117 सीटें, 4,000 किलोमीटर की यात्रा; AAP ने 2007-17 के शासनकाल से लेकर बॉर्डर और ड्रग सप्लाई तक उठाए सवाल- नशे की लड़ाई अब राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई भी?

आरके सेठी
चंडीगढ़, 17 सितंबर।
पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में है। बीजेपी 18 सितंबर से राज्य में चार ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राएं’ शुरू करने जा रही है। पार्टी के अनुसार ये यात्राएं सभी 117 विधानसभा सीटों से गुजरेंगी और करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी। चारों यात्राओं का समापन 30 सितंबर को जालंधर में होगा।
बीजेपी ने यात्रा को नशे के खिलाफ जनजागरण अभियान बताया है। इसके साथ पार्टी ने भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी अभियान में शामिल किया है। पहली यात्रा पठानकोट के माधोपुर स्थित एकता स्थल से शुरू होगी, जबकि अन्य यात्राएं फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का और तलवंडी साबो से रवाना होंगी।
यात्रा से पहले AAP का पलटवार
बीजेपी के अभियान की शुरुआत से एक दिन पहले AAP ने सीधा जवाबी मोर्चा खोल दिया है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बीजेपी से सवाल किया कि पंजाब में ड्रग सप्लाई पर सवाल उठाने से पहले गुजरात और राजस्थान से जुड़े नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर और केंद्र की जिम्मेदारी पर भी जवाब दिया जाना चाहिए।
AAP ने खास तौर पर पंजाब के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर बीएसएफ की भूमिका और सीमा पार से होने वाली कथित तस्करी का मुद्दा उठाया है। पार्टी ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से जुड़े ड्रग बरामदगी के मामलों का भी हवाला देते हुए बीजेपी से जवाब मांगा है।
2007-17 का रिकॉर्ड फिर बहस में
AAP के हमले का एक अहम हिस्सा 2007 से 2017 के अकाली-बीजेपी शासनकाल से जुड़ा है। हरपाल चीमा ने उस दौर में पंजाब में नशे की समस्या को लेकर उठे सवालों को मौजूदा बहस से जोड़ा है। इसी क्रम में AAP ने 2015 में ड्रग केस की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी निरंजन सिंह के तबादले का भी मुद्दा उठाया है। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक उनका जालंधर से कोलकाता तबादला हुआ था, लेकिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी। बाद में उनका तबादला रद्द कर दिया गया और वे जांच से जुड़े रहे। इसलिए इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोपों में जांच रोक दिए जाने की बात कही जाती रही है, लेकिन उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड इस बात की पुष्टि नहीं करता कि तबादले के कारण जांच रुक गई थी।
कांग्रेस ने दोनों पर सवाल उठाए
इस बहस में कांग्रेस भी अलग रुख के साथ सामने है। प्रताप सिंह बाजवा ने AAP और बीजेपी दोनों पर नशे के मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने का आरोप लगाया है। उनका जोर ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ने पर है।
इस तरह पंजाब में नशे को लेकर तीन अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव सामने आ रहे हैं- बीजेपी AAP सरकार की जवाबदेही पर जोर दे रही है, AAP केंद्र और सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा रही है, जबकि कांग्रेस दोनों पक्षों की राजनीतिक रणनीति पर सवाल कर रही है।
2027 से पहले ‘चिट्टा’ फिर बड़ा मुद्दा
बीजेपी की 117 सीटों और करीब 4,000 किलोमीटर की यात्रा ऐसे समय शुरू हो रही है जब पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी का राजनीतिक दौर तेज हो रहा है। इसलिए इस अभियान का असर केवल नशे के खिलाफ जनजागरण तक सीमित रहेगा या यह चुनावी नैरेटिव का हिस्सा भी बनेगा, यह आने वाले दिनों की राजनीतिक बहस का अहम विषय होगा।
असली सवाल कार्रवाई के असर का
नशे पर राजनीतिक दावों और जवाबी आरोपों के बीच असली सवाल कार्रवाई के परिणाम का है- ड्रग सप्लाई चेन पर कितना असर पड़ा, बड़े नेटवर्क पर कितनी कार्रवाई हुई, युवाओं तक नशे की पहुंच कितनी घटी और नशा मुक्ति एवं पुनर्वास की व्यवस्था का वास्तविक असर क्या रहा।
18 सितंबर से शुरू होने वाली बीजेपी की यात्राएं और उसके जवाब में AAP का राजनीतिक अभियान यह संकेत दे रहा है कि पंजाब में ‘चिट्टा’ का मुद्दा एक बार फिर सिर्फ नशे की समस्या नहीं, बल्कि जवाबदेही और राजनीतिक नैरेटिव की बहस का भी हिस्सा बन चुका है।

