएंगे?

