HomePunjabबीजेपी सांसद की यूनिवर्सिटी में हंगामे के पीछे आखिर क्या था खेल?

बीजेपी सांसद की यूनिवर्सिटी में हंगामे के पीछे आखिर क्या था खेल?

अशोक मित्तल के AAP छोड़ BJP में आने के बाद सियासी आरोपों का दौर, विपक्ष ने उठाए सवाल; वॉकी-टॉकी वाले सेना के जवान निकले-पुलिस जांच में क्या सामने आया?

आरके सेठी
चंडीगढ़, 28 सितंबर।

पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में छात्रों के प्रदर्शन, तोड़फोड़ और आगजनी ने पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यूनिवर्सिटी के संस्थापक-चांसलर और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद हुए इस घटनाक्रम को अकाली दल और बीजेपी के कई नेताओं ने राजनीतिक साजिश से जोड़कर सरकार को घेरा है। दूसरी तरफ, पंजाब पुलिस ने वॉकी-टॉकी लेकर कैंपस में दिखे लोगों की पहचान भारतीय सेना के जवानों के रूप में की है। पुलिस की इस पुष्टि ने बाहरी लोगों को लाकर हिंसा कराने के आरोपों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी राजनीतिक दल या नेता को हिंसा का जिम्मेदार घोषित नहीं किया है।

शिकायत से शुरू हुआ घटनाक्रम, प्रशासन पर आरोप

विवाद की शुरुआत एक छात्रा की शिकायत से हुई। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि 23 सितंबर को गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की। शिकायत के आधार पर सतनामपुरा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कैंपस में रेप की घटना से इनकार करते हुए इन दावों को झूठा, निराधार और मनगढ़ंत अफवाह बताया। पुलिस की शुरुआती जांच में भी कथित रेप की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई है।

26-27 सितंबर की रात प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप

कथित घटना और उससे जुड़ी अफवाहों के बाद 26 और 27 सितंबर की दरमियानी रात छात्रों की भीड़ जुटनी शुरू हुई। रविवार सुबह तक प्रदर्शन उग्र हो गया। कैंपस में तोड़फोड़ हुई, दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया, वाहनों में आग लगाई गई और जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित हुआ। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। हिंसा के बाद यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से दस दिन के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दीं और मिड-टर्म परीक्षाएं अगले आदेश तक टाल दीं।

अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने के बाद सियासी आरोप

एलपीयू के संस्थापक-चांसलर और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद कैंपस में हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया। अकाली दल और बीजेपी के नेताओं ने मित्तल के पार्टी बदलने को घटनाक्रम के संदर्भ में उठाया और आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल खड़े किए।

मजीठिया का आरोप- छात्रों को राजनीतिक बदले का मोहरा बनाया

अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने के बाद दिल्ली से बाहरी लोगों को बुलाकर छात्रों के प्रदर्शन को भड़काया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की भूमिका पर सवाल उठाए और पूरे मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की। मजीठिया ने दावा किया कि छात्रों को राजनीतिक बदले के लिए इस्तेमाल किया गया।

सुखबीर बादल ने बताया बड़ी साजिश

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने वॉकी-टॉकी और हथियार लेकर कैंपस में मौजूद लोगों की खबरों के आधार पर सवाल उठाया कि यूनिवर्सिटी के भीतर ऐसे लोग पहुंचे कैसे। उन्होंने दावा किया कि छात्रों ने उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले किया और इसे बड़ी साजिश करार दिया। बादल ने कथित गिरफ्तारियों और एफआईआर को लेकर जवाब मांगा तथा भगवंत मान सरकार पर कानून-व्यवस्था संभालने में विफल रहने का आरोप लगाया। लेकिन जिन लोगों को बाहरी या साजिशकर्ता बताया गया, उनकी पहचान को लेकर अब पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आ चुका है।

बीजेपी नेताओं ने भी AAP पर लगाए आरोप

बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने एलपीयू घटनाक्रम को आम आदमी पार्टी की कथित राजनीतिक साजिश से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सरकार दूसरे विवादों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि 400 से 500 लोगों को दिल्ली से एलपीयू भेजा गया था ताकि वहां माहौल खराब किया जा सके। उन्होंने पंजाब पुलिस से जवाब मांगा और छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।

वॉकी-टॉकी वाले लोग सेना के जवान निकले, पुलिस का बड़ा खुलासा

28 सितंबर को जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने स्पष्ट किया कि एलपीयू कैंपस में वॉकी-टॉकी लेकर दिखे लोग भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट की स्पेशल फोर्सेज बटालियन के अधिकारी और जवान थे। पुलिस ने उनसे पूछताछ की और उनकी पहचान स्थापित की। डीआईजी के अनुसार, वे सेना के एक अधिकारी के बच्चे को लेने आए थे। पुलिस की इस पुष्टि के बाद उन विशेष लोगों को बाहरी घुसपैठिए या साजिशकर्ता बताने वाले शुरुआती दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

राजनीतिक आरोपों पर पुलिस की पुष्टि से बदला घटनाक्रम का संदर्भ

अकाली दल और बीजेपी के नेताओं ने वॉकी-टॉकी वाले लोगों की मौजूदगी को बाहरी लोगों के प्रवेश और कथित साजिश के प्रमाण के रूप में पेश किया था। लेकिन पुलिस की पहचान संबंधी पुष्टि के बाद उन विशेष लोगों को बाहरी साजिशकर्ता बताने का दावा कमजोर पड़ता है। हालांकि, इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि हिंसा में कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच और बाहरी लोगों की संभावित भूमिका की पड़ताल जारी रखने की बात कही है।

मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घटनाक्रम का गंभीर संज्ञान लेते हुए पुलिस को हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने डीजीपी गौरव यादव को कैंपस का दौरा कर हालात का जायजा लेने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। सरकार की ओर से जारी पक्ष में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है।

डीजीपी गौरव यादव ने संभाला मोर्चा, छात्रों पर बल प्रयोग से बची पुलिस

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि 26-27 सितंबर की रात कैंपस में घटनाओं और अफवाहों के बाद बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए, जिसके बाद तोड़फोड़ हुई और गेट के एक हिस्से में आग लगाई गई। उनके मुताबिक, पुलिस ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने का सोच-समझकर फैसला लिया और यूनिवर्सिटी प्रशासन तथा छात्रों के बीच संवाद का माध्यम बनी। उन्होंने कहा कि आगजनी और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ उनकी हैसियत चाहे जो हो, कार्रवाई होगी।

एसआईटी गठित, पांच छात्र प्रतिनिधि भी जांच में शामिल

पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई है। इसमें जालंधर ग्रामीण के एसपी (डिटेक्टिव) विनीत अहलावत, फगवाड़ा के एसपी मेजर सिंह, सीआईए स्टाफ प्रभारी बलविंदर सिंह और इंस्पेक्टर अमनप्रीत कौर के साथ सीसीटीवी विशेषज्ञ शामिल हैं। जांच में सहायता के लिए पांच छात्र प्रतिनिधियों को भी जोड़ा गया है। डीआईजी नवीन सिंगला ने यूनिवर्सिटी के कुलपति, अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनीं।

छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल व्यवस्था पर भी जांच

पुलिस के मुताबिक, छात्र प्रतिनिधियों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी हैं, जिनमें गर्ल्स हॉस्टल में केवल महिला स्टाफ की तैनाती की मांग भी शामिल है। डीआईजी ने बताया कि शिकायत करने वाली छात्राओं से भी बातचीत की गई है। यूनिवर्सिटी में दस दिन का अवकाश घोषित होने के बाद करीब 14,000 छात्र अपने घरों के लिए रवाना हुए। कैंपस के आसपास पुलिस तैनात है और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।

कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा, छात्र सुरक्षा पर उठाए सवाल

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने एलपीयू की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए भगवंत मान सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों के साथ खड़ी है और दूसरे राज्यों से आए विद्यार्थियों को सुरक्षित घर पहुंचाने में सहायता देने की बात कही। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी छात्र सुरक्षा, कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत और एफआईआर दर्ज करने में देरी को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने घटनाक्रम को सरकार और प्रशासन की जवाबदेही से जोड़कर उठाया है।

पड़ताल में अब तक सामने आए तथ्य

एलपीयू में छात्रों का प्रदर्शन हिंसा और तोड़फोड़ तक पहुंचा, यूनिवर्सिटी ने कथित रेप की घटना से इनकार किया और पुलिस की शुरुआती जांच में भी इसकी पुष्टि नहीं हुई। अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने के बाद अकाली दल और बीजेपी नेताओं ने राजनीतिक साजिश के आरोप लगाए, जबकि कांग्रेस ने छात्र सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। पुलिस ने वॉकी-टॉकी वाले लोगों की पहचान सेना के जवानों के रूप में की है और हिंसा की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। फिलहाल किसी राजनीतिक दल या नेता की हिंसा में भूमिका पुलिस ने स्थापित नहीं की है। निर्णायक तथ्य सीसीटीवी फुटेज, एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच, हिंसा में शामिल लोगों की पहचान और पुलिस की अंतिम रिपोर्ट से सामने आएंगे।

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