डेरा सच्चा सौदा की तरफ से 12-13 सितम्बर को चार अखबारों में प्रकाशित फुल फ्रंट-पेज विज्ञापनों को पिटीशन में प्रथम दृष्टया कोर्ट की अवमानना का मामला बताया गया, 12 अक्टूबर को है अगली तारीख
डेरा चीफ गुरमीत राम रहीम, डेरा मैनेजमेंट और चारों अखबारों द हिन्दू, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और सच कहूँ के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्रिमिनल कंटेम्प्ट कार्रवाई शुरू करने की मांग

पंजाब इलेक्शन डॉट कॉम ब्यूरो
चंडीगढ़, 8 अक्टूबर। डेरा सच्चा सौदा के विवादित विज्ञापनों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक के बाद एक दो अलग क्रिमिनल कंटेम्प्ट कार्यवाहियां सामने आई हैं। 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पहले से चल रही सुओ-मोटो क्रिमिनल कंटेम्प्ट कार्यवाही में डेरा मैनेजमेंट के साथ द हिन्दू और दैनिक भास्कर से जुड़े प्रकाशक/संपादकीय जिम्मेदार लोगों को नोटिस जारी किए थे। इसके अगले दिन पत्रकार और जन सरोकार के संपादक आरके सेठी की ओर से अलग क्रिमिनल कंटेम्प्ट पिटीशन दाखिल होकर रजिस्टर्ड हुई है। इस पिटीशन में डेरा मैनेजमेंट, गुरमीत राम रहीम सिंह तथा द हिन्दू, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और सच कहूँ से जुड़े जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्रिमिनल कंटेम्प्ट कार्रवाई की मांग की गई है। आरके सेठी पारकर रामचंदर छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई के प्रमुख गवाहों में शामिल रहे हैं।
आरके सेठी की पिटीशन की रजिस्ट्रेशन 8 अक्टूबर को हुई
हाईकोर्ट के केस-स्टेटस रिकॉर्ड के मुताबिक आरके सेठी की पिटीशन सीओसीपी-4937-2026 के रूप में 8 अक्टूबर 2026 को रजिस्टर्ड हुई है। केस का स्टेटस पेंडिंग है और रिकॉर्ड में अगली तारीख 12 अक्टूबर 2026 दर्ज है।
आरके सेठी की ओर से चार अधिवक्ता कर रहे हैं पैरवी
आरके सेठी की ओर से दाखिल क्रिमिनल कंटेम्प्ट पिटीशन में चार अधिवक्ताओं को काउंसल्स फॉर द पिटीशनर के रूप में दर्ज किया गया है। इनमें अधिवक्ता हाकम सिंह, अमृता नेगी, अंशप्रीत कौर और अजयवीर सिंह रंधावा शामिल हैं।
7 अक्टूबर की सुओ-मोटो कार्रवाई के बाद आरके सेठी की अलग पिटीशन
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट में डेरा सच्चा सौदा के विवादित विज्ञापन मामले में सुओ-मोटो क्रिमिनल कंटेम्प्ट कार्यवाही के तहत डेरा मैनेजमेंट, द हिन्दू और दैनिक भास्कर से जुड़े जिम्मेदार लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके अगले ही दिन आरके सेठी की ओर से अलग क्रिमिनल कंटेम्प्ट पिटीशन रजिस्टर्ड हुई। दोनों कार्यवाहियां अलग हैं। आरके सेठी की पिटीशन में डेरा मैनेजमेंट और गुरमीत राम रहीम सिंह के साथ द हिन्दू, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और सच कहूँ से जुड़े संबंधित संपादकीय/प्रकाशकीय जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
चार अखबारों में प्रकाशित हुए विवादित फुल फ्रंट-पेज विज्ञापन
पिटीशन में 12 और 13 सितम्बर 2026 को प्रकाशित चार फुल फ्रंट-पेज विज्ञापनों को मुख्य आधार बनाया गया है। इनमें द हिन्दू, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और सच कहूँ में प्रकाशित विज्ञापनों को शामिल किया गया है। पिटीशन का आरोप है कि विज्ञापनों की सामग्री में अदालतों और न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी ऐसी टिप्पणियां की गईं, जो प्रथम दृष्टया क्रिमिनल कंटेम्प्ट का आधार बनती हैं।
‘फॉल्स विटनेस’ और साजिश के नैरेटिव पर उठाए गए सवाल
पिटीशन में विज्ञापन की उस सामग्री को विशेष रूप से चुनौती दी गई है जिसमें गुरमीत राम रहीम को कथित साजिश के जरिए फंसाने, फॉल्स विटनेस और झूठे मामलों से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। पिटीशन का कहना है कि इस तरह की पब्लिकेशन न्यायिक कार्यवाही और अदालत की अथॉरिटी पर असर डालने की क्षमता रखती है।
आरके सेठी का छत्रपति हत्याकांड की कार्यवाही से सीधा न्यायिक कनेक्शन
पिटीशन में आरके सेठी की अपनी गवाही को भी विज्ञापन के नैरेटिव से जोड़ते हुए रिकॉर्ड का हवाला दिया गया है। आरके सेठी, जिन्हें न्यायिक रिकॉर्ड में राज कुमार और आर.के. सेठी के नाम से भी संदर्भित किया गया है, छत्रपति हत्याकांड की साजिश से जुड़े ट्रायल में पीडब्ल्यू-4 के रूप में परीक्षित हुए थे। पिटीशन में उनकी उस समय की पत्रकारिता, 6 जून 2002 को प्रकाशित लेख और उसके बाद उनके साथ हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
डेरा चीफ, मैनेजमेंट और चारों अखबारों के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग
पिटीशन में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह, डेरा मैनेजमेंट तथा द हिन्दू, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और सच कहूँ से जुड़े संबंधित संपादकीय/प्रकाशकीय जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। पिटीशन में प्रिंटर, पब्लिशर और एडिटर की भूमिका को भी अलग-अलग कानूनी आधार पर देखने की मांग की गई है।
द हिन्दू की तरफ से बाद में माफी भी प्रकाशित की गई
पिटीशन में द हिन्दू की ओर से बाद में प्रकाशित माफी/एपोलॉजी का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि पिटीशन का पक्ष यह है कि बाद की माफी अपने आप में पहले हुए कथित कंटेम्प्ट को समाप्त नहीं करती और पूरे मामले की न्यायिक जांच जरूरी है।
हाईकोर्ट से क्रिमिनल कंटेम्प्ट कार्रवाई की मांग
आरके सेठी की पिटीशन में आरोप लगाया गया है कि विवादित विज्ञापनों की सामग्री अदालत की अथॉरिटी को स्कैंडलाइज या लोअर करने तथा न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप की प्रवृत्ति रखती है। इसी आधार पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 और संविधान के आर्टिकल 215 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

