CMO से जुड़े कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग नेटवर्क पर ED का 200 पेज का हलफनामा; 21 अफसरों और 61 कथित गड़बड़ियों का जिक्र, व्हाट्सएप चैट, कथित भुगतान और बिचौलियों के नेटवर्क पर हाईकोर्ट में सुनवाई
AAP का दावा- ED की ओर से दी गई सामग्री पढ़ने लायक नहीं, BJP ने आरोपों को गंभीर बताया, सीबीआई जांच की मांग

आरके सेठी
चंडीगढ़, 2 सितम्बर।
पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO को लेकर चल रहा विवाद अब सिर्फ ED और AAP के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं रह गया है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सामने करीब 200 पेज का हलफनामा दाखिल कर कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ नेटवर्क, सरकारी कामकाज में कथित प्रभाव और गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक निजी लोगों की पहुंच के गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ AAP ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि BJP ने इसे पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था और मुख्यमंत्री की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला करार दिया है और सीबीआई जांच की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को होनी है।
ED का दावा- CMO से जुड़े नेटवर्क में ट्रांसफर-पोस्टिंग सबसे बड़ा हिस्सा था
ED के मुताबिक उसकी जांच में 61 संदिग्ध गड़बड़ियों का पता चला है। इनमें सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग, प्रशासनिक फैसलों में कथित हस्तक्षेप, आर्म्स लाइसेंस, जमीन से जुड़े मामले, टेंडर और कथित भुगतान या किकबैक शामिल हैं। एजेंसी के दस्तावेजों में 21 ट्रांसफर-पोस्टिंग मामलों का उल्लेख है और ED का आरोप है कि इन मामलों में बिचौलियों के जरिए अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादलों को प्रभावित किया गया।
नितिन गोहल पर CMO के OSD तक पहुंच बनाने और अनुरोध आगे बढ़ाने का आरोप
ED ने निजी व्यक्ति नितिन गोहल को कथित नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण बिचौलिए के तौर पर पेश किया है। एजेंसी का आरोप है कि गोहल इच्छुक लोगों और पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन के बीच संपर्क का माध्यम था और उसके जरिए अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े अनुरोध आगे बढ़ते थे। ED ने आरोप लगाया है कि इस नेटवर्क में IAS, IPS, PCS और दूसरे अधिकारियों की पोस्टिंग से संबंधित मामले शामिल थे।
व्हाट्सएप चैट में सरकारी सूचियां आधिकारिक जारी होने से पहले पहुंचने का दावा
ED के हलफनामे का सबसे अहम हिस्सा डिजिटल सामग्री है। एजेंसी के मुताबिक नितिन गोहल के मोबाइल फोन से बरामद व्हाट्सएप चैट में 20 सितंबर 2023 से 18 मार्च 2026 के बीच की 21 बातचीत शामिल हैं। ED का दावा है कि इनमें पुलिस, पंजाब सिविल सर्विसेज, फूड एंड सिविल सप्लाइज, मार्कफेड और GMADA समेत विभिन्न विभागों में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित बातचीत हुई।
ड्राफ्ट ट्रांसफर लिस्ट बाहर आने का दावा
ED का आरोप है कि कुछ अधिकारियों की ड्राफ्ट ट्रांसफर सूचियां आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही कथित बिचौलियों तक पहुंच रही थीं और उनमें बदलाव की प्रक्रिया भी चल रही थी। BJP ने भी इसी बिंदु को आधार बनाते हुए सवाल उठाया है कि अगर वरिष्ठ अधिकारियों की ड्राफ्ट पोस्टिंग और ट्रांसफर सूचियां निजी लोगों तक पहुंचीं तो सरकारी सिस्टम में यह जानकारी बाहर कैसे गई।
मामला सिर्फ ट्रांसफर तक सीमित नहीं, सरकारी नीतियों और टेंडर तक पहुंचता है
ED के आरोपों में सरकारी नीतियों, टेंडर, लाइसेंस और प्रशासनिक फैसलों में कथित हस्तक्षेप भी शामिल है। एजेंसी ने आर्म्स लाइसेंस, जमीन के मामलों और टेंडर से संबंधित प्रक्रियाओं का उल्लेख किया है। इससे मामला केवल ‘किस अधिकारी का ट्रांसफर कहां हुआ’ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सवाल यह भी बनता है कि क्या निजी लोग सरकारी निर्णय प्रक्रिया और नीति निर्माण से जुड़ी जानकारी तक पहुंच बना रहे थे।
गोपनीय सरकारी नीति दस्तावेज ने विवाद को और संवेदनशील बना दिया
ED की जांच सामग्री में ‘State Policies for Foodgrains Labour & Cartage 2024’ नाम के सरकारी नीति दस्तावेज का भी जिक्र है। उपलब्ध जांच सामग्री के मुताबिक नितिन गोहल से इस दस्तावेज को लेकर पूछताछ हुई और उसने माना कि यह दस्तावेज आगे भेजा गया था। रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि गोहल और संबंधित निजी व्यक्ति इस दस्तावेज को एक्सेस, रिव्यू या उसमें बदलाव सुझाने के लिए अधिकृत नहीं थे।
ED की पूछताछ में नितिन गोहल ने अपनी भूमिका को लेकर अलग पक्ष रखा है। उसने राजबीर सिंह घुमन को करीब 22 साल से जानने की बात कही और बताया कि अधिकारियों तथा विधायकों की ओर से अनुरोध उसके पास आते थे, जिन्हें वह आगे भेजता था। उसने अपनी भूमिका को ‘डेटा एंट्री टाइप’ काम और एक्सेल में सूची तैयार करने तक बताया तथा कथित प्रभाव या आर्थिक लाभ से इनकार किया है।
89.55 लाख के कथित भुगतान का भी जिक्र
ED के पहले संचार में 11 मामलों में करीब ₹89.55 लाख के कथित भुगतान, किकबैक या अन्य लाभ का उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने कथित हवाला लेन-देन और दूसरे लाभों का भी जिक्र किया है।
पूरा मामला Suntec City से जुड़े PMLA केस की जांच से आगे बढ़ा
ED की कार्रवाई उस PMLA जांच से जुड़ी है जिसमें बहु-करोड़ जमीन और CLU से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जा रही है। इसी जांच के दौरान ED ने 7 से 10 मई 2026 के बीच नितिन गोहल, अजय सहगल, सुरेश कुमार बजाज और अन्य से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। एजेंसी के मुताबिक इसी कार्रवाई के दौरान डिजिटल सामग्री और दूसरे दस्तावेज सामने आए, जिनसे कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग नेटवर्क की जांच आगे बढ़ी।
मई की तलाशी में 20.98 लाख रुपये और डिजिटल सामग्री मिलने का ED का दावा
ED ने हाईकोर्ट के सामने कहा है कि मई की तलाशी के दौरान 20.98 लाख रुपये और डिजिटल सामग्री बरामद हुई। एजेंसी का दावा है कि मोबाइल फोन से मिली सामग्री ने ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी दस्तावेजों से जुड़े उसके आरोपों को आगे बढ़ाने में मदद की।
अब असली टकराव ED और पंजाब पुलिस के बीच FIR को लेकर है
ED ने पंजाब पुलिस को कथित अनियमितताओं की जांच और FIR दर्ज करने के लिए सामग्री भेजी थी। एजेंसी के अनुसार उसने पंजाब के DGP को 30 जुलाई 2026 को Prevention of Money Laundering Act की धारा 66(2) के तहत सूचना भेजी और 7 अगस्त को रिमाइंडर दिया। 31 अगस्त को ED ने पंजाब ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन को जवाब देते हुए कहा कि सूचना और संबंधित सामग्री पहले ही साझा की जा चुकी है।
28 अगस्त को पंजाब पुलिस ने मूल रिकॉर्ड मांगा और यहीं से नया विवाद शुरू हुआ
पंजाब ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन ने 28 अगस्त को ED से मूल इलेक्ट्रॉनिक डेटा, संबंधित रिकॉर्ड, चेन ऑफ कस्टडी, बयान और दूसरे दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा। पंजाब पुलिस की दलील थी कि FIR दर्ज करने से पहले उपलब्ध सामग्री की स्पष्टता और प्रामाणिकता की जांच जरूरी है। यही वह बिंदु है जहां से ED और पंजाब पुलिस के बीच कानूनी प्रक्रिया को लेकर मतभेद खुलकर सामने आया।
ED का जवाब- FIR के लिए अतिरिक्त सामग्री को शर्त नहीं बनाया जा सकता
31 अगस्त के जवाब में ED ने कहा कि PMLA की धारा 66(2) के तहत वह जांच के दौरान सामने आई सूचना संबंधित एजेंसी को कार्रवाई के लिए भेजती है। एजेंसी का तर्क है कि FIR दर्ज करने से पहले पंजाब पुलिस द्वारा अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन, चेन ऑफ़ कस्टडी या ओरिजिनल सोर्स डाटा को अनिवार्य शर्त बनाना कानून की भावना के अनुरूप नहीं है। ED ने सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी और विजय मदनलाल चौधरी फैसलों का भी हवाला दिया है।
ED ने 31 अगस्त को अतिरिक्त स्पष्ट सामग्री देने की बात भी कही
ED ने अपने 31 अगस्त के पत्र में यह भी कहा कि विवाद को जल्द सुलझाने के लिए उसने पहले दी गई सामग्री के साथ legible chats, screenshots और अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराए। एजेंसी ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 का प्रमाणपत्र और नितिन गोहल के 5 और 8 मई को PMLA की धारा 17 के तहत दर्ज बयान की जानकारी भी उपलब्ध कराने की बात कही। ED ने FIR जल्द दर्ज करने की मांग दोहराई।
AAP का दावा- ED की सामग्री पढ़ने लायक नहीं और अधिकारी को दस्तावेजों के साथ बुलाया गया
AAP पंजाब अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने 2 सितंबर को कहा कि पंजाब पुलिस ने 28 अगस्त को ED से आरोपों के समर्थन में पूरा दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मांगा था। अरोड़ा के मुताबिक पुलिस ने ED के अधिकारी को संबंधित सामग्री के साथ 1 सितंबर को आने को कहा था, लेकिन कोई अधिकारी नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि ED की ओर से उपलब्ध कराए गए कुछ दस्तावेज और स्क्रीनशॉट स्पष्ट या पढ़ने योग्य नहीं थे।
AAP ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया
अमन अरोड़ा ने ED की कार्रवाई को केंद्र सरकार की राजनीतिक रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि अगर एजेंसी के पास ठोस सबूत हैं तो वह उन्हें पंजाब पुलिस को उपलब्ध कराए और निष्पक्ष जांच होने दे। AAP का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए पंजाब की निर्वाचित सरकार और उसके नेताओं पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।
ED का पक्ष AAP के दावे से अलग है
AAP का कहना है कि ED अधिकारी को 1 सितंबर को रिकॉर्ड के साथ बुलाया गया था लेकिन वह नहीं आया। दूसरी तरफ ED के रिकॉर्ड के मुताबिक 31 अगस्त को ही उसने पंजाब Bureau of Investigation को जवाब दिया था और उसी प्रक्रिया में legible सामग्री तथा संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराए गए।
BJP ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने 2 सितंबर को पंजाब में कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ नेटवर्क को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग कथित ‘रेट कार्ड’ के आधार पर की जा रही थी और मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन का नाम ED की जांच सामग्री में आया है। BJP ने मामले की CBI जांच की मांग भी की। भाटिया ने सवाल किया कि अगर 20 से ज्यादा वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों की पोस्टिंग या ट्रांसफर किसी कथित बिचौलिए के जरिए प्रभावित हो रहे थे तो क्या यह मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव था। BJP का कहना है कि इसीलिए निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री का पद छोड़ना जरूरी है।
भगवंत मान पहले ही ED के आरोपों को खारिज कर चुके हैं
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अगस्त में ED के CMO से जुड़े आरोपों को बेबुनियाद बताया था और BJP पर केंद्रीय एजेंसी के जरिए राजनीतिक निशाना साधने का आरोप लगाया था। AAP सरकार का कहना है कि जांच होनी चाहिए, लेकिन वह तथ्य और प्रमाण पर आधारित होनी चाहिए।
2027 से पहले AAP सरकार के लिए यह सिर्फ एक और राजनीतिक हमला नहीं है
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से कुछ महीने पहले CMO को लेकर उठा यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सीधे सरकार की निर्णय प्रक्रिया, अधिकारियों की पोस्टिंग, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों और सत्ता के आसपास सक्रिय कथित बिचौलियों तक पहुंच रहा है। अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना साफ है कि 3 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई के बाद यह विवाद पंजाब की चुनावी सियासत में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

