HomePunjabगुलजार केस: हाईकोर्ट ने पूछा- चीमा को आरोपी क्यों?

गुलजार केस: हाईकोर्ट ने पूछा- चीमा को आरोपी क्यों?

CBI जांच की मांग पर पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश

आरके सेठी
चंडीगढ़, 16 सितम्बर।

संगरूर के गुलजार सिंह की मौत का मामला अब पंजाब की सियासत से निकलकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सामने पहुंच गया है। बुधवार को हाईकोर्ट ने मामले की जांच को लेकर पंजाब पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब की। अदालत ने राज्य को मामले में उचित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में जांच CBI या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है।

कोर्ट का सीधा सवाल- मंत्री को आरोपी कैसे बनाया जाए?

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के दौरान सबसे अहम सवाल पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को लेकर उठा। याचिकाकर्ता की ओर से चीमा की भूमिका की जांच और उन्हें मामले में शामिल किए जाने की मांग की गई थी। इस पर कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल किया कि जब FIR में मंत्री के खिलाफ सीधे कोई भूमिका दर्ज नहीं है, तो उन्हें आरोपी कैसे बनाया जा सकता है?

याचिकाकर्ता की दलील- वीडियो बयान में चीमा का नाम

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संतोखविंदर सिंह नाभा ने अदालत में दलील दी कि गुलजार सिंह ने मौत से पहले बनाए गए वीडियो बयान में हरपाल सिंह चीमा और कुछ स्थानीय राजनीतिक लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि चीमा के कथित निर्देश पर स्थानीय सरपंच और अन्य लोगों ने गुलजार को परेशान किया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस पहलू की जांच ठीक से नहीं की गई।
दूसरी तरफ, उपलब्ध FIR में पांच लोगों के नाम हैं और याचिका के अनुसार उसमें चीमा को आरोपी नहीं बनाया गया है। यही वह बिंदु है जिस पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल उठाया।

FIR में क्या मामला दर्ज है?

हाईकोर्ट के सामने जिस FIR का संदर्भ आया, वह संगरूर जिले में दर्ज है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो पुराने IPC की धारा 306 के समकक्ष है। इसके साथ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं 3(1)(r) और 3(1)(s) भी लगाई गई हैं। अर्थात मामला सिर्फ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप तक सीमित नहीं है; FIR में अनुसूचित जाति से जुड़े कथित अपमान/जातिसूचक व्यवहार के प्रावधान भी शामिल हैं।

मामला शुरू कहां से हुआ?

गुलजार सिंह संगरूर जिले के तूर बनजारा गांव के रहने वाले दलित दिहाड़ी मजदूर थे। परिवार और ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने गांव में खुले तौर पर बिक रहे नशे, खासकर ‘चिट्टा’, को लेकर सवाल उठाए थे। परिवार का कहना है कि एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने भी इलाके में नशे की समस्या उठाई थी। परिवार का आरोप है कि इसके बाद स्थानीय स्तर पर उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया और उन्हें परेशान किया गया। इसी दबाव के बाद उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया और 7 सितंबर को उनकी मौत हो गई।

गुलजार के कथित आखिरी वीडियो ने बढ़ाया विवाद

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू गुलजार सिंह का मौत से पहले बनाया गया बताया जा रहा वीडियो है। याचिकाकर्ता के मुताबिक इस वीडियो में गुलजार ने अपनी मौत के लिए कुछ लोगों के साथ-साथ हरपाल सिंह चीमा का भी नाम लिया था। इसी आधार पर याचिका में सवाल उठाया गया कि वीडियो में लगाए गए आरोपों की जांच में पूरी गंभीरता दिखाई गई या नहीं।

परिवार का अंतिम संस्कार को लेकर भी गंभीर आरोप

मामले में विवाद अंतिम संस्कार को लेकर भी बढ़ा। गुलजार के परिवार ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी सहमति के बिना अंतिम संस्कार कराया और परिवार को पूरी प्रक्रिया अपनी इच्छा के अनुसार करने का मौका नहीं दिया। परिवार ने यह भी कहा कि इंसाफ मिलने तक वे अस्थियां नहीं उठाएंगे और बाद की धार्मिक रस्में नहीं करेंगे।

हरपाल चीमा बोले- मेरे पास सारे सबूत हैं

पूरे विवाद के बीच वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बुधवार को विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। उन्होंने कहा कि उनके पास इन आरोपों का जवाब देने के लिए सभी सबूत मौजूद हैं और जांच चल रही है। चीमा ने कहा कि समय आने पर वह उन सबूतों को सामने रखेंगे जिनसे विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जा सके। गुलजार के परिवार के आरोपों के संबंध में स्थानीय सरपंच पक्ष ने भी धमकी या माफी के लिए दबाव डालने के आरोपों को खारिज किया है।

NCSC भी पहले ही ले चुका है संज्ञान

यह मामला हाईकोर्ट पहुंचने से पहले ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के संज्ञान में आ चुका था। आयोग ने 8 सितंबर को पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर गुलजार सिंह की मौत के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पांच दिन में मांगी थी। आयोग ने बताया था कि उसे मिली शिकायत के मुताबिक गुलजार ने पंजाब के वित्त मंत्री के सामने राज्य में नशीले पदार्थों की समस्या को लेकर सवाल उठाए थे और मौत से पहले प्रसारित वीडियो में उन्होंने अपनी स्थिति के लिए मंत्री और कुछ पंचायत सदस्यों को जिम्मेदार बताया था। इस तरह अब मामले में पुलिस जांच, हाईकोर्ट की निगरानी और NCSC की कार्रवाई- तीन अलग संस्थागत ट्रैक मौजूद हैं।

सियासी विवाद भी लगातार बढ़ा

गुलजार सिंह की मौत को लेकर कांग्रेस, BJP और SAD ने पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं और हरपाल चीमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस ने 15 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रदर्शन किया, जिसमें पार्टी के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य नेता शामिल हुए; प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिरासत की स्थिति भी बनी।

अब सबसे अहम होगा पुलिस का स्टेटस रिपोर्ट

हाईकोर्ट के आज के आदेश के बाद मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण पंजाब पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट होगी। उसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि FIR में नामजद पांच आरोपियों के खिलाफ जांच कहां तक पहुंची, गुलजार के कथित वीडियो बयान को किस तरह जांचा गया, मंत्री का नाम सामने आने के बाद उसकी क्या पड़ताल हुई और परिवार के लगाए आरोपों की जांच में क्या सामने आया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होनी है।

अब कहानी का असली सवाल

गुलजार सिंह केस में आज हाईकोर्ट ने CBI जांच की मांग वाली इस याचिका के बाद मामला अब सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक भी नहीं रहा। राज्य की जांच की स्थिति अब अदालत के सामने रखनी होगी। यही इस केस का सबसे अहम नया मोड़ है- क्या पंजाब पुलिस की जांच उन सवालों का जवाब दे पाएगी जो गुलजार के कथित वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, हरपाल चीमा की कथित भूमिका और परिवार के अंतिम संस्कार संबंधी आरोपों को लेकर उठे हैं? अब इसका जवाब स्टेटस रिपोर्ट और आगे की न्यायिक कार्रवाई से सामने आएगा।

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