HomePunjabमोहाली जीएमएडीए पर ईडी की रेड, चीफ इंजीनियर का ऑफिस सील

मोहाली जीएमएडीए पर ईडी की रेड, चीफ इंजीनियर का ऑफिस सील

40 करोड़ की छूट से लेकर सीएलयू मामलों तक पहुंची जांच; वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल कब्जे में, हाउसिंग सिस्टम के फैसलों पर बढ़े सवाल

आरके सेठी
चंडीगढ़, 22 सितंबर।

मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी जीएमएडीए के मुख्यालय में मंगलवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट यानी ईडी की रेड हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जालंधर, चंडीगढ़ और दिल्ली से ईडी की टीमें जीएमएडीए कार्यालय पहुंचीं और रिकॉर्ड तथा दस्तावेजों की जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान चीफ इंजीनियर का ऑफिस सील किए जाने की जानकारी सामने आई है। वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए जाने की रिपोर्ट है। चीफ इंजीनियर, एस्टेट ऑफिसर और एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर से पूछताछ किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, मंगलवार शाम तक ईडी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।

40 करोड़ की छूट वाला मामला

जीएमएडीए से जुड़ा करीब 40 करोड़ की नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस और पेनल इंटरेस्ट में राहत का मामला ईडी की जांच में पहले से है। मामला सेक्टर-62, मोहाली की 1.13 एकड़ की फूड कोर्ट साइट से जुड़ा है, जिसे सितंबर 2015 में रेमिगेट बिल्डर्स को नीलामी के जरिए आवंटित किया गया था। इस साइट का रिजर्व प्राइस 32.50 करोड़ था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आवंटी ने कुल रकम का 20 प्रतिशत और पहली किस्त के रूप में करीब 9.87 करोड़ जमा किए थे। बाद में साइट का कब्जा, बकाया राशि और नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस को लेकर विवाद सामने आया।

जीएमएडीए की 34वीं अथॉरिटी बैठक में हुआ फैसला

यह मामला फरवरी 2026 में हुई जीएमएडीए की 34वीं अथॉरिटी बैठक में पहुंचा, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा ने की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अथॉरिटी ने करीब 40 करोड़ की नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस और उससे जुड़े पेनल इंटरेस्ट की मांग को उचित नहीं माना और बकाया राशि पर राहत देने के साथ अलॉटमेंट की तारीख को फरवरी 2022 तय करने का फैसला किया। इस फैसले के बाद मामला ईडी की जांच के दायरे में आया।

फाइनेंस डिपार्टमेंट ने उठाए प्रक्रियागत सवाल

पंजाब सरकार के फाइनेंस डिपार्टमेंट ने जीएमएडीए द्वारा राहत देने की प्रक्रिया पर गंभीर प्रक्रियागत और कानूनी सवाल उठाए थे। विभाग ने कहा था कि जिन मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार एस्टेट ऑफिसर या चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के स्तर पर था, उन्हें पूरी अथॉरिटी के सामने एजेंडा के रूप में रखने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। विभाग ने यह भी सवाल उठाया कि महत्वपूर्ण वित्तीय प्रभाव वाले एजेंडा बैठकों में आखिरी समय पर क्यों भेजे गए। फाइनेंस डिपार्टमेंट ने संबंधित बैठकों के फैसलों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की थी।

ईडी पहले ही मांग चुकी है रिकॉर्ड

40 करोड़ की राहत वाले मामले में ईडी ने जीएमएडीए के मौजूदा और पूर्व चीफ इंजीनियर से पूछताछ की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जांच में 2015 में साइट की नीलामी से लेकर बाद में नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस और पेनल इंटरेस्ट से जुड़े फैसलों तक के रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। अलग-अलग समय पर तैयार हुई इंजीनियरिंग रिपोर्टों में साइट की स्थिति को लेकर अंतर भी जांच का हिस्सा बना है।

सीएलयू मामलों तक भी पहुंची जांच

जीएमएडीए से जुड़ी ईडी की जांच का दूसरा बड़ा सिरा सनटेक सिटी और अल्टस स्पेस बिल्डर्स से जुड़े चेंज ऑफ लैंड यूज यानी सीएलयू मामलों तक पहुंचता है। ईडी इन मामलों में सीएलयू मंजूरियों, लेआउट में बदलाव और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। पंजाब के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से भी इस जांच के सिलसिले में पूछताछ हो चुकी है। पूर्व चीफ सेक्रेटरी अनुराग वर्मा और आईएएस अधिकारी कनवल प्रीत बराड़ से सनटेक सिटी प्रोजेक्ट में सीएलयू और लेआउट से जुड़े मामलों पर पूछताछ की जा चुकी है। संबंधित अधिकारियों ने जांच के दौरान किसी नियम उल्लंघन या बिल्डरों को फायदा पहुंचाने से इनकार किया है।

अल्टस मामले में ईडी खरड़ अदालत पहुंची

सीएलयू जांच में 18 सितंबर को एक महत्वपूर्ण नया घटनाक्रम सामने आया। ईडी ने अल्टस स्पेस बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और धीर कंस्ट्रक्शंस से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग को लेकर खरड़ की अदालत का रुख किया। ईडी ने आरोप लगाया कि उसकी जांच में संज्ञेय अपराध से संबंधित सामग्री सामने आई है और पुलिस से एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने मोहाली के एसएसपी और संबंधित थाने से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिसकी अगली सुनवाई 25 सितंबर को निर्धारित है।

सनटेक सिटी मामले में किसानों के कंसेंट लेटर्स की भी जांच

सनटेक सिटी से जुड़े मामले में ईडी की जांच कथित तौर पर किसानों से संबंधित कंसेंट लेटर्स और उनके आधार पर सीएलयू हासिल करने की प्रक्रिया तक पहुंची है। ईडी की जांच 2022 में मुल्लांपुर थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ी है। एजेंसी के अनुसार इस मामले में जमीन से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेजों और उनसे हासिल की गई सीएलयू मंजूरियों की मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच की जा रही है। ईडी की ओर से लगाए गए आरोपों को संबंधित पक्षों के खिलाफ अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता; जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

जीएमएडीए की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण

जीएमएडीए पंजाब के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट सिस्टम की महत्वपूर्ण अथॉरिटी है। जमीन की नीलामी, सीएलयू, डेवलपमेंट फीस, लेआउट और रियल एस्टेट प्रोजेक्टों से जुड़े अनेक प्रशासनिक फैसले इसके अधिकार क्षेत्र से जुड़े होते हैं। ऐसे में जब ईडी की अलग-अलग जांचों में जीएमएडीए के रिकॉर्ड और अधिकारियों से संबंधित जानकारी सामने आ रही है, तो जांच का दायरा सिर्फ निजी डेवलपर्स तक सीमित नहीं रह जाता। सरकारी स्तर पर लिए गए फैसलों की प्रक्रिया और जिम्मेदारी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है।

अब सवाल सरकारी फैसलों की जवाबदेही का

करीब 40 करोड़ की राहत वाले मामले में पहले ही फाइनेंस डिपार्टमेंट प्रक्रियागत और कानूनी सवाल उठा चुका है। दूसरी तरफ सीएलयू से जुड़े मामलों में ईडी की जांच निजी रियल एस्टेट कंपनियों के साथ-साथ संबंधित प्रशासनिक फैसलों और अधिकारियों तक पहुंची है। ऐसे में मंगलवार की जीएमएडीए कार्रवाई के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि किन फाइलों, अनुमतियों और फैसलों की जांच की जा रही है और उन फैसलों की जिम्मेदारी किस प्रशासनिक स्तर तक जाती है।

चीफ इंजीनियर का ऑफिस सील, मोबाइल कब्जे में

मंगलवार की कार्रवाई में चीफ इंजीनियर का ऑफिस सील किए जाने और वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल फोन कब्जे में लिए जाने की रिपोर्ट इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण नया पहलू है। चीफ इंजीनियर, एस्टेट ऑफिसर और एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर से पूछताछ की जानकारी भी सामने आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईडी किन फाइलों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और प्रशासनिक फैसलों को आगे की जांच का आधार बनाती है।

जांच कितनी दूर जाएगी?

जीएमएडीए में मंगलवार की ईडी कार्रवाई को पिछले कई महीनों में सामने आए घटनाक्रमों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। एक तरफ रेमिगेट से जुड़े करीब 40 करोड़ की राहत का मामला है, जिस पर फाइनेंस डिपार्टमेंट ने सवाल उठाए और ईडी ने अधिकारियों से पूछताछ की। दूसरी तरफ सनटेक सिटी और अल्टस स्पेस बिल्डर्स से जुड़े सीएलयू मामलों की जांच है, जिसमें ईडी अब एफआईआर दर्ज कराने के लिए अदालत तक पहुंच चुकी है। इन दोनों जांचों के बीच मंगलवार को जीएमएडीए मुख्यालय में हुई कार्रवाई ने पंजाब के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट सिस्टम में लिए गए फैसलों की जांच को एक नया आयाम दिया है।

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