सीएम भगवंत मान के OSD राजबीर घुम्मन से जुड़े मामले में जालंधर में ED ने दर्ज किया केस, सुप्रीम कोर्ट से CBI मामले में अंतरिम राहत के अगले दिन नई कार्रवाई

आरके सेठी
चंडीगढ़,13 अक्तूबर।
पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के अगले ही दिन, 13 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने जालंधर में इस मामले से जुड़ा केस दर्ज किया। इससे पहले 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, हालांकि अदालत ने अगली सुनवाई तक सीबीआई को सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। अब ईडी की एंट्री के बाद मामले में कथित वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं पर भी नजर रहेगी।
आरोप क्या हैं- ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर टेंडर तक
इस मामले में सामने आए आरोपों में सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर प्रक्रिया, प्रशासनिक मंजूरियों, सरकारी फैसलों को कथित तौर पर प्रभावित करने और गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक अनधिकृत पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं। जांच से जुड़े आरोपों में यह भी कहा गया है कि सरकारी कामकाज में लाभ पहुंचाने के बदले पैसे या अन्य फायदे दिए गए।
मई से अक्टूबर तक कैसे बढ़ा मामला?
मई 2026 में ईडी ने नितिन गोहल से जुड़े ठिकाने पर रेड की थी। इस दौरान एक इमारत से कथित तौर पर नकदी से भरे बैग फेंके जाने की घटना सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक बैग में करीब 21 लाख रुपये थे। जुलाई-अगस्त 2026 में ईडी ने पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखकर सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर और प्रशासनिक फैसलों में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जानकारी दी। 5 अक्टूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में सीबीआई जांच का आदेश देते हुए एफआईआर दर्ज करने और दो महीने में जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। 6 अक्टूबर को सीबीआई ने राजबीर घुम्मन और पांच अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की तथा चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस सहित कई ठिकानों पर तलाशी ली। 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन अंतरिम तौर पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अगले दिन ईडी ने जालंधर में राजबीर घुम्मन से जुड़े मामले में केस दर्ज किया। इस तरह मामला सीबीआई की भ्रष्टाचार जांच के साथ ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच तक पहुंच गया है।
कौन हैं राजबीर घुम्मन?
राजबीर सिंह घुम्मन संगरूर जिले के घराचों गांव के रहने वाले हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुके हैं और राजनीति में आने से पहले एक निजी कॉलेज में लेक्चरर के रूप में काम करते थे। उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से पीएचडी भी की है। उनका भगवंत मान के साथ जुड़ाव मान के सांसद रहने के समय से बताया जाता है। वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी की पंजाब में सरकार बनने के बाद वह मुख्यमंत्री के ओएसडी बने। राजनीतिक हलकों में उन्हें “बाई जी” के नाम से भी जाना जाता है। हाल में उनका नाम आम आदमी पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के सदस्य के तौर पर भी सामने आया है। मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी भूमिका और राजनीतिक निकटता के कारण यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
CBI और ED की जांच में क्या फर्क है?
सीबीआई की जांच का केंद्र कथित भ्रष्टाचार, सरकारी पद के दुरुपयोग और सरकारी फैसलों को प्रभावित करने के आरोप हैं। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट है। दूसरी ओर, ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच कथित अपराध से प्राप्त धन, उसके स्रोत, लेन-देन और उसके इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर सकती है। ऐसे मामलों में धनशोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए प्रासंगिक होता है।
सुप्रीम कोर्ट की राहत क्या ED पर भी लागू होगी?
यह इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को सीबीआई की कार्रवाई के संदर्भ में अंतरिम निर्देश दिया था। अदालत ने एफआईआर या जांच पर रोक नहीं लगाई, बल्कि अगली सुनवाई तक सीबीआई को सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। ईडी ने अगले दिन मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश अपने-आप ईडी की हर कार्रवाई पर भी लागू हो गया है इसका निर्धारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सटीक शब्दों, ईडी की कार्रवाई की प्रकृति और आगे सामने आने वाली न्यायिक व्याख्या के आधार पर होगा।
मान सरकार का आरोप- केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल
सीबीआई की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। मान का कहना था कि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने जांच से डरने के आरोपों को खारिज करते हुए एजेंसियों से तलाशी के दौरान मिले सबूतों को सार्वजनिक करने की मांग भी की थी। आम आदमी पार्टी ने ईडी की नई कार्रवाई की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी की आपत्ति है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश के अगले ही दिन ईडी का केस दर्ज होना सवाल खड़े करता है।
आगे क्या? जांच और अदालत की अगली तारीख पर नजर
अब नजर इस बात पर रहेगी कि ईडी की जांच कथित वित्तीय लेन-देन और अपराध से प्राप्त धन के पहलुओं पर किस दिशा में आगे बढ़ती है। साथ ही, सीबीआई की जांच में कौन-से सबूत सामने आते हैं और सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों के दायरे में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। पंजाब सरकार जांच में किस तरह सहयोग करती है और अदालत में आगे क्या दलीलें रखती है, इस पर भी नजर रहेगी। रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी 2027 बताई गई है। उस तारीख तक दोनों एजेंसियों की कार्रवाई और अंतरिम निर्देशों की कानूनी स्थिति पर नजर बनी रहेगी।
पंजाब की राजनीति के लिए क्यों अहम है यह मामला?
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोप सरकार के लिए राजनीतिक बहस का विषय बन सकते हैं। विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग कर सकता है, जबकि आम आदमी पार्टी इसे केंद्रीय एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल के रूप में पेश कर रही है। लेकिन राजनीतिक आरोपों और एजेंसियों की कार्रवाई से अलग, मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या सीबीआई और ईडी की जांच से कथित वित्तीय लेन-देन के बारे में ठोस सबूत सामने आते हैं, और अदालतें इन जांचों की वैधानिकता तथा दायरे पर आगे क्या निर्देश देती हैं? यही इस पूरे मामले की अगली दिशा तय करेगा।

