संगरूर में नशे के खिलाफ बीजेपी, कांग्रेस, अकाली दल समेत विपक्षी दलों और संगठनों का संयुक्त मोर्चा; मोहंजीत सिंह और गुलजार सिंह मामलों में कार्रवाई की मांग, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना

आरके सेठी
चंडीगढ़, 22 सितम्बर।
पंजाब में नशे के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों ने अब मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में उनके घर के बाहर पक्का मोर्चा शुरू कर दिया है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल-बादल, बीजेपी और कई अन्य संगठनों ने 21 सदस्यीय ज्वाइंट एक्शन कमेटी बनाकर यह अनिश्चितकालीन मोर्चा लगाया है। मोर्चे का नाम ‘मोहंजीत सिंह-गुलजार सिंह इंसाफ मोर्चा’ रखा गया है और प्रदर्शनकारियों ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा। पंजाब की राजनीति में पक्का मोर्चा सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं होता, बल्कि प्रदर्शनकारी टेंट लगाकर मौके पर डेरा डालते हैं और जरूरत के मुताबिक अपनी रसोई चलाते हुए आंदोलन को लगातार जारी रखते हैं।
कई दल एक मंच पर
इस मोर्चे में कांग्रेस के राजिंदर दीप, अकाली दल-बादल के विनरजीत सिंह गोल्डी, बीजेपी के दामन थिंद बाजवा, भारतीय किसान यूनियन से काका सिंह कोटड़ा और जसविंदर सिंह के अलावा वारिस पंजाब दे तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। संयुक्त कमेटी ने सोमवार को दोनों प्रमुख मामलों से जुड़े परिवारों के साथ श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के बाद मंगलवार से मोर्चा शुरू किया। इस तरह नशे से जुड़े अलग-अलग मामलों को लेकर चल रहा विपक्षी विरोध पहली बार संगरूर में एक साझा मंच और अनिश्चितकालीन आंदोलन के रूप में सामने आया है।
मोर्चे की मुख्य मांगें
संयुक्त एक्शन कमेटी की प्रमुख मांगों में गुलजार सिंह मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना तथा मोहंजीत सिंह मामले में कथित तौर पर शामिल चार पुलिस अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना शामिल है। कमेटी इन मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग भी कर रही है। गुलजार सिंह मामले में दायर जनहित याचिका में जांच पंजाब पुलिस से हटाकर सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग की गई है।
मोहंजीत सिंह मामला
विवाद की पहली बड़ी कड़ी 2 सितंबर को सामने आई थी, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के संगरूर के शेरों गांव में हुए ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान मोहंजीत सिंह ने कथित तौर पर छत पर चढ़कर काला झंडा दिखाया और नशे के मुद्दे पर सरकार से सवाल किए। उसे पुलिस हिरासत में लिया गया। बाद में मोहंजीत ने कस्टडी में मारपीट और बिजली के झटके देने समेत गंभीर आरोप लगाए तथा एक डीएसपी स्तर के अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाया। दूसरी ओर पुलिस ने उसके खिलाफ पहले से दर्ज मामलों और मॉर्फिन पॉजिटिव पाए जाने का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई को सही ठहराया। मामले में जांच के लिए एसआईटी गठित की गई और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया। हाईकोर्ट में राज्य की ओर से शुरुआती मेडिकल जांच और बाद की मेडिको-लीगल रिपोर्ट में दर्ज चोटों के बीच अंतर का भी उल्लेख किया गया है।
गुलजार सिंह की मौत
दूसरा मामला तूर बनजारा गांव के 53 वर्षीय खेत मजदूर गुलजार सिंह का है। 6 सितंबर को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के गांव में कार्यक्रम के दौरान गुलजार ने अपने इलाके में चिट्टा उपलब्ध होने और अपने बेटे के नशे की गिरफ्त में होने का मुद्दा उठाया था। परिवार और मामले से जुड़ी याचिका के अनुसार, इसके बाद उस पर दबाव बनाया गया और पंचायत के सामने माफी मांगने के लिए कहा गया। गुलजार ने जहरीला पदार्थ निगल लिया और बाद में उसकी मौत हो गई। इस मामले में दिर्बा थाने में एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें पांच स्थानीय लोगों को नामजद किया गया है। मामले की जांच को लेकर विपक्ष ने चीमा की भूमिका की जांच और स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग उठाई है।
चीमा की भूमिका पर हाईकोर्ट का सवाल
गुलजार सिंह मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और मामले की पूरी जांच सुनिश्चित करने को कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि गुलजार के आखिरी वीडियो में हरपाल सिंह चीमा का नाम और आरोपों का उल्लेख है, इसलिए उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर इस स्तर पर मंत्री को आरोपी कैसे बनाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को है।
जग्गा सिंह मामला
तीसरी घटना 20 सितंबर को सामने आई, जब नामोल गांव के जगसीर सिंह उर्फ जग्गा सिंह ने संगरूर के जिला प्रशासनिक परिसर के बाहर जहरीला पदार्थ निगल लिया। घटना से पहले जारी वीडियो में उसने दावा किया कि वह अपने गांव में नशे की बिक्री से संबंधित वीडियो बना और पोस्ट कर रहा था तथा इसके बाद उस पर वीडियो हटाने के लिए दबाव डाला गया और धमकियां दी गईं। उसने गांव के सरपंच और कुछ अन्य लोगों पर घर पहुंचकर मारपीट करने तथा सीसीटीवी कैमरे को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए। इन आरोपों की जांच जारी है। पुलिस ने दूसरी तरफ जग्गा के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों का हवाला देते हुए बताया है कि उसके खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज हैं और कुछ मामलों में उसे सजा भी हो चुकी है। इसलिए इस मामले में उसके आरोपों के साथ-साथ पुलिस रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा है।
सरकार का जवाब- ‘राजनीतिक तमाशा’
विपक्षी दलों के पक्के मोर्चे पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पलटवार करते हुए इसे ‘राजनीतिक तमाशा’ बताया है। जग्गा सिंह के मामले में उन्होंने उसके खिलाफ दर्ज नौ एफआईआर का हवाला दिया और विपक्ष से सवाल किया कि वह किसके साथ खड़ा है। चीमा ने एक्स पर कहा कि पूरा गांव नशे के खिलाफ एकजुट है और नामोल को नशामुक्त बनाने की लड़ाई में साथ खड़ा है। उनका तर्क है कि विपक्ष घटनाओं को राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहा है, जबकि संबंधित मामलों में पुलिस जांच और सामने आए रिकॉर्ड को भी देखा जाना चाहिए।
नशे का मुद्दा बना राजनीतिक टकराव का केंद्र
संगरूर की इन घटनाओं ने नशे के मुद्दे को एक बार फिर पंजाब की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ विपक्ष मोहंजीत सिंह, गुलजार सिंह और जग्गा सिंह के मामलों को जोड़ते हुए यह सवाल उठा रहा है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को सुरक्षा और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं मिल रही। दूसरी तरफ सरकार इन मामलों में पुलिस रिकॉर्ड, जांच की प्रक्रिया और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज मामलों को सामने रखकर विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रही है। इस टकराव का नया चरण मुख्यमंत्री के घर के बाहर लगाए गए अनिश्चितकालीन मोर्चे के रूप में सामने आया है।
2027 से पहले बड़ा राजनीतिक मंच
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा पहले ही राजनीतिक दलों के प्रमुख एजेंडे में है। बीजेपी राज्यभर में नशे के मुद्दे को लेकर अलग अभियान चला रही है, जबकि कांग्रेस और अकाली दल भी सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। अब इन दलों और संगठनों का एक साथ मुख्यमंत्री के गृह जिले में पक्का मोर्चा लगाना इस मुद्दे को एक नए राजनीतिक स्तर पर ले गया है। फिलहाल मोर्चे की अगली दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और मोहंजीत सिंह, गुलजार सिंह तथा जग्गा सिंह से जुड़े मामलों में जांच आगे किस दिशा में जाती है।

