HomePunjabदिल्ली से आई ED, पंजाब में मचा सियासी कोहराम!

दिल्ली से आई ED, पंजाब में मचा सियासी कोहराम!

GMADA दफ्तर सहित कई शहरों में अफसरों की कोठियों पर छापे, करोड़ों की बरामदगी के दावे; AAP कार्यकर्ताओं ने ED वाहनों पर किया हमला, मंत्री मुंडियां का आरोप- बीजेपी में शामिल होने का दबाव; हाईकोर्ट पहुंची मान सरकार, कहा-दिल्ली पंजाब को डराना चाहती है!

आरके सेठी
चंडीगढ़, 24 सितम्बर।

पंजाब में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के मुख्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने राज्य की राजनीति में बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। मोहाली स्थित GMADA दफ्तर से लेकर चंडीगढ़, पंचकूला, लुधियाना और दिल्ली तक कई ठिकानों पर चली तलाशी कार्रवाई अब केवल वित्तीय अनियमितताओं की जांच तक सीमित नहीं रह गई है। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों से पूछताछ, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जब्ती, करोड़ों रुपये की कथित बरामदगी, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का विरोध, ईडी के वाहनों पर हमले और पंजाब सरकार का आधी रात को हाईकोर्ट पहुंचना- इन घटनाओं ने पूरे मामले को केंद्र और पंजाब सरकार के बीच राजनीतिक टकराव के रूप में खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे पंजाब को डराने की कोशिश बताया है, जबकि ईडी की जांच कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर केंद्रित है।

दिल्ली, चंडीगढ़ और जालंधर की संयुक्त टीम ने की कार्रवाई

दिल्ली, चंडीगढ़ और जालंधर से जुड़े ईडी अधिकारियों की संयुक्त टीम ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की सुरक्षा में तलाशी अभियान चलाया। 22 सितम्बर को शुरू हुई कार्रवाई के तहत GMADA मुख्यालय के कई हिस्सों में तलाशी ली गई। दफ्तर की कम-से-कम तीन मंजिलों को सील किए जाने, मोबाइल फोन कब्जे में लेने और वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ किए जाने की खबरें सामने आईं। इसके साथ ही अलग-अलग शहरों में संबंधित कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। इस तरह यह कार्रवाई एक ही सरकारी दफ्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि रियल एस्टेट और भूमि आवंटन से जुड़े व्यापक वित्तीय लेन-देन की जांच का हिस्सा बन गई।

26 ठिकानों पर तलाशी, रियल एस्टेट कंपनियां जांच के दायरे में

ईडी ने इस पूरे अभियान के दौरान दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना सहित विभिन्न स्थानों पर लगभग 26 ठिकानों की तलाशी ली। जांच में तिरुपति इन्फ्राप्रोजेक्ट्स और उससे संबंधित बताई जा रही कंपनियों के नाम सामने आए हैं। इनमें रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स, एमबी इन्फ्राबिल्ड, मेरा बाबा रियल्टी एसोसिएट्स और मेरा बाबा इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों में आरोपित वित्तीय अनियमितताओं का आकार 100 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

GMADA की जमीन और होटल परियोजना से जुड़ा विवाद

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू GMADA की जमीन के आवंटन और उससे जुड़े वित्तीय फैसलों को माना जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, सेक्टर-62 में फूड कोर्ट साइट की नीलामी लगभग 32.5 करोड़ रुपये में हुई थी और बाद में आवंटन से जुड़े मामले में वित्तीय राहत तथा बकाया भुगतान की शर्तों पर भी चर्चा हुई। इसी तरह कुछ रिपोर्टों में लगभग 57 करोड़ रुपये की रियायत अथवा बकाया संबंधी राहत और करीब 290 करोड़ रुपये के होटल-बैंक धोखाधड़ी मामले का भी उल्लेख किया गया है। GMADA की जमीन और रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े फैसले अब जांच के केंद्र में हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों तक पहुंची जांच

GMADA के कार्यालय के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों के आवास भी जांच के दायरे में आए। रिपोर्टों के अनुसार, चंडीगढ़ में पूर्व GMADA मुख्य प्रशासक राजीव गुप्ता के आवास पर भी तलाशी ली गई। कार्रवाई के दौरान नकदी, कीमती सामान, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की कथित बरामदगी को लेकर कई तरह की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में एक वरिष्ठ अधिकारी के आवास से लगभग 2.5 करोड़ रुपये नकद और सोना-चांदी मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, इस कथित बरामदगी के संबंध में पूरी आधिकारिक जब्ती सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

36 घंटे की कार्रवाई के बाद लौटी ईडी की टीम

GMADA मुख्यालय में तलाशी अभियान लगभग 36 घंटे तक चला। 24 सितम्बर को सुबह करीब 11:30 बजे ईडी की टीम के दफ्तर से निकलने की खबर सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेजों से भरे 30 से अधिक बैग और स्कैन किए गए रिकॉर्ड वाली हार्ड डिस्क अपने कब्जे में ली गईं। यह सामग्री जांच एजेंसी के लिए वित्तीय लेन-देन, जमीन आवंटन और संबंधित कंपनियों के रिकॉर्ड की पड़ताल में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, जब्त किए गए दस्तावेजों में क्या-क्या शामिल है और उनसे किस तरह के निष्कर्ष निकलते हैं, इस बारे में ईडी की ओर से विस्तृत सार्वजनिक जानकारी सामने आना बाकी है।

आप कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, ईडी की गाड़ियों पर हमला

ईडी की कार्रवाई के विरोध में आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मोहाली में प्रदर्शन किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं शैरी कलसी, चेतन सिंह जौरामाजरा और एसएस अहलूवालिया सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता विरोध में शामिल हुए। रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 400 बताई गई है। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब ईडी के वाहनों को घेरकर विरोध किया गया और कुछ वाहनों के शीशे क्षतिग्रस्त किए जाने की खबर सामने आई। इस घटना ने जांच एजेंसी की कार्रवाई और राजनीतिक विरोध के बीच टकराव को और बढ़ा दिया।

हाईकोर्ट पहुंची मान सरकार, रात में हुई सुनवाई

ईडी की तलाशी कार्रवाई के दौरान पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सरकार की ओर से आरोप लगाया गया कि GMADA परिसर में अधिकारियों को अनुचित तरीके से रोका गया और उनकी स्वतंत्रता प्रभावित हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट में देर रात सुनवाई हुई और परिसर की स्थिति की जांच के लिए वारंट ऑफिसर नियुक्त किए जाने की खबर सामने आई। सरकार ने अपनी याचिका में अधिकारियों को कथित रूप से गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखे जाने का मुद्दा उठाया। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि केंद्रीय एजेंसी की जांच के बीच राज्य सरकार ने सीधे न्यायपालिका के समक्ष हस्तक्षेप की मांग की। हाईकोर्ट की कार्यवाही और आगे आने वाले आदेश इस मामले में महत्वपूर्ण रहेंगे।

मान सरकार का आरोप- दिल्ली पंजाब को डराना चाहती है

पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब सरकार कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर इसका विरोध करेगी। आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी कार्रवाई को पंजाब की राजनीति में दबाव बनाने की कोशिश बताया। पार्टी का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का इस्तेमाल विपक्षी सरकारों को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार का यह रुख अब इस पूरे विवाद का केंद्रीय राजनीतिक पहलू बन गया है। दूसरी ओर, ईडी की ओर से जांच को कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्री मुंडियां का आरोप- बीजेपी में शामिल होने का दबाव

इस विवाद को और राजनीतिक गर्मी उस समय मिली, जब पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने आरोप लगाया कि उन पर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए दबाव बनाया गया। मंत्री ने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। उन्होंने अपने रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह सैनी प्रिंस के साहनेवाल स्थित आवास पर हुई तलाशी के दौरान परिवार के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। मुंडियां के अनुसार, तलाशी के बाद उन्हें ऐसा लिखित दस्तावेज दिया गया जिसमें कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिलने की बात कही गई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की पूरी जानकारी सार्वजनिक होना अभी बाकी है।

बिट्टू के बयान से बढ़ा विवाद, मुंडियां ने किया पलटवार

ईडी की कार्रवाई के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के एक बयान ने भी पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया। बिट्टू की ओर से दावा किया गया कि पंजाब के एक कैबिनेट मंत्री विदेश चले गए हैं। इसके बाद हरदीप सिंह मुंडियां ने सामने आकर इस दावे का खंडन किया और कहा कि वह चंडीगढ़ में मौजूद हैं, अमेरिका नहीं गए हैं। इस बयानबाजी ने ईडी की कार्रवाई के साथ-साथ मंत्रियों की मौजूदगी और राजनीतिक गतिविधियों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया। एक ओर बीजेपी की तरफ से मंत्री के विदेश जाने का दावा सामने आया, वहीं दूसरी ओर संबंधित मंत्री ने इसे गलत बताया।

मनीष सिसोदिया और आप नेताओं ने केंद्र पर साधा निशाना

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने ईडी की कार्रवाई को पंजाब और पंजाबियों पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से पंजाब की निर्वाचित सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। शैरी कलसी ने बीजेपी की नशा मुक्ति यात्राओं और ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव के संदर्भ में जोड़कर सवाल उठाए। अभी तक सामने आए घटनाक्रम में दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक और कानूनी तर्क रख रहे हैं। इस टकराव का असर पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ सकता है।

2027 से पहले पंजाब की राजनीति में नया टकराव

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले GMADA की कार्रवाई ने आम आदमी पार्टी, बीजेपी और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। आम आदमी पार्टी इसे पंजाब की निर्वाचित सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश बता रही है, जबकि जांच का केंद्र कथित वित्तीय अनियमितताएं और रियल एस्टेट से जुड़े लेन-देन हैं। ईडी की कार्रवाई के दौरान कार्यकर्ताओं का विरोध, वाहनों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटना और राज्य सरकार का हाईकोर्ट पहुंचना इस विवाद को प्रशासनिक जांच से आगे राजनीतिक संघर्ष के रूप में सामने लाता है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की कार्यवाही, ईडी की आधिकारिक जानकारी, बरामदगी की पुष्टि और संबंधित कंपनियों तथा अधिकारियों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल GMADA रेड ने पंजाब की सियासत में केंद्रीय एजेंसी, राज्य सरकार और राजनीतिक दलों के बीच टकराव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

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