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अकाली दल नेता चावला पर रेप FIR के बाद SGPC के एडिशनल हेड ग्रंथी समेत दो सस्पेंड!

पंथक सियासत और SGPC के सामने बड़े सवाल!

आरके सेठी
चंडीगढ़, 17 सितंबर।

श्री आनंदपुर साहिब से एसजीपीसी सदस्य और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ रेप के आरोपों में दर्ज एफआईआर के बाद मामला अब सिर्फ एक अकाली नेता के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है। इसी शिकायत से जुड़े घटनाक्रम में एसजीपीसी के दो कर्मचारियों के नाम सामने आने और उसके बाद उनके सस्पेंशन ने पूरे मामले को पंथक संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े सवालों के बीच ला खड़ा किया है।

एडिशनल हेड ग्रंथी समेत दो सस्पेंड

एसजीपीसी ने श्री अकाल तख्त साहिब के एडिशनल हेड ग्रंथी भाई मलकीत सिंह और तख्त श्री केसगढ़ साहिब में ड्राइवर के तौर पर सेवा निभा रहे मोहन सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, महिला की शिकायत में दोनों के नाम सामने आने के बाद एसजीपीसी ने यह कार्रवाई की। दोनों की भूमिका की जांच के लिए फ्लाइंग विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चावला के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला ने अपनी शिकायत में भाई मलकीत सिंह और मोहन सिंह के नाम का भी उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता को लंबे समय से बहरीन में रहने वाली महिला बताया गया है। हालांकि दोनों कर्मचारियों की कथित भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए विशिष्ट आरोपों का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

एसजीपीसी ने शुरू की विभागीय जांच

एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नण के मुताबिक, मीडिया रिपोर्टों के जरिए सामने आई जानकारी का संज्ञान लेते हुए एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देश पर दोनों कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया। मामले की गहन जांच फ्लाइंग विभाग करेगा। जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना है कि शिकायत में सामने आए दोनों नामों की वास्तविक भूमिका क्या रही और उनके खिलाफ आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता बनती है या नहीं।

चावला पर 21 अगस्त को एफआईआर

अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ श्री आनंदपुर साहिब थाने में 21 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायत में एक महिला ने चावला पर यौन शोषण, धमकी और गलत तरीके से रोककर रखने सहित गंभीर आरोप लगाए हैं। एफआईआर में 27 फरवरी से 19 अगस्त के बीच की कथित घटनाओं का उल्लेख है और श्री आनंदपुर साहिब स्थित भाई बचित्तर सिंह यात्री निवास से जुड़ी एक कथित घटना भी इसमें शामिल बताई गई है।

चावला ने आरोपों को बताया झूठा,अकाली दल और एसजीपीसी पदों से इस्तीफा

चावला ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ साजिश रची गई है और वह अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
एफआईआर के बाद चावला ने एसजीपीसी सदस्यता और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि जब तक वह आरोपों से कानूनी तौर पर मुक्त नहीं हो जाते, तब तक किसी राजनीतिक या धार्मिक पद पर नहीं रहेंगे। इस फैसले के बाद चावला की राजनीतिक और पंथक संस्थागत भूमिका फिलहाल अलग हो गई है।

अब व्यक्ति से संस्था तक पहुंचा सवाल

इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व यहीं से बढ़ता है। चावला के खिलाफ एफआईआर एक व्यक्ति से जुड़ा आपराधिक मामला था, लेकिन उसी शिकायत के संदर्भ में एसजीपीसी से जुड़े दो कर्मचारियों का सस्पेंशन होने के बाद सवाल संस्था की जवाबदेही तक पहुंच गया है। खास तौर पर श्री अकाल तख्त साहिब के एडिशनल हेड ग्रंथी का नाम सामने आने के बाद यह मामला पंथक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और उनसे जुड़े लोगों के आचरण की निगरानी से भी जुड़ गया है।

पंथक सियासत के सामने जवाबदेही का सवाल

शिरोमणि अकाली दल की राजनीति में पंथक मुद्दों और धार्मिक संस्थाओं की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में पार्टी के एक प्रमुख पंथक चेहरे के खिलाफ गंभीर आरोप, उसका पदों से इस्तीफा और उसी मामले में एसजीपीसी के दो कर्मचारियों पर कार्रवाई- इन तीनों घटनाक्रमों ने जवाबदेही के सवाल को महत्वपूर्ण बना दिया है। एसजीपीसी ने तत्काल सस्पेंशन और जांच का रास्ता अपनाया है, लेकिन आगे की तस्वीर जांच के निष्कर्ष से ही स्पष्ट होगी।

2027 से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच पंथक सियासत का हर महत्वपूर्ण घटनाक्रम राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकता है। चावला प्रकरण ने अकाली दल से जुड़े एक प्रमुख चेहरे, एसजीपीसी की संस्थागत भूमिका और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही को एक साथ चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में राजनीतिक दल इस मामले को किस रूप में उठाते हैं और एसजीपीसी की जांच से क्या सामने आता है, यह इस घटनाक्रम के राजनीतिक प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

2027 की पंथक राजनीति में उठेंगे सवाल

चावला प्रकरण अब सिर्फ एफआईआर और इस्तीफे की खबर नहीं रह गया है। एसजीपीसी के दो कर्मचारियों के सस्पेंशन ने इसे पंथक संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता के बड़े सवाल से जोड़ दिया है। 2027 से पहले पंजाब की पंथक सियासत में यह घटनाक्रम कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है, इसका जवाब आने वाले दिनों की जांच, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और एसजीपीसी की अगली कार्रवाई से सामने आएगा।

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