गायत्री बिश्नोई की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में केस, कांग्रेस विधायक खैरा बोले- सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की सजा; सरकारी कोठी के निजी इस्तेमाल पर सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ था विवाद

आरके सेठी
चंडीगढ़, 5 अक्टूबर।
पंजाब की राजनीति में कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा और आम आदमी पार्टी के बीच चल रहा विवाद अब सीधे पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। मोहाली के साइबर क्राइम थाने में AAP नेता गायत्री बिश्नोई की शिकायत पर खैरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में सेक्सुअल हैरेसमेंट, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, आपराधिक धमकी समेत कई आरोपों से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था जब खैरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब में AAP नेताओं और सरकारी आवासों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए और इसी सिलसिले में गायत्री बिश्नोई और मनीष सिसोदिया को लेकर निजी टिप्पणियां भी कीं। बिश्नोई ने इन टिप्पणियों को अपने चरित्र पर हमला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
एफआईआर में क्या-क्या धाराएं लगीं?
पुलिस ने खैरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(1)(iv), 75(3), 79, 351 और 61 के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 लगाई है। इन धाराओं में सेक्सुअल हैरेसमेंट से जुड़े आरोप, महिला की गरिमा का अपमान, आपराधिक धमकी और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई का आधार सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर खैरा की ओर से की गई पोस्ट और उससे जुड़ी डिजिटल सामग्री को बताया गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित पोस्ट, वीडियो तथा अन्य डिजिटल सामग्री की जांच करेगी।
गायत्री बिश्नोई ने क्या शिकायत की?
गायत्री बिश्नोई ने खैरा की सोशल मीडिया टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए पंजाब पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना था कि खैरा ने उनके बारे में ऐसी टिप्पणियां कीं, जो उनके चरित्र और गरिमा को प्रभावित करती हैं। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से खैरा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। पंजाब राज्य महिला आयोग ने भी इस विवाद का संज्ञान लेते हुए महिला की गरिमा और सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर सख्त रुख अपनाया था।
कहां से शुरू हुआ था सरकारी कोठी का विवाद?
विवाद की शुरुआत पंजाब के मंत्रियों को आवंटित सरकारी आवासों के इस्तेमाल को लेकर खैरा के सवालों से हुई। खैरा ने आरोप लगाया था कि AAP से जुड़े कुछ लोग चंडीगढ़ में मंत्रियों को आवंटित सरकारी आवासों का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसी क्रम में उन्होंने सेक्टर-39 स्थित एक सरकारी आवास को लेकर सवाल उठाए थे। गायत्री बिश्नोई ने जवाब देते हुए कहा था कि वह अपने माता-पिता के साथ स्वास्थ्य संबंधी वजहों से एक मंत्री को आवंटित आवास में रह रही हैं और उनके पिता का इलाज चल रहा है। इस स्पष्टीकरण के बाद भी खैरा और बिश्नोई के बीच सोशल मीडिया पर विवाद आगे बढ़ता गया।
सरकारी आवास से निजी आरोपों तक कैसे पहुंचा मामला?
सरकारी आवास के इस्तेमाल पर सवाल उठाने के बाद खैरा ने बिश्नोई और मनीष सिसोदिया के संबंधों को लेकर भी सोशल मीडिया पर टिप्पणियां कीं। बिश्नोई ने इन्हें निजी और आपत्तिजनक बताते हुए पलटवार किया तथा कहा कि खैरा ने उनके चरित्र पर सवाल उठाया है। इसके बाद महिला आयोग की प्रतिक्रिया सामने आई और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इस तरह जो विवाद शुरुआत में सरकारी संपत्ति और आवास के इस्तेमाल के सवाल से शुरू हुआ था, वह कुछ ही दिनों में AAP और कांग्रेस के बीच निजी आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया।
खैरा का जवाब- सरकार के खिलाफ बोलने की सजा
एफआईआर दर्ज होने के बाद सुखपाल खैरा ने पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने पंजाब सरकार और AAP नेताओं के सरकारी आवासों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे और अब उनकी आवाज दबाने के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। खैरा ने एफआईआर की कार्रवाई को सरकार के खिलाफ उनकी राजनीतिक सक्रियता से जोड़ते हुए इसे उन्हें चुप कराने की कोशिश बताया है।
‘एक्स’ को भी पुलिस का नोटिस
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई सिर्फ एफआईआर तक सीमित नहीं रही। रिपोर्टों के अनुसार साइबर क्राइम पुलिस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ को भी संबंधित पोस्ट हटाने को लेकर नोटिस जारी किया और निर्धारित समय में सामग्री हटाने को कहा। पुलिस ने अपने नोटिस में संबंधित सामग्री को एफआईआर में दर्ज आरोपों से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की है। इससे साफ है कि जांच में अब सोशल मीडिया पोस्ट, उनके प्रसार और उनसे जुड़े डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।
राजनीतिक टकराव की टाइमिंग भी महत्वपूर्ण
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और AAP तथा कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव लगातार तेज हो रहा है। सरकारी आवासों के इस्तेमाल को लेकर खैरा के सवालों ने पहले ही AAP के भीतर और सरकार के स्तर पर जवाबदेही का सवाल खड़ा किया था। इस विवाद में अकाली दल के नेताओं ने भी सरकारी आवासों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए थे। अब उसी विवाद से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर एफआईआर होने से मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाई में पहुंच गया है।
सरकारी कोठी से शुरू हुई लड़ाई, अब अदालत-पुलिस तक
सुखपाल खैरा और AAP के बीच यह टकराव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी शुरुआत एक सार्वजनिक मुद्दे- सरकारी आवास के इस्तेमाल-से हुई थी, लेकिन कुछ ही दिनों में यह व्यक्तिगत आरोपों और फिर एफआईआर तक पहुंच गया। एक तरफ खैरा इसे सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत बता रहे हैं, दूसरी तरफ गायत्री बिश्नोई की शिकायत पर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब सवाल यह है कि सरकारी कोठी से शुरू हुई यह राजनीतिक लड़ाई आगे सिर्फ राजनीतिक रहेगी या पुलिस जांच के बाद इसका दायरा और बढ़ेगा?

