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ED के रडार पर लीडर, बड़े अफसर, डेवलपर और फैसलों की पूरी चेन!

मंत्री के रिश्तेदार से IAS अफसरों तक ED का शिकंजा; 100 करोड़ से ज्यादा की कथित वित्तीय अनियमितताओं में GMADA के फैसलों की पूरी चेन जांच के घेरे में, सरकार तक पहुंची आंच

आरके सेठी
चंडीगढ़, 23 सितंबर।

मोहाली में गमाडा पर ईडी की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी है, लेकिन अब यह मामला सिर्फ किसी एक डेवलपर को मिली कथित वित्तीय राहत या एक-दो प्रॉपर्टी डील तक सीमित नहीं दिख रहा। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित वित्तीय लाभ-नुकसान के एंगल से शुरू हुई पड़ताल में गमाडा के बड़े अफसरों, आईएएस अधिकारियों, निजी डेवलपर्स, लैंड एक्विजिशन, सीएलयू और पुराने अथॉरिटी फैसलों की पूरी चेन खंगाली जा रही है। जांच की कड़ियां पूर्व गमाडा चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के चंडीगढ़ स्थित आवास से लेकर हाउसिंग विभाग के रिकॉर्ड और लुधियाना में मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के एक रिश्तेदार के घर हुई कार्रवाई तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि किस डेवलपर को कितनी राहत मिली, बल्कि यह है कि फैसले किस स्तर पर हुए, फाइल किन-किन स्तरों से गुजरी, किसे कितना लाभ मिला और इस पूरी चेन की जांच सरकार के किस स्तर तक पहुंचती है।

दूसरे दिन भी गमाडा मुख्यालय में रिकॉर्ड खंगाल रही ईडी

22 सितंबर को शुरू हुई ईडी की सर्च और सीज़र कार्रवाई बुधवार को भी गमाडा मुख्यालय में जारी रही। कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ, कार्यालयी कंप्यूटर और मोबाइल फोन से रिकॉर्ड जुटाने तथा कई मंजिलों को सील किए जाने की रिपोर्ट है। पहले दिन की कार्रवाई के दौरान दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 से 27 ठिकानों पर टीमों के पहुंचने की जानकारी सामने आई। ईडी की जांच तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले के संदर्भ में बताई जा रही है।

100 करोड़ से ज्यादा के कथित वित्तीय लाभ का एंगल

ईडी के अनुसार तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े प्रमोटरों की कंपनियों रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स और एमबी इंफ्राबिल्ड ने गमाडा से मोहाली में दो प्रमुख ऑक्शन साइट हासिल की थीं। एजेंसी की पड़ताल में इन कंपनियों को गमाडा की देनदारियों में करोड़ों रुपये की वित्तीय राहत मिलने का एंगल सामने आया है। ईडी के मुताबिक संदिग्ध अनुचित लाभ और सरकारी खजाने को हुए संभावित नुकसान का आंकड़ा 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स, एमबी इंफ्राबिल्ड, मेरा बाबा रियल्टी एसोसिएट्स और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर समेत संबंधित कंपनियों और लोगों के रिकॉर्ड भी जांच में लिए जा रहे हैं।

सेक्टर-62 की फूड कोर्ट साइट बनी पूरी कहानी की पहली बड़ी कड़ी

गमाडा की सेक्टर-62 स्थित फूड कोर्ट साइट नंबर-4 इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजी कड़ियों में है। गमाडा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 1.2 एकड़ की यह होटल/फूड कोर्ट साइट 23 सितंबर 2015 को खुली नीलामी में रखी गई थी। रिकॉर्ड में रिजर्व प्राइस 32.12 करोड़ रुपये से ज्यादा और बिक्री कीमत करीब 32.50 करोड़ रुपये दर्ज है। रेमिगेट सॉफ्टवेयर डेवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को जनवरी 2016 में अलॉटमेंट लेटर जारी किया गया और इसके बाद किस्तों का भुगतान तय हुआ।

पहले राहत पर आपत्ति, फिर फाइल अथॉरिटी तक पहुंची

इस साइट की फाइल में किस्तों, पेनल इंटरेस्ट, निर्माण अवधि और साइट की स्थिति को लेकर लंबे समय तक विवाद चलता रहा। गमाडा के रिकॉर्ड में ऐसे प्रशासनिक रुख का उल्लेख है जिसमें अलॉटी को पेनल इंटरेस्ट में राहत देने पर आपत्ति जताई गई थी। बाद में अलॉटी की ओर से भुगतान व्यवस्था में बदलाव, पेनल इंटरेस्ट में राहत और निर्माण अवधि बढ़ाने की मांग की गई। यही मामला आगे चलकर गमाडा की अथॉरिटी मीटिंग्स का हिस्सा बना।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद 34वीं अथॉरिटी मीटिंग

28 अप्रैल 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लंबित रिप्रेजेंटेशन पर सक्षम अथॉरिटी को कानून के अनुसार सुनवाई करके कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की थी। इसके बाद फूड कोर्ट साइट से जुड़ी फाइल गमाडा की 34वीं अथॉरिटी मीटिंग में पहुंची, जहां अलॉटमेंट, पेनल इंटरेस्ट, किस्तों और निर्माण अवधि से जुड़े मुद्दों पर विचार हुआ।

34वीं से 37वीं और फिर 40वीं बैठक तक पहुंची फाइल

आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक यही मामला बाद में 37वीं अथॉरिटी मीटिंग में भी आया। फाइल में अलॉटमेंट को दोबारा तय करने, पेनल इंटरेस्ट में राहत और निर्माण अवधि बढ़ाने से जुड़े फैसले दर्ज हैं। इसके बाद 40वीं अथॉरिटी मीटिंग में इसी मामले के आंकड़ों और पहले लिए गए फैसलों पर सवाल उठे। यानी एक ही फाइल कई अथॉरिटी बैठकों से गुजरती रही और हर चरण में उसके वित्तीय प्रभाव का सवाल महत्वपूर्ण बना रहा।

40वीं बैठक में आंकड़ों और गणना पर उठे सवाल

गमाडा की 40वीं अथॉरिटी मीटिंग के आधिकारिक रिकॉर्ड में 34वीं बैठक में पेश किए गए आंकड़ों में असंगति का उल्लेख है। रिकॉर्ड के मुताबिक 37वीं बैठक में गलत आंकड़ों और गणनाओं के आधार पर आदेश की पुष्टि की गई और किस्तों को पिछली तारीख से प्रभावी करते हुए दोबारा तय किया गया। 40वीं बैठक में संबंधित एस्टेट ऑफिसर से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया। यही दस्तावेजी कड़ी मौजूदा ईडी जांच में फैसलों की पूरी चेन को समझने के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।

सवाल सिर्फ राहत का नहीं, फैसला लेने की पूरी प्रक्रिया का

गमाडा के अपने रिकॉर्ड में दर्ज इस घटनाक्रम के बाद जांच का दायरा स्वाभाविक रूप से बड़ा हो जाता है। सवाल यह है कि राहत की फाइल किस स्तर से चली, अलग-अलग बैठकों में कौन-से आंकड़े रखे गए, आंकड़ों और गणना में अंतर कैसे आया और पिछली तारीख से किस्तों के पुनर्निर्धारण तक मामला कैसे पहुंचा। इन सवालों का अंतिम जवाब ईडी की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

जून 2025 के बाद लिए गए फैसले भी ईडी के रडार पर

मौजूदा कार्रवाई का एक और महत्वपूर्ण पहलू जून 2025 के बाद लिए गए हाउसिंग विभाग और विकास प्राधिकरणों के फैसले हैं। कैबिनेट के फैसले के बाद जून 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भगवंत मान की जगह चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा को सभी विकास प्राधिकरणों का चेयरमैन बनाए जाने के बाद अथॉरिटी मीटिंग्स में लिए गए फैसलों का रिकॉर्ड भी ईडी की पड़ताल में बताया जा रहा है। खासतौर पर कृषि जमीन को रेजिडेंशियल, कमर्शियल या मिक्स्ड लैंड यूज़ में बदलने वाले सीएलयू फैसले और दूसरे बड़े नीतिगत तथा जमीन से जुड़े निर्णय जांच के दायरे में बताए गए हैं।

5,000 एकड़ से ज्यादा जमीन के एक्विजिशन की पड़ताल

ईडी की जांच अब एक-दो प्रॉपर्टी साइट से कहीं आगे जाती दिख रही है। रिपोर्टों के मुताबिक मोहाली और न्यू चंडीगढ़ में 5,000 एकड़ से ज्यादा जमीन के लैंड एक्विजिशन से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि लैंड एक्विजिशन की प्रक्रिया, मास्टर प्लान में जमीन के इस्तेमाल में बदलाव और निजी रियल एस्टेट कंपनियों को सीएलयू की मंजूरी देने में किस तरह के फैसले लिए गए।

हजारों करोड़ और हवाला का एंगल भी जांच में

ईडी की पड़ताल के संदर्भ में यह भी रिपोर्ट किया गया है कि विकास प्राधिकरणों की प्लानिंग और लैंड एक्विजिशन से जुड़ी शक्तियों के कथित दुरुपयोग के जरिए अपराध से अर्जित रकम को रियल एस्टेट और हवाला के माध्यम से खपाने की आशंका की भी जांच की जा रही है। रिपोर्टों में इस संभावित रकम को हजारों करोड़ रुपये तक बताया गया है।

तिला कंसल्टेंट्स भी जांच के दायरे में

ईडी की दूसरे दिन की कार्रवाई में गमाडा के लिए काम करने वाली तिला कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है। ईडी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट है कि कंपनी की संभावित मध्यस्थ भूमिका की जांच की जा रही है। कंपनी के मालिक के रूप में कीर्ति साधु बास का नाम भी रिपोर्टिंग में सामने आया है। एजेंसी यह देख रही है कि गमाडा से जुड़े लैंड एक्विजिशन और दूसरे मामलों में कंपनी की भूमिका क्या रही और क्या वह किसी लेन-देन की कड़ी के रूप में इस्तेमाल हुई।

तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स की पुरानी जांच भी अहम पृष्ठभूमि

तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स का नाम इस जांच में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी पहले से सीबीआई और ईडी की जांच का सामना कर चुकी है। 2023 में सीबीआई ने कंपनी के सीएमडी जगमोहन गर्ग को करीब 289.15 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित होटल-कमर्शियल प्रोजेक्ट और बैंकों के कंसोर्टियम से जुड़ा था।

गमाडा के बड़े अफसरों से पूछताछ

पहले दिन ईडी ने हाउसिंग विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग, गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर संदीप ऋषि, लैंड एक्विजिशन कलेक्टर रोहित जिंदल, एस्टेट ऑफिसर अमन गुप्ता, एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर अमरिंदर सिंह मल्ही, एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर फाइनेंस राकेश पोपली और चीफ इंजीनियर अजय गर्ग समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की। रिपोर्टों के मुताबिक अधिकारियों के मोबाइल फोन, कार्यालयी कंप्यूटर और दूसरे रिकॉर्ड भी जांच के लिए लिए गए। गमाडा मुख्यालय की कम-से-कम तीन मंजिलें सील किए जाने की भी रिपोर्ट है।

पूर्व चीफ एडमिनिस्ट्रेटर राजीव गुप्ता के घर तक पहुंची कार्रवाई

ईडी की कार्रवाई चंडीगढ़ में आईएएस अधिकारी और गमाडा के पूर्व चीफ एडमिनिस्ट्रेटर राजीव गुप्ता के आवास तक भी पहुंची। उनके आवास पर सर्च की रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू पुराने प्रशासनिक फैसलों और उन फैसलों से जुड़े अधिकारियों के रिकॉर्ड तक पहुंच गया है।

हाउसिंग विभाग भी जांच के केंद्र में

गमाडा के साथ हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग के रिकॉर्ड भी ईडी की पड़ताल में शामिल हैं। जमीन अधिग्रहण, प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन, निजी डेवलपर्स से जुड़े मामले, सीएलयू और अथॉरिटी मीटिंग्स में लिए गए फैसलों को साथ रखकर जांच की जा रही है। यही वजह है कि यह कार्रवाई अब किसी एक साइट या किसी एक अधिकारी की फाइल तक सीमित नहीं दिखाई दे रही।

मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां की वजह से राजनीतिक एंगल भी आया!

हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग के मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां हैं और गमाडा की आधिकारिक डायरेक्टरी में उन्हें मिनिस्टर इन चार्ज के रूप में दर्ज किया गया है। गमाडा की अथॉरिटी संरचना में मुख्यमंत्री चेयरमैन और हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट मंत्री को-चेयरमैन की भूमिका में होते हैं। ऐसे में विभागीय रिकॉर्ड, गमाडा के फैसलों और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची ईडी की कार्रवाई का राजनीतिक महत्व बढ़ना स्वाभाविक है। लुधियाना में मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के एक रिश्तेदार के घर ईडी की की आज की कार्रवाई ये संकेत दे रही है कि मामला अभी और आगे बढेगा!

सरकार तक पहुंचती जांच के सवाल

गमाडा के फैसलों, हाउसिंग विभाग के रिकॉर्ड, मौजूदा और पूर्व वरिष्ठ अफसरों, निजी डेवलपर्स, लैंड एक्विजिशन और सीएलयू की पड़ताल ने इस कार्रवाई को बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बना दिया है। खासकर जून 2025 के बाद लिए गए फैसलों और 5,000 एकड़ से ज्यादा जमीन के एक्विजिशन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच ने यह सवाल खड़ा किया है कि ईडी की पड़ताल की प्रशासनिक चेन आखिर किस स्तर तक जाती है।

ईडी की कार्रवाई पर आप ने उठाए राजनीतिक सवाल

ईडी की कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा-नीत सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया। आप ने दावा किया कि गमाडा जैसे महत्वपूर्ण संस्थान पर कार्रवाई के जरिए पंजाब सरकार के अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ ईडी की जांच का सामने आया आधार कथित मनी लॉन्ड्रिंग, डेवलपर्स को मिली वित्तीय राहत, लैंड एक्विजिशन, सीएलयू और गमाडा से जुड़े फैसलों की पड़ताल है।

अब सबसे बड़ा सवाल- किस फैसले से किसे कितना लाभ?

पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने पर एक तरफ तिरुपति समूह से जुड़ी कंपनियों की गमाडा से हासिल की गई ऑक्शन साइटें और उन्हें मिली कथित वित्तीय राहत सामने आती है, दूसरी तरफ गमाडा के आधिकारिक रिकॉर्ड में आंकड़ों और गणनाओं को लेकर दर्ज सवाल हैं। इसके साथ 5,000 एकड़ से ज्यादा के लैंड एक्विजिशन, सीएलयू, निजी डेवलपर्स, तिला कंसल्टेंट्स, पुराने और मौजूदा अफसरों तथा जून 2025 के बाद लिए गए अथॉरिटी फैसलों की जांच जुड़ गई है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि किस फैसले से किसे कितना लाभ मिला, फाइल किन-किन स्तरों से गुजरी और ईडी को इसमें मनी लॉन्ड्रिंग की कौन-सी कड़ी मिली।

एक फूड कोर्ट साइट से निकली कहानी अब फैसलों की पूरी चेन तक

सेक्टर-62 की फूड कोर्ट साइट से शुरू हुई फाइल, 34वीं और 40वीं अथॉरिटी मीटिंग में दर्ज आंकड़ों और फैसलों के सवाल, तिरुपति समूह से जुड़ी कंपनियां, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित वित्तीय लाभ-नुकसान का ईडी एंगल, 5,000 एकड़ से ज्यादा के लैंड एक्विजिशन, सीएलयू, तिला कंसल्टेंट्स, मौजूदा और पूर्व वरिष्ठ अफसरों तथा मंत्री के रिश्तेदार के घर की रिपोर्टेड कार्रवाई- इन सभी कड़ियों ने इस मामले का दायरा काफी बड़ा कर दिया है। अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही होगा कि इन अलग-अलग कड़ियों के बीच ईडी को कौन-सी ठोस वित्तीय और दस्तावेजी कड़ी मिलती है और वह जांच को किस दिशा में आगे ले जाती है।

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