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कैसे मिलेगा इंसाफ? अमित शाह के विरोध पर झोटा के पिता बोले- यह गलत!

मानसा में इंसाफ कमेटी ने शाह को मंच पर न चढ़ने देने का ऐलान किया, पिता बोले- विरोध हुआ तो यह मेरे और मेरे बेटे का अपमान होगा; शाह से सीबीआई जांच की मांग करेंगे।

आरके सेठी
चंडीगढ़, 19 अक्तूबर।

एक पिता अपने बेटे की हत्या का इंसाफ मांग रहा है। छह दिनों से बेटे का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। परिवार की मांग है कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जाए। लेकिन जिस लड़ाई को इंसाफ की मांग के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, उसी में अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरोध को लेकर मतभेद सामने आ गए हैं। परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह का कहना है कि शाह के दौरे का विरोध उनके और उनके बेटे का अपमान होगा। दूसरी तरफ, इंसाफ कमेटी ने शाह के दौरे का बहिष्कार करने और उन्हें धरना स्थल के मंच पर जगह नहीं देने का रुख अपनाया है। ऐसे में 20 अक्टूबर को शाह के पंजाब दौरे से पहले झोटा मामले में इंसाफ की लड़ाई एक नए मोड़ पर खड़ी है।

पिता की दोटूक: अमित शाह का विरोध मुझे मंजूर नहीं

मानसा में 19 अक्टूबर को मीडिया से बातचीत में पूर्व सैनिक भीम सिंह ने कहा कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का स्वागत करेंगे। उन्होंने साफ किया कि अगर शाह के दौरे के दौरान विरोध किया जाता है, तो वह इसे अपने और अपने बेटे के अपमान के रूप में देखेंगे। भीम सिंह का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से उनके परिवार को इंसाफ मिल सकेगा। उन्होंने शाह से मुलाकात के दौरान परविंदर की हत्या की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग उठाने की बात कही है।

सीबीआई जांच पर भरोसा, पंजाब पुलिस को लेकर आशंका

भीम सिंह ने दोहराया कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि पंजाब पुलिस की जांच में सबूत नष्ट होने की आशंका है और केंद्रीय एजेंसी से उन्हें अधिक भरोसा है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अमित शाह के सामने उनकी मांग रखे जाने के बाद जांच को लेकर कोई ठोस फैसला सामने आता है।

इंसाफ कमेटी का रुख: दौरे का बहिष्कार, मंच पर विरोध

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद गठित इंसाफ कमेटी ने अमित शाह के दौरे का बहिष्कार करने का ऐलान किया था। कमेटी के सदस्यों ने आशंका जताई कि बीजेपी झोटा की हत्या के बाद बने जनाक्रोश का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। कमेटी ने परिवार से भी शाह से मुलाकात नहीं करने की अपील करने की बात कही थी। हालांकि, 19 अक्टूबर की सुबह कमेटी से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि परिवार को शाह से मिलने देने के सवाल पर पहले के फैसले की समीक्षा की जा रही है। इस तरह विरोध के ऐलान के बीच परिवार की मुलाकात को लेकर कमेटी का रुख भी विचाराधीन रहा।

परिवार और कमेटी के बीच संवाद का सवाल

भीम सिंह ने कहा कि वह और उनके परिवार के सदस्य कमेटी की बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे। उनके मुताबिक, वह पिछली दो बैठकों में नहीं गए और वहां क्या निर्णय हुए, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि आगे से परविंदर की पत्नी मनप्रीत कौर कमेटी की बैठकों में शामिल होंगी। यह घटनाक्रम बताता है कि आंदोलन की रणनीति पर परिवार की सीधी भागीदारी और संवाद कितना अहम हो गया है।

13 अक्टूबर को फेसबुक लाइव के दौरान हुई थी हत्या

परविंदर सिंह झोटा मानसा में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। 13 अक्टूबर को एक मेडिकल स्टोर पर टकराव के दौरान उन्हें गोली मार दी गई थी। घटना फेसबुक लाइव के दौरान हुई। मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को राजस्थान से गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्टें सामने आई थीं। हत्या के बाद मानसा में आक्रोश फैल गया और झोटा के परिवार ने स्वतंत्र जांच की मांग के साथ अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। मामले की आपराधिक जिम्मेदारी और घटना से जुड़े सभी पहलुओं का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा।

अंतिम संस्कार से इनकार, इंसाफ की मांग कायम

परिवार की मांग है कि जब तक इंसाफ सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, परविंदर का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। सीबीआई जांच इस मांग का प्रमुख हिस्सा है। आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक समेत वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया गया है। कमेटी की ओर से अधिकारियों पर कार्रवाई और अन्य मांगें भी सामने आई हैं।

15 अक्टूबर का पंजाब बंद, आंदोलन का व्यापक रूप

झोटा की हत्या के विरोध में 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया था। इस बंद को कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी, अकाली दल वारिस पंजाब दे, किसान संगठनों और कर्मचारी संगठनों समेत विभिन्न राजनीतिक तथा सामाजिक समूहों का समर्थन मिला। कई जिलों में बाजार बंद रहे और कुछ जगहों पर राजमार्गों पर जाम लगाए गए। इस समर्थन ने मामले को मानसा तक सीमित रहने के बजाय राज्यव्यापी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना दिया।

अमित शाह के दौरे से क्या उम्मीद?

बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने 20 अक्टूबर को अमित शाह के पंजाब दौरे की जानकारी दी थी। शाह के झोटा के परिवार समेत नशे के मुद्दे से जुड़े अन्य प्रभावित परिवारों से मिलने की संभावना भी रिपोर्ट हुई है। भीम सिंह ने शाह से सीबीआई जांच की मांग करने की बात कही है। इसलिए इस दौरे का महत्व केवल राजनीतिक विरोध या स्वागत तक सीमित नहीं है; परिवार यह देखना चाहेगा कि उसकी मांग पर केंद्र की ओर से क्या ठोस प्रतिक्रिया आती है।

पंजाब सरकार से भी जवाबदेही के सवाल

इस मामले में पंजाब सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिवार और आंदोलन से जुड़े लोग जांच, सुरक्षा व्यवस्था तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने का भरोसा दिया था। अब यह देखना होगा कि जांच की वर्तमान स्थिति क्या है, आरोपियों के खिलाफ कौन-सी कानूनी कार्रवाई हुई है और परिवार की प्रमुख मांगों पर सरकार का औपचारिक रुख क्या है।

मूल सवाल: विरोध किसका और इंसाफ किस रास्ते से?

झोटा मामले में अब दो सवाल साथ-साथ खड़े हैं। पहला, क्या अमित शाह के दौरे का विरोध करने की रणनीति परिवार की इच्छा के अनुरूप है? दूसरा, क्या केंद्र या राज्य सरकार की ओर से सीबीआई जांच और अन्य मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने आएगा? भीम सिंह का रुख स्पष्ट है कि वह शाह से मिलकर अपने बेटे के लिए इंसाफ मांगना चाहते हैं। कमेटी का विरोध राजनीतिक इस्तेमाल की आशंका पर आधारित है। इन दोनों रुखों को समझने के साथ यह भी जरूरी है कि बहस का केंद्र हत्या की निष्पक्ष जांच, सबूतों की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया से न हटे।

अब नजर 20 अक्टूबर पर

अमित शाह का दौरा इस मामले में एक अहम पड़ाव हो सकता है, लेकिन केवल मुलाकात या बयान से इंसाफ सुनिश्चित नहीं होगा। परिवार की मांग पर क्या फैसला लिया जाता है, जांच किस एजेंसी के पास रहती है, पुलिस कार्रवाई की स्थिति क्या है और अंतिम संस्कार को लेकर गतिरोध कैसे खत्म होता है- इन सवालों के जवाब ही आगे की दिशा तय करेंगे। झोटा के पिता और इंसाफ कमेटी के बीच रणनीति को लेकर सामने आया मतभेद अपनी जगह है, लेकिन परिवार की मूल मांग अब भी वही है: बेटे की हत्या की निष्पक्ष जांच और इंसाफ।

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