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शाह ने पंजाब में नशे पर घेरा, मान ने बीजेपी को किन मुद्दों पर घेरा?

कांडला पोर्ट पर नशीली खेपों से लेकर पाकिस्तान सीमा, हरियाणा के गैंगस्टर और किसान आंदोलन तक के सवाल उठाए; पंजाब में नशे की जवाबदेही पर केंद्र बनाम राज्य की सियासी लड़ाई तेज।

आरके सेठी
चंडीगढ़, 20 अक्तूबर।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीडियो संदेश के जरिए बीजेपी और केंद्र सरकार पर तीखा पलटवार किया। शाह पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी सरकार को घेर रहे थे, तो मान ने जवाब में गुजरात के कांडला पोर्ट से पकड़ी गई नशीली खेपों, पाकिस्तान सीमा पर तस्करी, बीएसएफ की जिम्मेदारी, हरियाणा में गैंगस्टर गतिविधियों और किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया। मान का तर्क था कि पंजाब में नशे की समस्या के लिए केवल राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराने के बजाय केंद्र और बीजेपी शासित राज्यों की भूमिका पर भी जवाब मांगा जाना चाहिए।

“मृतकों के नाम पर राजनीति करने के बजाय अतीत का जवाब दीजिए”

मान ने बीजेपी को पंजाब में नशे के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय अपने पुराने रिकॉर्ड पर जवाब देने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, मृतकों के नाम पर राजनीति करने के बजाय अतीत के कामों का जवाब दीजिए। मुख्यमंत्री ने खास तौर पर 2007 से 2017 तक पंजाब में रही अकाली दल-बीजेपी गठबंधन सरकार के कार्यकाल का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय नशे के कारोबार को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे और अब बीजेपी केवल मौजूदा सरकार को ही क्यों कटघरे में खड़ा कर रही है। मान ने केंद्र में 2014 से बीजेपी की सरकार होने का हवाला देते हुए भी नशा तस्करी पर कार्रवाई को लेकर सवाल किए।

बिक्रम मजीठिया का मामला उठाकर बीजेपी को घेरा

मान ने अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती अकाली-बीजेपी गठबंधन के दौरान नशे के कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि मजीठिया से जुड़े आरोपों पर पहले की सरकारों और केंद्र की भूमिका क्या रही। मान का राजनीतिक सवाल यह था कि यदि बीजेपी आज नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है, तो उसे अपने पुराने सहयोगियों के कार्यकाल और केंद्र में सत्ता संभालने के बाद की कार्रवाई का हिसाब भी देना चाहिए।

कांडला पोर्ट पर पकड़ी गई नशीली खेपों का हिसाब मांगा

मान ने गुजरात के कांडला पोर्ट पर पकड़ी गई बड़ी नशीली खेपों का उल्लेख करते हुए केंद्र से सवाल किया कि देश में इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने करीब 3,000 किलोग्राम की खेप का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात में बीजेपी की सरकार है, इसलिए वहां से जुड़ी तस्करी पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। मान ने राजस्थान और हरियाणा का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में पहुंचने वाले नशीले पदार्थों की सप्लाई को व्यापक नेटवर्क के संदर्भ में देखना चाहिए। उनका सवाल था कि पंजाब को नशे के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले उन रास्तों और नेटवर्क पर भी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती, जिनके जरिए नशीले पदार्थ देश में आते हैं।

पाकिस्तान सीमा, बीएसएफ और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर सवाल

मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान से लगती पंजाब की करीब 532 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी रोकने की जिम्मेदारी पर केंद्र से जवाब क्यों नहीं मांगा जाता। मान ने कहा कि बीएसएफ केंद्र सरकार के अधीन है और सीमा सुरक्षा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब सरकार ने बीएसएफ के साथ मिलकर एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया, जबकि केंद्र से ऐसी तकनीक और सहायता की मांग की गई थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

“राजस्थान में नशा, हरियाणा में गैंगस्टर”-मान का बीजेपी शासित राज्यों पर हमला

मान ने राजस्थान में नशे की समस्या और हरियाणा में गैंगस्टर गतिविधियों का जिक्र करते हुए बीजेपी को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पंजाब की कानून-व्यवस्था पर बीजेपी सवाल कर रही है, तो उसे अपने शासन वाले राज्यों में नशे और संगठित अपराध की स्थिति पर भी जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने जेलों से कथित आपराधिक नेटवर्क चलने और गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने गुजरात की साबरमती जेल और दिल्ली की तिहाड़ जेल का संदर्भ दिया।

किसान आंदोलन में 700 से अधिक मौतों का जिक्र

मान ने कृषि कानूनों के खिलाफ चले किसान आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों की मौत हुई थी। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार ने मृतक किसानों के परिवारों के प्रति संवेदना दिखाने और उनकी सहायता के लिए क्या किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने प्रभावित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरियां दीं। इस बयान के जरिए उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह पंजाब में नशे के मुद्दे पर राजनीतिक हमला तो कर रही है, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान हुई मौतों और परिवारों की मांगों पर केंद्र की भूमिका का जवाब नहीं देती।

चंडीगढ़, पानी और पंजाब के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया

मान ने नशे के मुद्दे से आगे बढ़ते हुए चंडीगढ़, पंजाब के पानी और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में राज्य की हिस्सेदारी का सवाल भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी गंभीरता नहीं दिखाती, लेकिन चुनाव के समय राज्य को बचाने और नशामुक्त करने की बात करती है। इस तरह मुख्यमंत्री ने शाह के दौरे को केवल नशे और कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहने दिया। उन्होंने इसे पंजाब के अधिकारों, किसान आंदोलन और केंद्र-राज्य संबंधों से जोड़ते हुए बीजेपी के पुराने रिकॉर्ड पर सवाल उठाए।

अपनी सरकार की कार्रवाई का भी मान ने किया बचाव

मान ने अपनी सरकार के नशा विरोधी अभियान का बचाव करते हुए कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने गिरफ्तारियों, नशा तस्करी से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई और नशे के आदी लोगों के इलाज तथा पुनर्वास की जरूरत का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री का तर्क था कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर्याप्त नहीं हैं। सप्लाई नेटवर्क रोकने, सीमा पार से तस्करी पर कार्रवाई करने, नशा तस्करों के खिलाफ मजबूत मामले तैयार करने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की जरूरत है। हालांकि, सरकार की कार्रवाई के वास्तविक नतीजों का आकलन गिरफ्तारियों, दोषसिद्धि, जब्ती और पुनर्वास से जुड़े आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है।

नशे पर केंद्र बनाम राज्य की जवाबदेही का सवाल

अमित शाह के पंजाब दौरे और भगवंत मान के जवाबी संदेश ने नशे के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को सामने ला दिया। बीजेपी पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार से जवाब मांग रही है। दूसरी ओर मान ने गुजरात में पकड़ी गई नशीली खेपों, सीमा सुरक्षा, बीएसएफ की भूमिका, बीजेपी शासित राज्यों और किसान आंदोलन में हुई मौतों का मुद्दा उठाकर केंद्र की जवाबदेही पर सवाल किए। इस बहस का केंद्रीय सवाल यह है कि नशे की सप्लाई रोकने और तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी किस स्तर पर कैसे निभाई जा रही है।

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