सीएम ऑफिस करप्शन केस: मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन को सोमवार को फिर बुलाया; 22 अधिकारियों के तबादलों-पोस्टिंग और सरकारी फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में

आरके सेठी
चंडीगढ़, 17 अक्टूबर।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने राज्य सरकार के 15 विभागों से संबंधित फाइलों, नोटशीट और ड्राफ्ट रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की है। जांच एजेंसी ने अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग, सरकारी नीतियों, भर्ती, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और लाइसेंस संबंधी फैसलों से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन और पांच अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मामले की जांच का हिस्सा है। राजबीर सिंह घुम्मन शुक्रवार, 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-30 स्थित CBI कार्यालय पहुंचे। वह दोपहर करीब 2:30 बजे वहां पहुंचे और रात करीब 8:30 बजे बाहर निकले। उनसे लगभग छह घंटे पूछताछ की गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घुम्मन ने बताया कि उनसे करीब 40 सवाल पूछे गए और उन्हें सोमवार को फिर पेश होने के लिए कहा गया है। घुम्मन के वकील जीपीएस घुम्मन ने कहा कि उनके मुवक्किल जांच में सहयोग कर रहे हैं। वकील के मुताबिक, उन्हें और कुछ अन्य लोगों को भी व्हाट्सऐप के जरिए पेशी के नोटिस मिले थे। घुम्मन की यह पेशी 5 अक्टूबर को FIR दर्ज होने के बाद पूछताछ के लिए उनकी पहली उपस्थिति थी।
22 अधिकारियों के रिकॉर्ड भी मांगे
CBI अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग से संबंधित 22 अधिकारियों के रिकॉर्ड की भी जांच करना चाहती है। इनमें IAS और PCS अधिकारियों के साथ पुलिस, जेल, वन विभाग तथा स्थानीय निकायों से जुड़े अधिकारी शामिल बताए गए हैं। एजेंसी मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेज भी देखना चाहती है। इनमें घुम्मन की OSD के रूप में नियुक्ति और मामले के एक अन्य आरोपी जितिन कुमार गोयल उर्फ राजा से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।
नीतियों और सरकारी फैसलों की भी जांच
जांच एजेंसी ने वर्ष 2023-24 और 2024-25 की तबादला नीतियों तथा वर्ष 2024 की खाद्यान्न श्रम और ढुलाई नीति से जुड़ी फाइलें मांगी हैं। इसके अलावा सरकारी खरीद, भर्ती, आवासीय परियोजनाओं, हथियार लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक फैसलों से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं। इन दस्तावेजों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या अधिकारियों की नियुक्तियों, तबादलों या सरकारी निर्णयों को कथित तौर पर अनुचित प्रभाव अथवा आर्थिक लाभ के लिए प्रभावित किया गया था। हालांकि, दस्तावेज मांगे जाने से अपने आप किसी विभाग या अधिकारी के खिलाफ आरोप साबित नहीं होते।
ED की सामग्री के आधार पर दर्ज हुई FIR
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से सामने लाई गई सामग्री और आरोपों से जुड़ा है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 5 अक्टूबर को CBI को FIR दर्ज कर जांच करने और दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद CBI ने घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। FIR में सरकारी अधिकारियों के तबादलों-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, टेंडर और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को कथित तौर पर प्रभावित करने के आरोपों की जांच की जा रही है। शुरुआती सामग्री में सितंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच विभिन्न विभागों में तबादलों और पोस्टिंग से जुड़े कथित हस्तक्षेप के 21 मामलों का उल्लेख भी रिपोर्टों में किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने FIR पर रोक नहीं लगाई
पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने CBI की FIR पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन मामले में आरोपियों के खिलाफ अंतरिम अवधि में दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। अदालत ने पंजाब सरकार को जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा। इस आदेश का अर्थ यह है कि जांच जारी रह सकती है, लेकिन अंतरिम सुरक्षा की शर्तों का पालन करना होगा। मामले में आगे की सुनवाई और अदालत के अगले आदेश महत्वपूर्ण होंगे। राजबीर सिंह घुम्मन ने CBI की जांच की वैधता पर सवाल उठाते हुए FIR और तलाशी संबंधी कार्रवाई को चुनौती दी है।
चुनाव से पहले राजनीतिक महत्व
मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े इस मामले में सरकारी विभागों के रिकॉर्ड की जांच और OSD से पूछताछ पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। विपक्षी दलों को सरकार पर सवाल उठाने का अवसर मिल सकता है, जबकि आम आदमी पार्टी सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आने वाले दिनों में CBI की जांच, सरकार का पक्ष और न्यायिक कार्यवाही इस मामले की दिशा तय करेंगे।

