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बादल से कांग्रेस और अब AAP तक- क्या बदला?

AAP विधायक के बेटे का SDO को फोन—‘कुंडी पकड़ने मत आना’! वायरल वीडियो ने फिर खड़े किए राजनीतिक हस्तक्षेप पर सवाल

आरके सेठी
चंडीगढ़, 2 सितम्बर।

पंजाब में सरकारें बदलीं, मुख्यमंत्री बदले, पार्टियां बदलीं और राजनीतिक चेहरे भी बदलते रहे। लेकिन बिजली विभाग के अफसरों को लेकर एक सवाल बार-बार सामने आता रहा है- क्या PSPCL के अधिकारी राजनीतिक दबाव से पूरी तरह मुक्त होकर अपना काम कर पाते हैं? भुच्चो मंडी, बठिंडा का ताजा मामला इसी पुराने सवाल को फिर सामने ले आया है।

AAP विधायक के बेटे के फोन ने खड़ा किया नया विवाद

30 अगस्त 2026 को AAP के भुच्चो मंडी विधायक जगसीर सिंह के बेटे हरसिमरन सिंह का PSPCL गोनियाना के SDO केवल सेठी को किया गया फोन विवाद का कारण बना। वायरल वीडियो में हरसिमरन सिंह को कथित तौर पर गांव में कुंडी पकड़ने के लिए नहीं आने की बात कहते सुना जा रहा है। SDO केवल सेठी ने पुष्टि की है कि उन्हें 30 अगस्त को फोन आया था और गांव के तालाब की मोटर के बिजली कनेक्शन की जांच के लिए वहां नहीं आने को कहा गया था।

हरसिमरन सिंह ने कनेक्शन वैध कराने की बात कही

हरसिमरन सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि तालाब की मोटर का कनेक्शन वैध कराने की प्रक्रिया चल रही थी और उनका मकसद किसी अवैध कनेक्शन को बचाना नहीं था। विधायक जगसीर सिंह ने भी कहा कि बिजली चोरी होगी तो कार्रवाई होनी चाहिए और उनका बेटा राजनीति में नया है।

बादल के मंच से ‘कुंडी’ का जिक्र सियासी बहस का हिस्सा बना

अकाली दौर में ‘कुंडी’ सिर्फ बिजली चोरी का शब्द नहीं रही, बल्कि पंजाब की सियासत में भी इसका अलग राजनीतिक संदर्भ बन गया था। 2014 में तलवंडी साबो उपचुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने मंच से कहा था कि उन्हें पता है कि कई लोग कुंडी कनेक्शन के जरिए मुफ्त बिजली लेते हैं और वह उनके कुंडी कनेक्शन तथा खेतों की मुफ्त बिजली का खर्च उठाते हैं।

मुक्तसर में भी कुंडी कनेक्शन का विवाद सामने आया

जनवरी 2014 में मुक्तसर में बादल के सांगत दर्शन कार्यक्रम के लिए जिस कम्युनिटी हॉल का इस्तेमाल हुआ, वहां बिजली का मीटर तक नहीं था। कार्यक्रम के लिए बिजली कथित कुंडी कनेक्शन के जरिए लाई गई थी। PSPCL अधिकारियों ने भी इसे नियमों के खिलाफ माना था।

होशियारपुर रैली में मंच की बिजली पर चुनाव आयोग तक पहुंचा मामला

2014 में ही होशियारपुर के एक चुनावी कार्यक्रम में बादल की रैली के मंच को कथित तौर पर नजदीकी ट्रांसफॉर्मर से कुंडी कनेक्शन के जरिए बिजली दिए जाने का मामला सामने आया। इस मामले में PSPCL अधिकारी को चुनाव आयोग की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। हालांकि यह आरोप आयोजकों और स्थानीय स्तर की व्यवस्था से जुड़ा था।

बादल सरकार ने सरकारी परिसर की कुंडी पर जांच के आदेश भी दिए

अकाली दौर की तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। मई 2015 में डेरा बाबा नानक के एसडीएम और तहसीलदार कार्यालयों में लंबे समय से कुंडी कनेक्शन के जरिए बिजली इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने इस मामले में समयबद्ध और विस्तृत जांच के आदेश दिए तथा दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही।

अकाली प्रभाव वाले इलाकों में बिजली नुकसान ने राजनीतिक दबाव की बहस बढ़ाई

2016-17 में PSPCL की आंतरिक रिपोर्टों ने बिजली चोरी और राजनीतिक प्रभाव की बहस को और हवा दी। रिपोर्ट के मुताबिक अकाली नेताओं के प्रभाव वाले कई इलाकों में बिजली वितरण का नुकसान 30 से 40 फीसदी तक था। प्रकाश सिंह बादल के विधानसभा क्षेत्र लंबी में करीब 32 फीसदी और सुखबीर सिंह बादल के जलालाबाद क्षेत्र में करीब 31 फीसदी वितरण नुकसान दर्ज किया गया था। PSPCL के अधिकारियों ने इन इलाकों में बिजली चोरी की जांच करने में राजनीतिक दबाव की बात कही थी।
बाद में सत्ता बदली तो PSPCL के नए प्रबंधन ने इन इलाकों में बिजली चोरी और वितरण नुकसान कम करने के निर्देश दिए। 2017 में भी ऐसे मामले सामने आए जिनमें राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के बिजली चोरी में कथित तौर पर संरक्षण की चर्चा हुई।

कांग्रेस राज में भी राजनीतिक संरक्षण के आरोप सामने आए

2020 में फिरोजपुर सर्कल के PSPCL के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बिजली चोरी के एक डिफॉल्टर को एक सत्तारूढ़ कांग्रेस विधायक का समर्थन हासिल था और विधायक ने बाद में विभागीय कर्मचारी को तबादले की धमकी दी। उसी दौर की रिपोर्टों में PSPCL अधिकारियों ने बिजली चोरी रोकने की कोशिशों में राजनीतिक हस्तक्षेप को बड़ी समस्या बताया था।

2021 में कांग्रेस विधायक और PSPCL अधिकारी की बातचीत विवाद बनी

31 अक्टूबर 2021 को कांग्रेस के पट्टी विधायक हरमिंदर सिंह गिल और PSPCL के SDO सुशील कुमार के बीच फोन पर हुई कथित बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ। ऑडियो में विधायक को बिजली चोरी के मामले में अधिकारी से कथित तौर पर गाली-गलौज और धमकी देते सुना गया। विवाद उस कार्रवाई के बाद सामने आया जिसमें PSPCL टीम ने तरनतारन के तुंग गांव में कुंडी कनेक्शन पकड़े थे और बिजली चोरी का मामला दर्ज किया था। रिपोर्ट के मुताबिक करीब एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
विधायक ने बाद में अपनी भाषा पर खेद जताया, लेकिन फोन रिकॉर्ड करके वायरल किए जाने पर सवाल उठाए। यह मामला इसलिए भी अहम था क्योंकि बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई करने वाली सरकारी टीम और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव के बीच तनाव खुलकर सामने आया था।

कांग्रेस सरकार ने कुंडी के खिलाफ सख्ती के आदेश भी दिए

कांग्रेस सरकार का दूसरा पहलू भी सामने रखना जरूरी है। 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बिजली चोरी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने के आदेश दिए थे। उन्होंने पुलिस और सिविल प्रशासन को PSPCL के साथ मिलकर काम करने और कुंडी कनेक्शनों पर कार्रवाई करने वाले कर्मचारियों को पुलिस सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे।

AAP सरकार आने के बाद इंजीनियरों ने राजनीतिक दखल का मुद्दा उठाया

2022 में AAP सरकार आई, लेकिन PSPCL के अफसरों की शिकायतें यहां भी सामने आने लगीं। अप्रैल 2023 में PSEB इंजीनियर्स एसोसिएशन ने पावरकॉम के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सरकार के सामने गंभीर चिंता जताई। एसोसिएशन ने राजनीतिक दखल कम करने और पावरकॉम को पेशेवर तरीके से काम करने की स्वतंत्रता देने की मांग की।

तरनतारन में अधिकारियों के तबादले पर भी राजनीतिक दबाव का आरोप लगा

इसी दौरान तरनतारन में पावरकॉम के दो अधिकारियों के तबादले को लेकर इंजीनियरों की एसोसिएशन ने राजनीतिक आधार पर कार्रवाई का आरोप लगाया था। एसोसिएशन का कहना था कि अधिकारियों ने बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई कर राजस्व बढ़ाया था।

2025 में पावर इंजीनियरों का विरोध खुलकर सड़क पर आया

नवंबर-दिसंबर 2025 में PSPCL, PSTCL और BBMB से जुड़े 1,000 से ज्यादा इंजीनियर पटियाला में बड़े विरोध प्रदर्शन में जुटे। इंजीनियरों ने पावर सेक्टर के तकनीकी और प्रशासनिक फैसलों में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया और संस्थागत तथा पेशेवर स्वतंत्रता की मांग की। यह विरोध चीफ इंजीनियर हरिश शर्मा के निलंबन और डायरेक्टर जनरेशन हरजीत सिंह को हटाए जाने के बाद शुरू हुए आंदोलन की अगली कड़ी था।
नवंबर 2025 में PSEB इंजीनियर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने आधिकारिक व्हाट्सऐप समूहों से बाहर निकलकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। उनका आरोप था कि पावर सेक्टर की तकनीकी और प्रशासनिक स्वायत्तता कमजोर हो रही है।

जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री के साथ बैठक में भी शिकायतें दोहराई गईं

जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आंदोलन कर रहे पावर इंजीनियरों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इंजीनियरों ने अपनी शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने रखीं और पावर सेक्टर को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर पेशेवर तरीके से काम करने देने की मांग दोहराई।

अप्रैल 2026 में 800 से ज्यादा इंजीनियरों ने फिर राजनीतिक हस्तक्षेप का सवाल उठाया

अप्रैल 2026 में PSEB इंजीनियर्स एसोसिएशन की जनरल बॉडी बैठक में 800 से ज्यादा मौजूदा इंजीनियर शामिल हुए। बैठक में पंजाब सरकार और PSPCL के हालिया फैसलों को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेप और मनमाने फैसलों की आलोचना की गई। इंजीनियरों ने पावर सेक्टर की स्थिरता, स्वायत्तता और पेशेवर कामकाज को लेकर चिंता जताई तथा मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।

भुच्चो मंडी का विवाद ऐसे समय आया जब शिकायतें पहले से मौजूद थीं

अगस्त 2026 के भुच्चो मंडी मामले से कुछ ही महीने पहले तक पावर सेक्टर के इंजीनियर सार्वजनिक तौर पर राजनीतिक हस्तक्षेप और संस्थागत स्वतंत्रता का सवाल उठा रहे थे। ऐसे में AAP विधायक के बेटे और PSPCL अधिकारी के बीच सामने आया यह विवाद उसी पुरानी बहस को फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ तालाब की मोटर का मामला है

क्या यह सिर्फ एक गांव के तालाब की मोटर का मामला है? या फिर यह पंजाब की सियासत में बार-बार लौटने वाली उस पुरानी बहस का नया चैप्टर है, जिसमें सत्ता बदलती है लेकिन अफसरों पर राजनीतिक दबाव की शिकायतें खत्म नहीं होतीं?
तीनों सरकारों के दौर में तस्वीर एक जैसी नहीं लेकिन सवाल एक जैसा रहा- प्रकाश सिंह बादल के दौर में ‘कुंडी’ और राजनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठे। कांग्रेस सरकार में भी बिजली चोरी के मामलों में राजनीतिक संरक्षण और अधिकारियों पर दबाव के आरोप सामने आए। AAP सरकार के दौर में पावर इंजीनियरों ने खुद राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायत की, 2025 में 1,000 से ज्यादा इंजीनियरों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और अप्रैल 2026 में 800 से ज्यादा इंजीनियरों की बैठक में भी यही चिंता सामने आई।

भुच्चो मंडी ने पुराने सवाल को 2027 के चुनाव से पहले फिर जिंदा कर दिया

AAP विधायक के बेटे का SDO को कथित फोन अब उसी बहस को भुच्चो मंडी से पंजाब की सियासत के बीचों-बीच ले आया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले यह मामला AAP सरकार के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि सवाल सिर्फ विपक्ष नहीं उठा रहा। इस बार सवाल एक सरकारी विभाग के अधिकारी की उस शिकायत को लेकर है, जिसमें उसने खुद फोन आने और जांच के लिए गांव न आने को कहे जाने की बात कही है।
‘कुंडी’ से आगे अब सवाल पूरे सिस्टम की स्वतंत्रता का है-भुच्चो मंडी का यह विवाद सिर्फ ‘कुंडी’ का मामला नहीं रह गया है। यह सवाल अब पूरे सिस्टम की स्वतंत्रता का है।

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