लंबित न्यायिक मामलों के बीच विज्ञापनों में न्यायपालिका और अदालती प्रक्रिया पर सवाल उठाने के नैरेटिव पर हाईकोर्ट सख्त; सुओ-मोटो आपराधिक अवमानना का मामला

आरके सेठी
चंडीगढ़, 7 अक्टूबर।
डेरा सच्चा सौदा के ‘साजिश नैरेटिव’ वाले विज्ञापनों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्रवाई में 7 अक्टूबर को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने क्रिमिनल कंटेम्प्ट मामले में डेरा मैनेजमेंट, द हिन्दू के पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ तथा दैनिक भास्कर के पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ को नोटिस जारी किया है। आज जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस रविंदर मलिक की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और अगली तारीख 25 नवंबर 2026 तय कर दी। 12 सितंबर 2026 को दोनों अखबारों में छपे फुल-पेज विज्ञापन “What is Dera Sacha Sauda? (Facts vs Fiction)” में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ “साजिश” का नैरेटिव पेश किया गया था। मामला CROCP-9-2026 के रूप में दर्ज है।
12 सितंबर 2026 को द हिन्दू और दैनिक भास्कर में डेरा सच्चा सौदा की ओर से फुल-पेज विज्ञापन प्रकाशित हुए थे। विज्ञापन का शीर्षक “What is Dera Sacha Sauda? (Facts vs Fiction)” था। इसमें डेरा सच्चा सौदा और डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़े मामलों को लेकर डेरा का पक्ष रखा गया था। विज्ञापन में सवाल उठाया गया था- “Was there a conspiracy against Guru Ji?” और जवाब में साजिश का दावा करते हुए एक विशेष नैरेटिव पेश किया गया था।
विज्ञापनों में डेरा की ओर से गुरमीत राम रहीम सिंह को अलग-अलग मामलों में साजिश के तहत फंसाए जाने का नैरेटिव पेश किया गया था। जबकि न्यायिक प्रक्रिया के बाद गुरमीत राम रहीम सिंह को दो साध्वियों के बलात्कार के मामलों में दोषी ठहराकर सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी अभी लंबित है। ऐसे में लंबित न्यायिक प्रक्रिया के बीच विज्ञापनों के जरिए मामलों को एकतरफा साजिश के रूप में पेश करना और न्यायिक फैसलों पर सवाल खड़े करना, अदालत के सामने इस सवाल को भी रखता है कि क्या ऐसी पब्लिसिटी न्यायपालिका पर दबाव बनाने या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा थी।
इन विज्ञापनों के सामने आने के बाद 16 सितंबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस सुभाष मेहला ने मामले का सुओ-मोटो संज्ञान लेते हुए क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्रवाई शुरू की थी। हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया विज्ञापनों की सामग्री को लंबित न्यायिक मामलों और अपीलों के संदर्भ में देखा था तथा अदालतों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर पेश किए गए नैरेटिव को न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप और अदालत की अथॉरिटी को प्रभावित करने के सवाल से जोड़ा था।
हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 215 और कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 2(सी)(i), 2(सी)(iii) और 15(1) के तहत क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्रवाई शुरू की। अदालत की ओर से यह भी देखा गया कि लंबित न्यायिक कार्यवाही के दौरान पेड पब्लिसिटी के जरिए अदालतों और न्यायिक प्रक्रिया को किसी साजिश का हिस्सा बताने वाला नैरेटिव किस तरह न्याय प्रशासन को प्रभावित कर सकता है।
हाईकोर्ट की कार्रवाई में डेरा सच्चा सौदा थ्रू उसके मैनेजमेंट के साथ द हिन्दू के पब्लिशर और एडिटर-इन-चीफ तथा दैनिक भास्कर के पब्लिशर और एडिटर-इन-चीफ को भी नोटिस के दायरे में रखा गया है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को संबंधित दस्तावेजों और विज्ञापन की प्रतियों के साथ इन सभी पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस को भी रजिस्ट्री की मदद करने का निर्देश दिया था, ताकि संबंधित पक्षों का जरूरी विवरण हासिल कर नोटिस की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
16 सितंबर को सुओ-मोटो कार्रवाई के बाद मामला 6 अक्टूबर 2026 को CROCP-9-2026 के रूप में रजिस्टर्ड हुआ और 7 अक्टूबर को इसकी अर्जेंट लिस्टिंग हुई। 7 अक्टूबर को मामला जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस रविंदर मलिक की डिवीजन बेंच के सामने आया। डेरा सच्चा सौदा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल पेश हुए। सुनवाई के दौरान डेरा की ओर से यह पक्ष रखा गया कि तथ्यों और कानून के आधार पर क्रिमिनल कंटेम्प्ट का मामला नहीं बनता और वह अदालत की सहायता करेंगे। विज्ञापन विवाद सामने आने के बाद द हिन्दू की ओर से बिना शर्त माफी मांगी गई थी। अखबार ने विज्ञापन से मिलने वाले राजस्व को नहीं रखने की बात भी कही थी।
छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई के प्रमुख गवाह रहे एवं पत्रकार आरके सेठी की ओर से 28 सितंबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में आपराधिक अवमानना संबंधी पिटीशन दाखिल की गई थी। पिटीशन में 12 सितंबर को प्रकाशित डेरा सच्चा सौदा के विज्ञापनों और उनकी सामग्री के आधार पर कार्रवाई की मांग की गई है। यह पिटीशन फिलहाल रजिस्ट्री स्तर पर है।

