कांग्रेस का प्रदर्शन और बीजेपी ने मांगा सीएम और मंत्री चीमा का इस्तीफा, अंतिम संस्कार पर भी भड़का आक्रोश, ग्रामीणों ने चिता की लकड़ियां फेंकीं; सरकारी नौकरी और मुआवजे के आश्वासन पर परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी

आरके सेठी
चंडीगढ़, 8 सितंबर।
अपने बेटे को ‘चिट्टे’ के चंगुल से छुड़ाने के लिए पंजाब के फाइनेंस मिनिस्टर हरपाल चीमा से सवाल करने की कीमत एक आम आदमी गुलजार को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी! मौत से पहले उसने एक वीडियो बनाया और दबाव की बात कहते हुए जिम्मेदारों की लिस्ट में मंत्री चीमा का भी नाम लिया; इसके बाद पंजाब में सियासी भूचाल आ गया है। घटना संगरूर के तूर बंजारा गांव की है। इस घटना ने आम आदमी पार्टी सरकार को चौतरफा घेर दिया है। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पांचों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि इस एफआईआर में मंत्री हरपाल चीमा का नाम नहीं है। और अब पंजाब की सियासत इसी बात पर उबल रही है।
अंतिम संस्कार पर भी फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
संगरूर के तूर बंजारा गांव निवासी गुलजार सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान गांव में भीषण आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए चिता की लकड़ियां तक फेंक दीं। परिवार ने सरकारी नौकरी और मुआवजे की मांग रखी। सरकार की तरफ से आश्वासन मिलने के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। इससे साफ है कि मामला अब सिर्फ एफआईआर और राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव में भी गहरा असंतोष है।
मंत्री के सामने गुलजार ने चिट्टे और बेटे की नशे की लत का मुद्दा उठाया था
6 सितंबर को मंत्री हरपाल चीमा तूर बंजारा गांव में लोगों की शिकायतें सुनने पहुंचे थे। इसी दौरान गुलजार सिंह ने उनके सामने गांव में चिट्टे की उपलब्धता और अपने बेटे के नशे का आदी होने की बात रखी थी। उसने नशे की बिक्री पर कार्रवाई की मांग की थी।
गुलजार के परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि मंत्री के कार्यक्रम में नशे का मुद्दा उठाने के बाद पंचायत से जुड़े लोगों ने उस पर माफी मांगने के लिए दबाव बनाया। आरोप है कि उसे डराया-धमकाया भी गया। दूसरी तरफ सरपंच पक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और कहा है कि गुलजार को धमकी नहीं दी गई थी, बल्कि उसकी बात सुनकर मदद का भरोसा दिया गया था।
मौत से पहले के वीडियो ने पूरे मामले को राजनीतिक विस्फोट में बदल दिया
गुलजार का मौत से पहले का वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। वीडियो में वह अपने साथ हुए घटनाक्रम और कथित दबाव का जिक्र करता दिखाई देता है और कुछ लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताता है। विपक्ष ने इसी वीडियो को सरकार के खिलाफ अपने हमले का आधार बनाया है।
एफआईआर में पांच लोग आरोपी, हरपाल चीमा का नाम नहीं
दिर्बा थाने की पुलिस ने गुलजार सिंह की मौत के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने, उत्पीड़न और एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक एफआईआर में सरपंच पक्ष से जुड़े लोगों समेत पांच नाम हैं। हरपाल चीमा का नाम एफआईआर में आरोपी के तौर पर नहीं है। और इन सभी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
मंत्री हरपाल चीमा ने अपनी भूमिका से इनकार किया
हरपाल चीमा ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि गुलजार ने उनके सामने नशे की समस्या और अपने बेटे की लत का मुद्दा उठाया था। उन्होंने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को नशा बेचने वालों पर कार्रवाई के लिए कहा था। चीमा ने विपक्ष पर मामले को राजनीतिक रंग देने और गलत कहानी बनाने का आरोप लगाया है।
सरपंच पक्ष ने भी धमकी और दबाव के आरोपों को बताया बेबुनियाद
सरपंच पक्ष का कहना है कि गुलजार ने मंत्री के सामने नशे का मुद्दा उठाया था और इसके बाद उससे बातचीत की गई थी। सरपंच के पति बलजीत सिंह ने आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उनका दावा है कि मंत्री और पंचायत सदस्यों ने गुलजार को समझाया और मदद का भरोसा दिया था।
अनुराग ढांडा ने दो वीडियो का दावा कर पूरे घटनाक्रम पर नया सवाल खड़ा किया
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने मामले में सामने आए दो वीडियो को लेकर अलग पक्ष रखा है। उनका दावा है कि पहले वीडियो में किसी मंत्री का नाम नहीं है। ढांडा ने कहा कि अगर गुलजार ने जहर खाया था तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए था, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक उस पर दबाव डालकर दूसरा वीडियो बनवाया गया और मंत्री का नाम लेने के लिए कहा गया।
अनुराग ढांडा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “अगर कोई व्यक्ति मंत्री के सामने आकर अपनी समस्या रख रहा है, तो उसका विश्वास है उस सरकार में।” उन्होंने बीजेपी और विपक्ष पर मौत को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप भी लगाया और कहा कि जांच में जिसका भी नाम सामने आएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। यह दावा भी अब पुलिस जांच का विषय है कि वीडियो कितने हैं और वे किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड हुए।
जसवीर कौर के एआई वाले बयान के बाद गांव में जमकर हंगामा
मामले में आम आदमी पार्टी नेता और दिड़बा मार्केट कमेटी की चेयरपर्सन जसवीर कौर के बयान ने अलग विवाद खड़ा कर दिया। परिवार से मिलने पहुंचीं जसवीर कौर ने कथित तौर पर गुलजार के वायरल वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से तैयार बताया। इस दावे के बाद ग्रामीण भड़क गए, सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई और कई ग्रामीण उनकी गाड़ी के आगे लेट गए। पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला।
इलाज के दौरान अस्पताल बदलने पर भी उठे सवाल
जहरीला पदार्थ निगलने के बाद गुलजार को पहले संगरूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे पटियाला के राजिंदरा अस्पताल रेफर किया गया और बाद में लुधियाना के डीएमसी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिवार और उससे जुड़े लोगों ने इलाज में देरी और जरूरी चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के आरोप लगाए हैं।
एनएचआरसी ने लिया संज्ञान
मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी एनएचआरसी तक पहुंच चुका है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मामले का संज्ञान लिया है। आयोग की सक्रियता के बाद पुलिस और प्रशासन के सामने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और संबंधित तथ्यों को सामने रखने की चुनौती बढ़ गई है।
कांग्रेस ने किया प्रदर्शन, सीएम हाउस की ओर मार्च पर वाटर कैनन चला
गुलजार की मौत और पंजाब की कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पंजाब कांग्रेस ने चंडीगढ़ में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग के नेतृत्व में कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और राजा वडिंग समेत कई नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
राजा वडिंग बोले- गुलजार की मौत नशे के फैलाव की सख्त याद दिलाती है
राजा वडिंग ने गुलजार की मौत को पंजाब में नशे की गंभीर स्थिति से जोड़ते हुए सरकार पर हमला किया। उनका कहना था कि आप सरकार करोड़ों रुपये के विज्ञापनों के जरिए नशे की वास्तविकता छिपाने की कोशिश कर रही है, लेकिन सच्चाई ज्यादा समय तक छिप नहीं सकती।
सुखपाल खैरा ने मंत्री और दूसरे लोगों पर कार्रवाई मांगी
कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने एक्स पर गुलजार का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि उसे मंत्री हरपाल चीमा से सवाल पूछने के बाद मानसिक दबाव में डाला गया। उन्होंने मंत्री और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर की मांग की। खैरा ने अपने पोस्ट में लिखा-“वह साफ तौर पर फाइनेंस मिनिस्टर हरपाल चीमा और अन्य लोगों के नाम ले रहा है, जो उसकी मौत के लिए जिम्मेदार होंगे, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने घमंडी मंत्री से चिट्टे के बारे में सवाल किया था!”
जयराम रमेश ने इसे आप सरकार का शर्मनाक चेहरा बताया
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुलजार प्रकरण पर आप सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने एक्स पर लिखा- “पंजाब में आप सरकार का भयावह और पूरी तरह शर्मनाक चेहरा!” उन्होंने कहा कि गुलजार ने नशे से बर्बाद अपने बेटे की पीड़ा सामने रखकर फाइनेंस मिनिस्टर हरपाल चीमा से नशे की बिक्री पर सवाल किया था।
बीजेपी ने सीएम भगवंत मान और हरपाल चीमा के इस्तीफे मांगे
बीजेपी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और फाइनेंस मिनिस्टर हरपाल चीमा दोनों के इस्तीफे की मांग की है। बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि गुलजार ने मंत्री के सामने नशे का मुद्दा उठाया और उसके बाद उस पर दबाव बनाया गया। बीजेपी ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पंजाब बीजेपी ने गुलजार सिंह की मौत की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि मामला राज्य सरकार के मंत्री से जुड़ा होने के कारण स्वतंत्र जांच जरूरी है।
बिक्रम मजीठिया ने कहा- “एक सवाल पूछने की कीमत: मौत!”
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर गुलजार प्रकरण को लेकर सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने लिखा- “एक सवाल पूछने की कीमत: मौत!” मजीठिया ने आरोप लगाया कि गुलजार ने हरपाल चीमा से चिट्टे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल किया और उसके बाद उस पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया। उन्होंने मंत्री के खिलाफ एफआईआर और कार्रवाई की मांग की।
सुखबीर बादल ने भी नशे पर सरकार से सीधा सवाल किया
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने एक्स पर सरकार से पूछा कि अगर गुलजार का बेटा रोज चिट्टा ले रहा था तो नशे के कारोबार को रोकने में सरकार नाकाम क्यों रही। उन्होंने गुलजार की मौत को सरकार के नशा विरोधी अभियान पर गंभीर सवाल के रूप में पेश किया।
रवनीत सिंह बिट्टू ने चीमा को हटाने और केस दर्ज करने की मांग की
पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हरपाल चीमा को मंत्रिमंडल से हटाने और उनके खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। उन्होंने गुलजार की मौत को नशे के मुद्दे पर सवाल उठाने वाले व्यक्ति के साथ हुए घटनाक्रम से जोड़ते हुए सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की।
मोहंजीत प्रकरण के बाद एक हफ्ते में दूसरा बड़ा विवाद
गुलजार प्रकरण से कुछ दिन पहले संगरूर के शेरों गांव में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के दौरान मोहंजीत सिंह ने नशे के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए काला झंडा दिखाया था। हिरासत के बाद उसने पुलिस प्रताड़ना के आरोप लगाए। पुलिस ने उसके खिलाफ पहले से दर्ज मामलों और डोप टेस्ट का हवाला दिया था। बाद में एक डीएसपी का तबादला और तीन पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइंस भेजा गया था।
संगरूर में लगातार दो घटनाएं
एक तरफ मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में नशे के खिलाफ सवाल उठाने वाले मोहंजीत सिंह का मामला सामने आया और दूसरी तरफ कुछ ही दिनों बाद फाइनेंस मिनिस्टर के कार्यक्रम में गुलजार सिंह ने चिट्टे की उपलब्धता और अपने बेटे की लत का मुद्दा उठाया। दोनों घटनाओं के बाद पुलिस कार्रवाई और नागरिकों की आवाज से जुड़े सवाल उठे हैं। विपक्ष अब इन्हीं घटनाओं को जोड़कर सरकार के नशा विरोधी अभियान पर हमला कर रहा है।
आप सरकार के ‘नशा मुक्त पंजाब’ अभियान की जमीन पर परीक्षा शुरू
नशे के खिलाफ कार्रवाई आम आदमी पार्टी सरकार के प्रमुख राजनीतिक दावों में रही है। लेकिन गुलजार प्रकरण ने सरकार के सामने एक अलग सवाल खड़ा कर दिया है-अगर गांवों में परिवार अब भी चिट्टे की उपलब्धता और युवाओं की लत की शिकायत कर रहे हैं तो सरकार का अभियान जमीन पर कितना असर डाल रहा है? यही सवाल अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
6 सितंबर के बाद का पूरा घटनाक्रम
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मंत्री के कार्यक्रम के बाद गुलजार के साथ क्या हुआ। उससे कौन मिला, क्या उसे माफी मांगने के लिए कहा गया, पंचायत की कोई बैठक हुई या नहीं, पुलिस से उसका क्या संपर्क हुआ, मौत से पहले उसके कितने वीडियो बने और वे किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड हुए- इन सवालों के जवाब ही दबाव के आरोपों और आप के दो वीडियो वाले दावे की वास्तविकता सामने ला सकते हैं।
मुद्दा बना तो सरकार को मुश्किल होगी!
गुलजार प्रकरण अभी अकेले 2027 का चुनावी मुद्दा तय नहीं करता, लेकिन अगर आने वाले महीनों में नशे पर सवाल उठाने वाले लोगों से जुड़े ऐसे और मामले सामने आते हैं तो विपक्ष के पास आप सरकार के खिलाफ सीधा राजनीतिक नैरेटिव तैयार हो सकता है। एक तरफ ‘नशा मुक्त पंजाब’ का दावा और दूसरी तरफ गांवों में चिट्टे की उपलब्धता, परिवारों की परेशानी और सवाल उठाने वालों पर दबाव के आरोप- यही टकराव आने वाले महीनों में सरकार की साख और जवाबदेही का बड़ा सवाल बन सकता है।

