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शाह के दौरे से पहले मान का CBI दांव, झोटा केस में सियासी खेल? आठवें दिन भी नहीं हुआ अंतिम संस्कार!

सुबह मान का ऐलान, फिर मानसा पहुंचे अमित शाह ने भी दिया जांच का भरोसा; अब इंसाफ के साथ सियासी श्रेय की लड़ाई भी चर्चा में। गुरदासपुर में विक्रमजीत और संगरूर में गुलजार के परिवारों से भी मिले शाह, दोनों को इंसाफ का भरोसा।

आरके सेठी
चंडीगढ़, 20 अक्तूबर।

पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला मंगलवार को नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया। हत्या के आठवें दिन भी झोटा का अंतिम संस्कार नहीं हुआ। मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच का ऐलान किए जाने के बावजूद परिवार ने अपना रुख नहीं बदला। परिवार की मांग है कि जब तक मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के डीजीपी गौरव यादव इस्तीफा नहीं देते, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। ऐसे में मामला अब केवल जांच एजेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार और पुलिस के शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही भी इसके केंद्र में है।

शाह के दौरे से पहले मान का ऐलान

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा की कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला CBI को सौंपा जा रहा है। यह परिवार और इंसाफ कमेटी की प्रमुख मांगों में शामिल था। ऐलान ऐसे समय हुआ, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पंजाब दौरा होना था और उन्हें मानसा में झोटा के परिवार से मिलना था। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक टाइमिंग को अहम बना दिया। मान के ऐलान के बाद सवाल उठा कि क्या पंजाब सरकार ने शाह के दौरे से पहले परिवार की प्रमुख मांग स्वीकार कर राजनीतिक पहल अपने हाथ में लेने की कोशिश की?

CBI जांच के बावजूद परिवार की मांगें कायम

परिवार की मांग केवल जांच एजेंसी बदलने तक सीमित नहीं रही। झोटा के पिता भीम सिंह और आंदोलन से जुड़े लोगों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे के साथ मामले से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई। परिवार ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ है कि CBI जांच की घोषणा से परिवार की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। सरकार की ओर से जांच सौंपने का ऐलान एक अहम घटनाक्रम है, लेकिन परिवार ने इसे अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त नहीं माना। अब गतिरोध का केंद्र जांच से आगे बढ़कर राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही बन गया है।

मानसा पहुंचे अमित शाह, पिता भीम सिंह से मुलाकात

मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मानसा पहुंचे और परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह तथा परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। शाह ने भरोसा दिया कि CBI की टीम अगले दिन दोपहर 12 बजे तक मानसा पहुंच जाएगी और 120 दिनों में जांच पूरी करने का प्रयास किया जाएगा। शाह के आश्वासन से जांच को लेकर समयसीमा की बात सामने आई, लेकिन परिवार की मुख्य शर्त- मुख्यमंत्री और डीजीपी का इस्तीफा- अपनी जगह कायम रही। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि मुलाकात के बाद गतिरोध खत्म हो गया या परिवार ने सभी मांगें छोड़ दीं। परिवार का रुख स्पष्ट है कि अंतिम संस्कार का फैसला उसकी मांगों से जुड़ा हुआ है।

क्या परिवार शाह के भरोसे से संतुष्ट है?

झोटा केस में परिवार की प्रतिक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि CBI जांच के ऐलान के बाद भी उसने अंतिम संस्कार करने से इनकार किया है। परिवार का कहना है कि मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे तक अंतिम संस्कार नहीं होगा। इससे साफ है कि जांच का भरोसा मिलने के बावजूद परिवार की जवाबदेही संबंधी मांग का समाधान नहीं हुआ है। इस मामले में परिवार की मांगों और सरकार के फैसले के बीच अंतर बना हुआ है। सरकार ने CBI जांच का ऐलान किया, जबकि परिवार इस्तीफे और अन्य मांगों पर भी कार्रवाई चाहता है। यही अंतर आंदोलन के आगे के रुख और अंतिम संस्कार पर सहमति के सवाल को अहम बनाता है।

गुरदासपुर और संगरूर में भी शाह की मुलाकातें

अमित शाह ने पंजाब दौरे के दौरान गुरदासपुर में विक्रमजीत सिंह और संगरूर में गुलजार के परिवारों से भी मुलाकात की और उन्हें न्याय का भरोसा दिया। इस तरह दौरे में तीन परिवारों के मामले सामने आए। इन मुलाकातों ने पंजाब में नशे से जुड़े मुद्दों, हिंसा और जवाबदेही को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को भी सामने रखा। हालांकि, तीनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं। साझा पहलू यह है कि अमित शाह ने परिवारों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिया, जबकि झोटा केस में CBI जांच के ऐलान के बाद भी अंतिम संस्कार का गतिरोध कायम है।

मान का ऐलान, शाह का भरोसा और सियासी श्रेय की लड़ाई

भगवंत मान के ऐलान ने परिवार की प्रमुख मांग स्वीकार करने का संदेश दिया, जबकि अमित शाह की मुलाकात और समयबद्ध जांच के आश्वासन ने केंद्र को भी इस मामले में प्रत्यक्ष भूमिका में ला दिया। पंजाब सरकार इस फैसले को परिवार की मांग स्वीकार करने के रूप में पेश कर सकती है, जबकि भाजपा इसे मामले में केंद्र की सक्रियता और न्याय के भरोसे से जोड़ सकती है। ऐलान और मुलाकातों की टाइमिंग ने राजनीतिक श्रेय का सवाल जरूर खड़ा किया है, लेकिन परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल अभी भी अंतिम संस्कार और जवाबदेही का है। आठ दिन बाद भी पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है और परिवार मुख्यमंत्री तथा डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर कायम है। CBI जांच का ऐलान इस मामले का अहम घटनाक्रम है, लेकिन इससे अंतिम संस्कार का गतिरोध अपने आप खत्म नहीं हुआ। फिलहाल झोटा केस में राजनीतिक घोषणाओं और परिवार की मांगों के बीच दूरी बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि क्या सरकार और परिवार के बीच कोई सहमति बनती है, या अंतिम संस्कार का इंतजार और लंबा होता है।

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