बीजेपी की नशा मुक्त यात्राओं के समापन पर केन्द्रीय गृह मंत्री ने AAP सरकार को बताया पंजाब में फैले नशे के कारोबार का जिम्मेदार!

आरके सेठी
चंडीगढ़, 30 सितम्बर।
बम धमाकों की धमकियों और हाई सिक्योरिटी के बीच जालंधर के परागपुर में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब की चुनावी सियासत का एक बड़ा मुद्दा तय करने वाला भाषण दिया। बीजेपी की 13 दिन चली ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर शाह ने ऐलान किया कि अगर पंजाब में बीजेपी की सरकार बनती है तो 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब को चिट्टे के कारोबार से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव बीजेपी “केवल और केवल” नशामुक्त पंजाब के मुद्दे पर लड़ेगी।
शाह का सीधा वादा- 31 दिसंबर 2029 तक चिट्टा खत्म
अमित शाह ने पंजाब की माताओं और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “मैं आज पंजाब की जनता को कहने आया हूं- पंजाब के चुनाव में कई सारे मुद्दे हैं, मगर आने वाला चुनाव बीजेपी केवल और केवल ‘नशा मुक्त पंजाब’ के मुद्दे पर लड़ने वाली है।” इसके बाद उन्होंने कहा, “इस चुनाव में भाजपा का समर्थन करिए, कमल फूल पर वोट डालिए- 31 दिसंबर 2029 से पहले हम पंजाब को चिट्टे के व्यापार से मुक्त कर देंगे।”
‘31 दिसंबर 2029 के बाद कोई आपके बच्चों को ड्रग्स नहीं देगा’
शाह ने अपनी डेडलाइन को सिर्फ चुनावी घोषणा की तरह नहीं बल्कि सीधे परिवारों से किए गए वादे के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, “अब बारी है चिट्टा मुक्त पंजाब की। 31 दिसंबर 2029 के बाद कोई आपके बच्चों को ड्रग्स नहीं देगा।” इसके साथ ही उन्होंने तस्करों के खिलाफ कार्रवाई का अंदाज बताते हुए कहा, “चुन-चुन के सलाखों के पीछे डालेंगे।”
शाह ने पूछा- क्या AAP पंजाब को नशामुक्त कर सकती है?
करीब 20 मिनट के भाषण में शाह बार-बार भीड़ से AAP सरकार को लेकर सवाल करते रहे। उन्होंने पूछा, “क्या AAP पंजाब को नशामुक्त कर सकती है? क्या आप आम आदमी पार्टी पर भरोसा कर सकते हैं?” इसके बाद उन्होंने दिल्ली के कथित शराब घोटाले का संदर्भ देते हुए भीड़ से पूछा कि क्या ऐसे लोगों पर भरोसा किया जा सकता है, जिस पर रैली में मौजूद भीड़ ने नकारात्मक जवाब दिया।
‘AAP ने चिट्टे को खुलेआम चलने दिया’
शाह ने पंजाब में नशे की मौजूदा स्थिति के लिए सीधे AAP सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “AAP ने चिट्टे को खुलेआम चलने दिया।” उन्होंने पंजाब के पुराने गौरव का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय राज्य देश के अन्न भंडार भरता था और पंजाब के जवान देश के लिए बलिदान देते थे, लेकिन आज ‘नशामुक्त पंजाब’ की जरूरत क्यों पड़ रही है- इसका जवाब उन्होंने AAP सरकार की नीतियों में तलाशा।
‘मोदी सरकार ने कश्मीर, नक्सलवाद और नॉर्थ ईस्ट संभाला, अब चिट्टे की बारी’
अमित शाह ने पंजाब के नशे के सवाल को केन्द्र की अपनी सरकार के दूसरे सुरक्षा अभियानों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, “हमने जो वादा किया, वह करके दिखाया है। मोदी जी की सरकार में हमने कश्मीर का मुद्दा सुलझाया, नक्सलवाद का अंत किया और नॉर्थ ईस्ट में आतंकवाद को खत्म किया। अब बारी चिट्टामुक्त पंजाब की है।” इस तरह शाह ने नशामुक्त पंजाब के अभियान को बीजेपी के राष्ट्रीय सुरक्षा मॉडल के साथ जोड़ने की कोशिश की।
भगवंत मान से शाह के सीधे सवाल
शाह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को सीधे निशाने पर लेते हुए चुनावी वादों का हिसाब मांगा। उन्होंने कहा, “मैं भगवंत मान से पूछता हूं- 26 लाख नौकरियों, 16 हजार मोहल्ला क्लीनिक, मेडिकल कॉलेज, विधवा पेंशन, माइनिंग रेवेन्यू और MSP के वादों का क्या हुआ?” इसके बाद शाह ने आरोप लगाया कि इन वादों को पूरा नहीं किया गया और कहा कि अगर सरकार ने केवल नशामुक्ति का वादा भी पूरा कर दिया होता तो लोग उसे माफ कर देते, लेकिन उनके मुताबिक राज्य में ड्रग कारोबार बढ़ने दिया गया।
NCB ऑफिस को लेकर भी CM पर हमला
अमित शाह ने अपने भाषण में एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर आरोप लगाया कि उन्होंने पंजाब में NCB का ऑफिस खुलने नहीं दिया। शाह ने इसे नशे के खिलाफ केन्द्र और राज्य के बीच सहयोग के सवाल से जोड़ते हुए AAP सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। यह आरोप शाह के भाषण का हिस्सा था और इसका स्वतंत्र प्रशासनिक सत्यापन अलग से आवश्यक है।
परिवारों का दर्द लेकर शाह ने बनाया भावनात्मक नैरेटिव
शाह ने कहा कि रैली से पहले उन्होंने नशे से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने एक ऐसी मां का जिक्र किया जिसने नशे के कारण अपने दो बेटे खो दिए थे। शाह के मुताबिक उस मां की एक ही अपील थी कि उसके बेटे तो नहीं बच सके, लेकिन दूसरे परिवारों के बेटे बचाए जाएं। शाह ने इसी भावनात्मक संदर्भ को अपने ‘31 दिसंबर 2029’ वाले वादे से जोड़ दिया।
चार यात्राएं, 117 सीटें और करीब 4 हजार किलोमीटर
अमित शाह की रैली अचानक शुरू किया गया कार्यक्रम नहीं थी। बीजेपी की चार ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राएं’ 18 सितंबर से अलग-अलग रूटों पर निकलीं और पार्टी के अनुसार इनका मकसद पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचना था। चारों यात्राओं ने करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय की और 30 सितंबर को जालंधर में शाह की रैली के साथ अभियान का समापन हुआ।
रैली से पहले बम धमकी, IED का दावा
शाह की रैली से कुछ घंटे पहले जालंधर के कई स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिले। इनमें रैली स्थल, श्री देवी तालाब मंदिर, कोर्ट कॉम्प्लेक्स, स्कूलों और बसों को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। ईमेल में रैली के मंच के नीचे IED रखे होने का दावा भी किया गया था, लेकिन किसी विस्फोटक की बरामदगी की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी और एजेंसियां ईमेल के स्रोत तथा उसकी विश्वसनीयता की जांच कर रही थीं।
धमकी से एक दिन पहले जालंधर में खालिस्तान समर्थक नारे
रैली से ठीक एक दिन पहले जालंधर के रेडक्रॉस भवन की दीवारों पर कथित तौर पर प्रो-खालिस्तान और एंटी-BJP नारे लिखे मिलने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच के लिए विशेष टीम गठित की और सीसीटीवी फुटेज खंगालने की बात कही गई। बम धमकी वाले ईमेल में भी कथित तौर पर प्रो-खालिस्तान भाषा का इस्तेमाल हुआ था।
जालंधर की सड़कों पर शाह से गुजरात को लेकर भी सवाल
शाह की रैली के दिन जालंधर में कुछ एंटी-BJP होर्डिंग भी लगाए गए, जिनमें पंजाब में ड्रग्स की कथित सप्लाई और गुजरात से जुड़े सवाल उठाए गए। होर्डिंग में केन्द्र से पूछा गया कि गुजरात बॉर्डर के रास्ते पंजाब में आने वाली कथित ड्रग सप्लाई को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। यानी जिस मंच से शाह पंजाब में चिट्टे के खिलाफ बीजेपी की लड़ाई का ऐलान कर रहे थे, उसी दिन शहर में उनके सामने सप्लाई के रास्ते और केन्द्र की जिम्मेदारी का सवाल भी राजनीतिक तौर पर उछाला गया।
अमन अरोड़ा का पलटवार- ‘जिन्होंने घर-घर चिट्टा पहुंचाया…’
शाह के आरोपों के जवाब में AAP पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने SAD-BJP पर हमला बोला। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि सिंथेटिक ड्रग्स और ‘चिट्टे’ का फैलाव 2007-2017 के SAD-BJP शासन के दौरान हुआ और कहा कि “जिन लोगों ने चिट्टा हर घर तक पहुंचाया, वे अब लोगों का दर्द बांटने का दिखावा कर रहे हैं।” उन्होंने बीजेपी से सवाल किया कि उस दौर में केन्द्र में उसकी सरकार रहते पंजाब के ड्रग नेटवर्क पर क्या कार्रवाई हुई। अरोड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में आने वाली ड्रग सप्लाई का एक हिस्सा BJP शासित राज्यों से आता है।
नशे के मुद्दे को लेकर अब BJP ने चुनावी रेखा खींच दी
जालंधर की रैली में अमित शाह ने पंजाब के 2027 चुनाव के लिए बीजेपी का एक स्पष्ट चुनावी एजेंडा सामने रख दिया है। उनके भाषण में रोजगार, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और सरकार के दूसरे वादों का उल्लेख जरूर आया, लेकिन बार-बार लौटकर बात चिट्टा और नशामुक्त पंजाब पर ही आई। “केवल और केवल” नशामुक्त पंजाब के मुद्दे पर चुनाव लड़ने का ऐलान और 31 दिसंबर 2029 की डेडलाइन- दोनों मिलकर इस रैली को बीजेपी के पंजाब अभियान की एक स्पष्ट राजनीतिक शुरुआत बनाते हैं।
अब सवाल सिर्फ नशे का नहीं, डेडलाइन का भी होगा
अमित शाह ने पहली बार पंजाब के नशे के मुद्दे पर एक निश्चित तारीख को राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में सामने रखा है- 31 दिसंबर 2029। इसलिए 2027 के चुनावी अभियान में बीजेपी के सामने स्वाभाविक सवाल यही रहेगा कि सत्ता मिलने पर इस तारीख तक पहुंचने की उसकी पूरी कार्ययोजना क्या होगी और किन मापने योग्य लक्ष्यों के आधार पर इस दावे की समीक्षा की जाएगी। जालंधर की रैली से बीजेपी ने पंजाब की 2027 की सियासत में चिट्टे को सिर्फ एक मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि अपने मुख्य चुनावी नैरेटिव के रूप में पेश कर दिया है।

