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जिस ड्रग केस ने पंजाब की सियासत हिला दी थी, उसके अफसर की अब सियासी एंट्री

विक्रम मजीठिया से पूछताछ कर चुके पूर्व ED अफसर निरंजन सिंह ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ में शामिल; पंजाब पुलिस में DSP रहे बलविंदर सिंह सेखों भी साथ आए

आरके सेठी
चंडीगढ़, 23 सितंबर।

पंजाब की सियासत में बुधवार को एक ऐसी राजनीतिक एंट्री हुई, जिसका सीधा संबंध राज्य के सबसे चर्चित ड्रग मामलों में से एक से रहा है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ में शामिल हो गए। चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी नेताओं ने उन्हें संगठन में शामिल कराया। उनके साथ पंजाब पुलिस में DSP रहे बलविंदर सिंह सेखों ने भी पार्टी जॉइन की। कार्यक्रम में सांसद सरबजीत सिंह खालसा, विधायक मनप्रीत सिंह अयाली और अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह सहित पार्टी के नेता मौजूद रहे। भोला ड्रग रैकेट की ED जांच के दौरान चर्चा में आये निरंजन सिंह ने हालांकि रिटायरमेंट के वक्त कहा था कि वह राजनीति में नहीं आयेंगे, लेकिन अब उनका कहना है कि यह वक्त की जरुरत है! ध्यान रहे कि भोला ड्रग रैकेट केस उस वक्त पंजाब की सियासत को हिला डालने वाले केसों में शामिल रहा है!

ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग जांच ने दिलाई पहचान

निरंजन सिंह का नाम 2013-14 के जगदीश सिंह भोला ड्रग रैकेट की ED जांच के दौरान प्रमुखता से सामने आया था। पंजाब पुलिस की ओर से दर्ज कई FIR के आधार पर ED ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत जांच शुरू की थी। जांच का फोकस ड्रग कारोबार से जुड़े पैसों के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों पर था। ED के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले में कुल करीब 95 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की गई थी।

26 दिसंबर 2014 को मजीठिया से पूछताछ

इसी जांच के दौरान निरंजन सिंह ने तत्कालीन पंजाब के राजस्व मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया से 26 दिसंबर 2014 को ED कार्यालय में पूछताछ की थी। उस समय मजीठिया का नाम ड्रग रैकेट से जुड़े कुछ आरोपियों के बयानों के संदर्भ में सामने आया था। मजीठिया ने आरोपों से इनकार किया था। निरंजन सिंह के लिए यह पूछताछ इसलिए भी महत्वपूर्ण बनी क्योंकि इसके बाद उनके तबादले को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

पूछताछ के बाद कोलकाता ट्रांसफर

जनवरी 2015 में निरंजन सिंह का जालंधर से कोलकाता ट्रांसफर कर दिया गया। निरंजन सिंह की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कहा गया कि मजीठिया से पूछताछ ही उनके ट्रांसफर की वजह बनी। दूसरी तरफ ED ने अदालत में ट्रांसफर को प्रशासनिक जरूरत और उनके अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का फैसला बताया था। हाईकोर्ट ने जनवरी 2015 में ट्रांसफर आदेश पर रोक लगा दी। बाद में नवंबर 2015 में केंद्र ने उनका ट्रांसफर आदेश वापस ले लिया।

जांच आगे बढ़ी, निरंजन सिंह डिप्टी डायरेक्टर बने

ट्रांसफर विवाद के बावजूद निरंजन सिंह की ED में भूमिका जारी रही। 2016 में उन्हें असिस्टेंट डायरेक्टर से डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। उनके कार्यकाल में भोला ड्रग केस के अलावा राजा कंडोला समेत कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच भी उनके काम का हिस्सा रही। 2021 में सेवानिवृत्ति तक उनका नाम पंजाब से जुड़े ड्रग और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के संदर्भ में लगातार सामने आता रहा।

भोला केस में 17 आरोपी दोषी

भोला ड्रग केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जुलाई 2024 में विशेष PMLA अदालत ने 17 आरोपियों को दोषी ठहराया। पूर्व DSP जगदीश सिंह भोला को 10 साल की सजा सुनाई गई। ED के अनुसार मामले की जांच के दौरान 95 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की गई थी। अदालत के फैसले में कुल 23 आरोपियों का उल्लेख था, जिनमें चार की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी थी और दो घोषित अपराधी थे।

मजीठिया का मामला फिर लौटा सुर्खियों में

निरंजन सिंह और मजीठिया का पुराना जांच कनेक्शन 2025 में एक बार फिर सामने आया। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया से जुड़े मामले में निरंजन सिंह का बयान दर्ज किया और 2014 की भोला ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बारे में उनसे जानकारी ली। उस समय रिपोर्टों में बताया गया कि ब्यूरो मजीठिया के खिलाफ दर्ज मामले की जांच में पुराने ED रिकॉर्ड और जांच से जुड़े तथ्यों को समझना चाहता था।

रिटायरमेंट के दिन विभागीय कार्रवाई भी हुई थी

निरंजन सिंह 31 मई 2021 को ED के डिप्टी डायरेक्टर पद से रिटायर हुए थे। उसी दिन उनके खिलाफ विभागीय जांच से जुड़ा चार्जशीट/आर्टिकल ऑफ चार्ज भी सामने आया था। यह मामला उनकी बेटी के विवाह समारोह में पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रम और उससे जुड़े भुगतान से संबंधित था, जबकि निरंजन सिंह के पास पहले दोसांझ से जुड़े एक FEMA मामले की जांच रही थी। निरंजन सिंह ने उस कार्रवाई पर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि संबंधित जांच पहले ही दूसरे अधिकारी को ट्रांसफर की जा चुकी थी।

राजनीति से दूर रहने की बात से अब राजनीतिक पारी तक

दिलचस्प बात यह है कि 2021 में ED से रिटायर होने के समय निरंजन सिंह ने सार्वजनिक रूप से राजनीति में जाने से इनकार किया था। बाद में वह पंजाब के ड्रग और जांच से जुड़े मुद्दों पर लगातार सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहे। बुधवार को पार्टी में शामिल होने से पहले उन्होंने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक भारत सरकार की सेवा की और राजनीति में आने की उनकी पहले इच्छा नहीं थी, लेकिन पंजाब में नशे की स्थिति को देखते हुए उन्होंने ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ के साथ जाने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई फैसला नहीं किया है।

नशे के मुद्दे को बनाया जोइनिंग का आधार

निरंजन सिंह ने पार्टी में शामिल होने से पहले कहा था कि उन्हें लगता है कि पंजाब से नशा खत्म करने के मुद्दे पर ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ गंभीरता से काम कर रहा है। उन्होंने पिछली सरकारों के नशे के खिलाफ प्रयासों पर सवाल उठाते हुए कहा कि समस्या अभी भी बनी हुई है। पार्टी की ओर से भी उनकी पहचान को मुख्य रूप से ड्रग मामलों के खिलाफ उनके पुराने काम से जोड़ा गया।

सेखों की एंट्री भी अपने साथ अलग पृष्ठभूमि लाई

निरंजन सिंह के साथ पंजाब पुलिस में DSP रहे बलविंदर सिंह सेखों की जोइनिंग ने भी इस घटनाक्रम को अलग संदर्भ दिया है। सेखों को पंजाब पुलिस ने 2021 में सेवा से बर्खास्त किया था। वह इससे पहले पुलिस सेवा के दौरान कई विवादों में रहे और 2023 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की अवमानना के मामले में उन्हें छह महीने की सजा भी सुनाई गई थी। अदालत की कार्रवाई सोशल मीडिया पर न्यायिक कार्यवाही से संबंधित वीडियो और टिप्पणियों के मामले में हुई थी।

2027 से पहले बढ़ती राजनीतिक गतिविधि

‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ में दोनों की जोइनिंग ऐसे समय हुई है जब पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले संगठन अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रहा है। अगस्त 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार संगठन ने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी थी, हालांकि उस समय तक उसे चुनाव आयोग से औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण और चुनाव चिन्ह नहीं मिला था। संगठन ने चुनाव आयोग के समक्ष पंजीकरण के लिए आवेदन किया हुआ है।

ड्रग केस से राजनीतिक एंट्री तक जुड़ती कड़ियां

निरंजन सिंह की बुधवार की जोइनिंग को समझने के लिए 2013 के भोला ड्रग केस से शुरू हुई उनकी जांच यात्रा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच, 2014 में विक्रम मजीठिया से पूछताछ, उसके बाद ट्रांसफर विवाद और हाईकोर्ट की दखल, बाद में ED में डिप्टी डायरेक्टर के रूप में काम और 2025 में मजीठिया से जुड़े नए मामले में पुराने जांच रिकॉर्ड के लिए उनका बयान- इन सभी घटनाक्रमों के बाद अब वही पूर्व ED अफसर ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ के साथ राजनीतिक मैदान में हैं। 2027 के चुनाव से पहले उनकी यह एंट्री पंजाब में ड्रग के मुद्दे, जांच एजेंसियों के पुराने मामलों और नई राजनीतिक लामबंदी के बीच बन रहे नए राजनीतिक संदर्भ को सामने लाती है।

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