वेणुगोपाल-पायलट की सख्ती, व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर पार्टी का अभियान रखने की हिदायत।

आरके सेठी
चंडीगढ़, 26 अक्टूबर।
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस हाईकमान ने अपने नेताओं को साफ संदेश देने की कोशिश की है- चुनावी राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर पार्टी का सामूहिक अभियान होगा। चंडीगढ़ में केसी वेणुगोपाल और सचिन पायलट की बैठकों के बीच नेताओं को अनुशासन और आपसी तालमेल पर जोर दिए जाने की खबरें सामने आई हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी की संगरूर रैली के लिए एक लाख लोगों और दिल्ली की रैली के लिए पंजाब से 50 हजार समर्थकों को जुटाने के लक्ष्य की चर्चा है। इन घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो कांग्रेस की रणनीति में चुनावी अभियान के विस्तार के साथ संगठन पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश भी दिखाई देती है।
व्यक्तिगत राजनीति पर लगाम, पार्टी की कमान एक हाथ में रखने का संदेश
बैठक से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं को व्यक्तिगत कैंपेन चलाने के बजाय पार्टी के बैनर तले काम करने की हिदायत दी गई। संगठन में अनुशासन बनाए रखने और नेताओं के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया गया। यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में प्रदेश नेतृत्व की अलग-अलग राजनीतिक गतिविधियों के बजाय साझा रणनीति और समन्वित अभियान की जरूरत होगी।
संगरूर में एक लाख की भीड़ का लक्ष्य, मालवा से अभियान की शुरुआत
राहुल गांधी 4 नवंबर को संगरूर में रैली के जरिए पंजाब में कांग्रेस के चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। पार्टी सूत्रों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में इस रैली के लिए एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य बताया गया है। संगरूर मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला है और मालवा क्षेत्र पंजाब की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में यहां से अभियान शुरू करना कांग्रेस को अपने राजनीतिक संदेश को सीधे प्रदेश की चुनावी बहस में लाने का अवसर देता है।
दिल्ली रैली के लिए पंजाब से 50 हजार समर्थक जुटाने की जिम्मेदारी
कांग्रेस की 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली प्रस्तावित है। यूएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस को इस रैली के लिए 50 हजार लोगों को जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। यह आयोजन मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है। पंजाब से इतनी बड़ी संख्या में समर्थकों को दिल्ली ले जाने की जिम्मेदारी प्रदेश नेतृत्व और जिला इकाइयों की संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा होगी। इससे यह भी पता चलेगा कि हाईकमान के निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए पार्टी का नेटवर्क कितना सक्रिय है।
हाईकमान की सख्ती का असली मतलब: जवाबदेही और तालमेल
वेणुगोपाल और पायलट की बैठकों से जुड़ा अनुशासन का संदेश कांग्रेस की चुनावी तैयारी के एक बड़े सवाल की ओर ध्यान खींचता है- क्या प्रदेश के नेता व्यक्तिगत राजनीतिक गतिविधियों के साथ पार्टी के साझा अभियान को भी समान प्राथमिकता देंगे? चुनाव से पहले संगठन की ताकत केवल वरिष्ठ नेताओं के बयानों या बड़े आयोजनों से तय नहीं होती। जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, नेताओं के बीच समन्वय और तय कार्यक्रमों को लागू करने की क्षमता भी उतनी ही अहम है। इस लिहाज से हाईकमान की रणनीति की वास्तविक परीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों के बाद दिखाई देने वाले संगठनात्मक काम से होगी।
2027 की तैयारी में रैलियों से आगे की चुनौती
कांग्रेस पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार की कानून-व्यवस्था और नशे के मुद्दे पर आलोचना कर रही है तथा सत्ता में वापसी का दावा कर रही है। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप और चुनावी दावे हैं। पार्टी के सामने चुनौती इन मुद्दों को लगातार चलने वाले जनसंपर्क अभियान में बदलने की है। संगरूर और दिल्ली की रैलियां तत्काल संगठनात्मक लक्ष्य हैं, लेकिन 2027 के चुनाव की तैयारी का व्यापक आकलन इस बात से होगा कि कांग्रेस अपने संदेश को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों तक कैसे पहुंचाती है और नेताओं को साझा राजनीतिक दिशा में कितना सक्रिय रख पाती है। पंजाब कांग्रेस में हाईकमान का ‘कंट्रोल प्लान’ फिलहाल बैठकों, अनुशासन संबंधी संदेश और रैलियों के घोषित लक्ष्यों के रूप में सामने आया है। यह रणनीति संगठन को कितना एकजुट कर पाती है, इसका जवाब आने वाले दिनों में पार्टी की जमीनी गतिविधियों से मिलेगा।

