डीए बकाया पर हाईकोर्ट सख्त: पंजाब सरकार के वकील ने उंची आवाज में बात की तो चीफ जस्टिस बोले-कानून के मुताबिक चलेगी अदालत, दबाव से नहीं झुकेगी संस्था

आरके सेठी
चंडीगढ़, 7 सितम्बर।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नये चीफ जस्टिस जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पद संभालने के पहले ही दिन पंजाब सरकार के सामने लंबित महंगाई भत्ते के मामले में अदालत का रुख साफ कर दिया। शपथ लेने के बाद जस्टिस मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने डीए-डीआर बकाया से जुड़ी अर्जियों पर सुनवाई की और स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी दबाव या रणनीति से प्रभावित नहीं होगी।
शपथ के तुरंत बाद उसी मामले में सुनवाई
जस्टिस मिश्रा ने सोमवार सुबह पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 37वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। इसके तुरंत बाद वह डीए मामले की सुनवाई के लिए पीठ में बैठे। यह वही मामला है जिसमें उनकी अध्यक्षता वाली पीठ ने 3 अगस्त को पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल को कर्मचारियों और पेंशनरों का लंबित डीए/डीआर भुगतान करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने कहा- फैसला सिर्फ कानून के आधार पर होगा
सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अदालत कानून के मुताबिक चलेगी और संस्था को किसी भी तरह की रणनीति से दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने संविधान की शपथ का उल्लेख करते हुए न्यायपालिका के दायित्व पर जोर दिया। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह न याचिकाकर्ताओं की दलीलों से प्रभावित होगी और न सरकार की बात से- निर्णय कानून के आधार पर होगा।
सरकारी पक्ष की दलील पर भी पीठ का कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील के ऊंचे स्वर में दलील रखने पर पीठ ने आपत्ति जताई। इसके बाद अदालत ने साफ किया कि मामले में किसी भी पक्ष की ओर से दबाव बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत की टिप्पणी सीधे तौर पर न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और कानून के शासन पर केंद्रित थी।
3 अगस्त के आदेश में सरकार को मिला था कड़ा निर्देश
डीए मामले में 3 अगस्त को जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल को सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को उस समय तक लंबित डीए/डीआर की किस्तें 15 दिन के भीतर जारी करने का निर्देश दिया था। भुगतान में चूक होने पर 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज का प्रावधान भी किया गया था। साथ ही, बकाया चुकाए जाने तक बड़े पैमाने पर विज्ञापन जैसे गैर-उत्पादक खर्च से बचने को कहा गया था।
अब विवाद अनुपालन तक पहुंच गया
सोमवार को हाईकोर्ट के सामने सवाल यह था कि 3 अगस्त के आदेश का पंजाब सरकार ने कितना अनुपालन किया। आवेदकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दावा किया कि सरकार ने अभी तक अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं किया है। राज्य की ओर से इसका विरोध किया गया, जिसके बाद पीठ ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल मामले की फाइल देखे बिना विस्तृत सुनवाई नहीं करेगी।
पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुकी है
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार की सुनवाई में आवेदकों की ओर से कहा गया कि राज्य की ओर से दायर चुनौती में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कुछ कमियां बताई हैं, जिन्हें अभी दूर किया जाना बाकी है। इसी बीच हाईकोर्ट में पहले के आदेश के अनुपालन का सवाल बना हुआ है।
अगली सुनवाई अब गुरुवार को होगी
पीठ ने सोमवार को डीए मामले से जुड़ी अर्जियों पर अंतिम फैसला नहीं दिया। अदालत ने मामले को इस सप्ताह गुरुवार को आगे सुनवाई के लिए रखने का निर्णय किया। यानी चीफ जस्टिस के पहले दिन की सख्त टिप्पणियों के बाद भी डीए विवाद का अगला निर्णायक चरण अभी बाकी है।
पंजाब सरकार के लिए मामला सिर्फ भुगतान का नहीं
पंजाब सरकार के सामने अब दो स्तरों पर चुनौती है। एक तरफ उसे कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए/डीआर के भुगतान को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश का सामना करना है, दूसरी तरफ वह उसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुकी है। हाईकोर्ट में अनुपालन का सवाल और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती- दोनों समानांतर चल रहे हैं।
चीफ जस्टिस के पहले दिन का संदेश महत्वपूर्ण
जस्टिस मिश्रा का पहले ही दिन का रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अब कार्यवाहक नहीं, बल्कि हाईकोर्ट के पूर्णकालिक चीफ जस्टिस हैं। उन्होंने सुनवाई के दौरान जिस स्पष्टता से कानून के शासन और न्यायिक स्वतंत्रता पर जोर दिया, उससे यह संकेत जरूर मिला कि अदालत अपने फैसलों और आदेशों के मामले में कार्यपालिका के दबाव से प्रभावित होने वाली नहीं है।
अब नजर गुरुवार की सुनवाई पर
अब असली निगाह गुरुवार को होने वाली सुनवाई पर है। क्या पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के 3 अगस्त के निर्देश का पूरा अनुपालन किया है? क्या अदालत अनुपालन को लेकर कोई नया निर्देश देगी? और सुप्रीम कोर्ट में राज्य की चुनौती के बीच हाईकोर्ट इस मामले को किस दिशा में आगे बढ़ाएगा- इन सवालों से पंजाब के हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाये का अगला रास्ता तय होगा।
पहले ही दिन जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने एक बात साफ कर दी है- डीए विवाद में अगली लड़ाई राजनीतिक दबाव की नहीं, अदालत के आदेश और उसके अनुपालन की होगी।

