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बाहर गोलियां चलीं, अंदर से गैंग चलने का दावा! बुड़ैल जेल पहुंची 5 करोड़ की रंगदारी की जांच

मोहाली में रंगदारी के लिए फायरिंग के तीन केस सामने आने के बाद जेल में बंद गैंगस्टर काली पर पुलिस का बड़ा आरोप; जेल प्रशासन ने मोहाली पुलिस से मांगे दावे के सबूत

आरके सेठी
चंडीगढ़, 20 सितंबर।

मोहाली में कारोबारियों से कथित 5-5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और इसके बाद तीन अलग-अलग जगहों पर फायरिंग के मामलों की जांच अब चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल तक पहुंच गई है। मोहाली पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में गैंगस्टर रविंदर सिंह उर्फ काली का नाम सामने आया और काली, जो इस समय बुड़ैल जेल में बंद है, कथित तौर पर जेल के भीतर से गैंग की गतिविधियों को कोऑर्डिनेट कर रहा था। पुलिस के मुताबिक आरोपियों का विदेश में बैठे कुलवीर सिंह सिद्धू से भी संपर्क था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक काली को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर 19 सितंबर को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया। हालांकि, अब जेल प्रशासन ने मोहाली पुलिस से कहा है की सबूत हैं तो दीजिये। यानी, एक तरह से बुडैल जेल के अफसर और मोहाली पुलिस आमने-सामने है!

तीन फायरिंग, एक जैसा रंगदारी पैटर्न

पुलिस के मुताबिक पहला मामला 4 और 5 सितंबर की दरम्यानी रात फेज-10 में कारोबारी संयम जुडेजा के घर के बाहर फायरिंग का था। इसके बाद 7 सितंबर को उनके कारोबारी पार्टनर बलजीत सिंह के घर को निशाना बनाया गया। तीसरी घटना 14 सितंबर को सेक्टर-104 में कारोबारी जगदीप सिंह मान के घर के बाहर हुई, जहां फायरिंग के दौरान वहां काम कर रहा एक युवक घायल हो गया। पुलिस का कहना है कि इन घटनाओं से पहले 5 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की गई थी।

चार गिरफ्तार, पांचवां आरोपी फरार

मोहाली पुलिस ने इन मामलों में आकाशदीप सिंह, प्रवीण कुमार उर्फ कालू, जसमनदीप सिंह और दुष्यंत शर्मा उर्फ शम्मी को गिरफ्तार किया है, जबकि सिमरदीप सिंह उर्फ जशन की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार आकाशदीप को इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका फायरिंग, रेकी और हथियारों की व्यवस्था से जुड़ी होने का दावा किया गया है। पुलिस ने आरोपियों से विदेशी निर्मित पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हथियारों की सप्लाई किस नेटवर्क के जरिए हुई और क्या इसमें सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने का कोई कनेक्शन है।

जांच की सबसे अहम कड़ी बना काली

आरोपियों से पूछताछ के बाद काली को इस जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार आकाशदीप का काली से सीधा संपर्क था और काली के माध्यम से उसका विदेश में बैठे कुलवीर सिंह सिद्धू से संपर्क हुआ। पुलिस का दावा है कि काली जेल में रहते हुए नेटवर्क को संभाल रहा था, जबकि विदेश में मौजूद कुलवीर सिंह सिद्धू वारदातों के निर्देश दे रहा था। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि काली और बाहर मौजूद आरोपियों के बीच संपर्क किस माध्यम से होता था, निर्देश किस तरह पहुंचते थे और रंगदारी तथा फायरिंग की घटनाओं में उसकी कथित भूमिका कितनी थी।

पुलिस के दावे पर जेल प्रशासन का सवाल

यहीं से यह मामला सामान्य गैंगस्टर-क्राइम स्टोरी से आगे बढ़कर जेल सिक्योरिटी और सरकारी सिस्टम की जवाबदेही का सवाल बन जाता है। पुलिस अगर यह दावा कर रही है कि काली जेल के भीतर से नेटवर्क को कोऑर्डिनेट कर रहा था तो अगला सवाल उसके पास मौजूद टेक्निकल, डिजिटल या दूसरे जांच-साक्ष्यों का है। दूसरी तरफ बुड़ैल जेल प्रशासन की ओर से इस दावे पर सबूत मांगे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अब इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि पुलिस के पास काली के कथित जेल-कनेक्शन को साबित करने के लिए क्या साक्ष्य हैं और जेल प्रशासन उस दावे को किस आधार पर चुनौती दे रहा है।

बुड़ैल जेल और काली का पुराना मोबाइल रिकॉर्ड

बुड़ैल जेल में काली के कथित कम्युनिकेशन को लेकर सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उसका जेल रिकॉर्ड पहले भी मोबाइल बरामदगी से जुड़ा रहा है। सितंबर 2020 में बुड़ैल जेल की बैरक नंबर 10 की तलाशी के दौरान रविंदर सिंह उर्फ काली समेत तीन कैदियों से मोबाइल फोन बरामद होने की रिपोर्ट सामने आई थी। इस मामले में एक व्यक्ति पर काली तक मोबाइल पहुंचाने का आरोप लगा था। उसी समय जेल में लगे 2G नेटवर्क जैमर के 4G फोन के सामने प्रभावी नहीं होने की बात भी सामने आई थी। यह पुराना रिकॉर्ड मौजूदा मामले में काली की कथित भूमिका का सबूत नहीं है, लेकिन जेल के भीतर अवैध कम्युनिकेशन रोकने की व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बैकग्राउंड जरूर देता है।

अब जांच सिर्फ तीन फायरिंग तक सीमित नहीं

मौजूदा जांच में पुलिस के सामने सिर्फ तीन फायरिंग की वारदातों की कड़ी जोड़ने का सवाल नहीं है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क कितना बड़ा है, हथियार कहां से आए, विदेश में बैठे कथित हैंडलर की क्या भूमिका थी और क्या इस नेटवर्क के तार दूसरी आपराधिक वारदातों से भी जुड़े हैं। पुलिस के मुताबिक काली और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ी स्थापित होने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार अलग कार्रवाई में गिरफ्तार सिमरदीप सिंह को लेकर भी पुलिस ने काली से उसके संपर्क की बात कही है।

अब असली सवाल बुड़ैल जेल के सिस्टम का

मोहाली में 5 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी और तीन फायरिंग से शुरू हुई जांच अब एक ऐसे सवाल पर आकर टिक गई है जिसका जवाब सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी से नहीं मिलेगा। अगर पुलिस का दावा जांच में साक्ष्यों से पुष्ट होता है तो सवाल होगा कि जेल में बंद एक आरोपी बाहर सक्रिय नेटवर्क के साथ किस तरह संपर्क में था और सुरक्षा व्यवस्था उसे रोक क्यों नहीं पाई। वहीं अगर जेल प्रशासन पुलिस के दावे पर सबूत मांग रहा है तो यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि पुलिस के पास काली की कथित भूमिका को साबित करने के लिए कौन-से साक्ष्य हैं। इसलिए इस मामले का अगला बड़ा डेवलपमेंट केवल रिमांड में होने वाली पूछताछ नहीं, बल्कि पुलिस के दावे और जेल प्रशासन के जवाब के बीच मौजूद इस सवाल का जवाब होगा कि आखिर बुड़ैल जेल के भीतर से कथित नेटवर्क का यह कनेक्शन कैसे बना।

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