SIR के बाद 20 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटे, नए मतदाता जुड़ने के बाद फाइनल लिस्ट में करीब दो करोड़ एक लाख वोटर; 2027 के चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में इतने बड़े बदलाव पर उठे सवाल।

आरके सेठी
चंडीगढ़, 13 अक्टूबर।
देश की राजधानी दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी टकराव जारी है। विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। इसी माहौल के बीच पंजाब की अंतिम मतदाता सूची जारी हो गई है। सूची के मुताबिक, संशोधन से पहले के मुकाबले पंजाब में मतदाताओं की कुल संख्या करीब साढ़े तेरह लाख कम हुई है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह आंकड़ा कई सवाल खड़े करता है- नाम किन कारणों से हटे, कितने नए मतदाता जुड़े और क्या किसी पात्र मतदाता का नाम छूटने की शिकायत सामने आई है?
दो करोड़ चौदह लाख से घटकर दो करोड़ एक लाख रह गए मतदाता
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची में हुआ बड़ा बदलाव राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। बारह अक्टूबर को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में कुल दो करोड़ एक लाख से अधिक मतदाता दर्ज हैं। संशोधन से पहले यह संख्या दो करोड़ चौदह लाख इकसठ हजार से अधिक थी। यानी पुरानी और अंतिम सूची के बीच करीब साढ़े तेरह लाख मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज हुई है। यह आंकड़ा अपने आप में बड़ा है, लेकिन इसकी असली तस्वीर समझने के लिए तीन अलग-अलग चीजों को देखना जरूरी है- ड्राफ्ट सूची से कितने नाम हटे, बाद में कितने नए मतदाता जुड़े और अंतिम सूची में कुल कितनी कमी रह गई। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या इस प्रक्रिया में किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा है और यदि ऐसा हुआ है तो उसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
ड्राफ्ट लिस्ट से हटे थे बीस लाख से ज्यादा नाम
तेरह अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब बीस लाख छियासठ हजार नाम हटाए गए थे। इसके बाद ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की संख्या घटकर करीब एक करोड़ तिरानवे लाख चौरानवे हजार रह गई थी। यह शुरुआती चरण का आंकड़ा था, अंतिम सूची का नहीं। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने, दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपना नाम जुड़वाने का अवसर दिया गया। इसी प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची तैयार हुई।
नए मतदाता जुड़े, फिर भी कुल संख्या में कमी
अंतिम सूची में करीब दो करोड़ एक लाख मतदाता दर्ज किए गए हैं। ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में करीब सात लाख छह हजार मतदाताओं की शुद्ध बढ़ोतरी हुई। यानी ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद नाम जोड़ने और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया से मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ, लेकिन संशोधन से पहले की कुल संख्या की तुलना में अंतिम आंकड़ा फिर भी करीब साढ़े तेरह लाख कम रहा। यहाँ एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। नए पंजीकरण की संख्या और ड्राफ्ट से अंतिम सूची तक मतदाताओं की शुद्ध बढ़ोतरी अलग-अलग आंकड़े हैं। नए पंजीकरण के अलावा पहले हटाए गए कुछ नामों की बहाली और दूसरी प्रविष्टियों में हुए बदलाव भी अंतिम संख्या को प्रभावित कर सकते हैं।
साढ़े पैंतीस लाख मतदाताओं को नोटिस, करीब छियासी हजार अपात्र
पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान करीब पैंतीस लाख उनचास हजार मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। दस्तावेजों और अन्य सत्यापन के बाद इनमें से छियासी हजार अड़तीस मतदाताओं को अपात्र चिह्नित किया गया। इस आंकड़े को समझना भी जरूरी है। नोटिस मिलने का मतलब अपने आप में यह नहीं है कि मतदाता अपात्र था या उसका नाम अंतिम सूची से हटा दिया गया। नोटिस का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति की पात्रता और रिकॉर्ड का सत्यापन करना था। अधिकारियों के अनुसार, सुनवाई और दस्तावेजों की जाँच के बाद मामलों पर निर्णय लिया गया।
अब इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नोटिस पाने वाले कितने लोगों के नाम अंतिम सूची में बरकरार रहे, कितनों के रिकॉर्ड में सुधार हुआ और कितनों को अपात्र घोषित किया गया। इस श्रेणीवार जानकारी से ही यह स्पष्ट होगा कि सत्यापन के दौरान कितने मामलों में नाम हटाने के बजाय रिकॉर्ड सुधारा गया।
नाम हटाने के पीछे क्या कारण बताए गए?
ड्राफ्ट सूची से नाम हटाने के शुरुआती वर्गीकरण में सबसे बड़ी श्रेणी उन मतदाताओं की थी, जिन्हें स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया। इसके बाद मृत मतदाताओं, सत्यापन के समय नहीं मिल पाए लोगों और डुप्लिकेट प्रविष्टियों के मामले थे। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, करीब नौ लाख चवालीस हजार मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित, करीब पाँच लाख पचहत्तर हजार को मृत, करीब चार लाख तेरह हजार को अनुपस्थित या पता न चल पाने की श्रेणी में और करीब एक लाख उन्नीस हजार को डुप्लिकेट प्रविष्टियों में रखा गया था। हालाँकि, ये आंकड़े ड्राफ्ट सूची तैयार करने के शुरुआती चरण से संबंधित हैं। इन्हें अंतिम सूची में नाम हटने का कारणवार विवरण नहीं माना जाना चाहिए। खास तौर पर, किसी मतदाता का सत्यापन के समय घर पर नहीं मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह मतदान का पात्र नहीं है। इसी तरह, पुरानी सूची से रिकॉर्ड का मिलान न होना और मतदाता का अपात्र होना अलग-अलग बातें हैं।
आप, कांग्रेस और भाजपा के लिए क्यों अहम है यह मामला?
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुए बदलाव पर राजनीतिक दलों की नजर रहना स्वाभाविक है। आम आदमी पार्टी ने SIR प्रक्रिया का विरोध किया है, जबकि भाजपा ने इस प्रक्रिया का समर्थन करते हुए मतदाता सूची को दुरुस्त करने की जरूरत पर जोर दिया है। कांग्रेस की ओर से भी सूची में त्रुटियों और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। लेकिन किसी राजनीतिक दल का विरोध या समर्थन अपने आप में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। असली सवाल यह है कि किस पार्टी ने कितनी लिखित आपत्तियाँ दर्ज कराईं, कितने मतदाताओं के नाम बहाल कराने की मांग की और चुनाव अधिकारियों ने उन शिकायतों पर क्या फैसला लिया। इन तथ्यों के सामने आने पर ही राजनीतिक दलों के दावों की वास्तविकता का आकलन किया जा सकेगा।
2027 से पहले सबसे बड़ा सवाल: क्या हर पात्र मतदाता का नाम सूची में है?
पंजाब की अंतिम मतदाता सूची में पुरानी संख्या के मुकाबले करीब साढ़े तेरह लाख की शुद्ध कमी दर्ज हुई है। यह बड़ा बदलाव है, लेकिन केवल इस आंकड़े से न तो बड़े पैमाने पर गलत नाम काटे जाने का निष्कर्ष निकाला जा सकता है और न ही यह साबित होता है कि हटाए गए सभी नाम अपात्र थे। असली तस्वीर तब सामने आएगी, जब नाम हटाए जाने के अंतिम कारणों, जिले और विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों, नोटिसों के निपटारे तथा नाम बहाल कराने की शिकायतों का पूरा विवरण सार्वजनिक होगा। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है- क्या मतदाता सूची से अपात्र प्रविष्टियाँ हटाने के साथ-साथ हर पात्र मतदाता का नाम सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी प्रभावी ढंग से पूरी हुई है?

