अमित शाह ने मान सरकार को घेरा, केजरीवाल ने BJP पर किया पलटवार; राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल, भगवंत मान का केंद्र को जवाब- परिवार CBI जांच और CM-DGP के इस्तीफे पर अड़ा

आरके सेठी
चंडीगढ़, 16 अक्तूबर।
एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की सरेआम, फेसबुक लाइव के दौरान हुई हत्या ने पंजाब की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। परिवार और इंसाफ कमेटी CBI जांच, मुख्यमंत्री भगवंत मान और DGP गौरव यादव के इस्तीफे तथा संबंधित अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग पर अड़े हैं। SHO के निलंबन के बावजूद परिवार संतुष्ट नहीं है और पिता ने मांगें पूरी होने तक बेटे का अंतिम संस्कार न करने की बात कही है। 15 अक्टूबर के पंजाब बंद के बाद अब 19 अक्टूबर को AAP विधायकों और मंत्रियों के घरों तथा दफ्तरों के घेराव का ऐलान किया गया है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से झोटा हत्याकांड और नशे के खिलाफ कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अमित शाह ने मान सरकार को घेरा, अरविंद केजरीवाल ने BJP पर पलटवार किया, राहुल गांधी ने भी सवाल उठाए और भगवंत मान ने केंद्र को जवाब दिया। अब सवाल है- झोटा के परिवार को इंसाफ कब मिलेगा और क्या राजनीतिक टकराव के बीच उसकी मांगों पर कोई ठोस फैसला होगा?
केंद्र ने पंजाब सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
झोटा की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज पंजाब सरकार से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने घटना और राज्य प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों का ब्योरा तलब किया है। पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को भेजे गए पत्र में 13 अक्टूबर को मानसा में हुई हत्या का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट की मांग के साथ नशे के खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है। केंद्र ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान से संबंधित विजन डॉक्यूमेंट के क्रियान्वयन पर भी जानकारी मांगी है। इसमें नशा तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई, जांच और अभियोजन को मजबूत करने, विशेष अदालतों की व्यवस्था तथा संबंधित संस्थागत तंत्र को प्रभावी बनाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। केंद्र का यह कदम ऐसे समय आया है, जब झोटा की हत्या के बाद पंजाब में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट तलब किए जाने से मामला अब पंजाब की कानून-व्यवस्था के साथ केंद्र-राज्य के राजनीतिक टकराव का भी मुद्दा बन गया है।
अमित शाह का हमला: पंजाब के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने X पर पंजाब में नशे, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध के बढ़ते खतरे का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि पंजाब के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। शाह ने झोटा की हत्या के साथ संगरूर के दिड़बा में गुलजार सिंह से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा और राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल हैं। शाह ने पंजाब सरकार से जवाब मांगने और नशे के नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। अमित शाह ने पंजाब में BJP की सरकार बनने पर राज्य को नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित बनाने का संकल्प भी दोहराया। उनके बयान ने झोटा हत्याकांड को लेकर BJP और AAP के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया।
केजरीवाल का पलटवार: ‘पंजाब में अडानी पोर्ट के रास्ते नशा फैलाने वाले आप लोग!’
अमित शाह के हमले पर AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने X पर लिखा, “पंजाब में अडानी पोर्ट के रास्ते नशा फैलाने वाले आप लोग!” केजरीवाल ने BJP पर नशे और गैंगस्टरवाद के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने 2007 से 2017 तक पंजाब में अकाली दल-BJP गठबंधन की सरकार का जिक्र करते हुए नशे की समस्या पर BJP की भूमिका पर सवाल उठाए। अपने जवाब में उन्होंने पंजाब के पानी, चंडीगढ़ और पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दों को भी शामिल किया। केजरीवाल के बयान ने बहस को झोटा हत्याकांड और मान सरकार की जवाबदेही से आगे बढ़ाकर BJP और AAP के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंचा दिया।
भगवंत मान का अमित शाह को जवाब- लेकिन झोटा मामले पर सीधा जवाब नहीं
अमित शाह के बयान के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी X पर पलटवार किया। मान ने नशे की तस्करी रोकने की जिम्मेदारी केवल पंजाब सरकार पर डालने पर सवाल उठाया। उन्होंने गुजरात के कांडला पोर्ट पर नशीले पदार्थों की बड़ी जब्ती, BJP शासित राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर तक BSF के अधिकार क्षेत्र का जिक्र किया। मान ने अमित शाह को सलाह दी कि बयान देने से पहले तथ्यों की जांच करें और बिना पड़ताल के दूसरों की लिखी सामग्री दोहराने से बचें। उनका तर्क था कि नशे की तस्करी रोकने में केंद्र और संबंधित राज्यों की भी जिम्मेदारी है। हालांकि, झोटा हत्याकांड पर मुख्यमंत्री ने अलग से घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा था कि हत्या की साजिश में शामिल लोगों को भी कानून के दायरे में लाया जाएगा और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। इस आश्वासन के बावजूद परिवार अपनी मांगों पर कायम है।
राहुल गांधी ने भी मान सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने झोटा हत्याकांड को पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा से जोड़ते हुए आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला किया। राहुल गांधी ने X पर आरोप लगाया कि पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाना जानलेवा होता जा रहा है। उन्होंने झोटा के साथ दिड़बा के गुलजार सिंह और मोहनीत सिंह का भी उल्लेख किया। झोटा के मामले में राहुल गांधी ने शिकायत दर्ज कराने के बाद FIR दर्ज होने और फिर झोटा के खिलाफ भी मामला दर्ज किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जिस सरकार में शिकायत करने वाला भी मुलजिम बन जाए, वहां नशे के सौदागरों को डर क्यों होगा। उन्होंने नशे के खिलाफ संघर्ष कर रहे लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी के बयान ने कांग्रेस को मान सरकार पर हमला करने का मौका दिया। इस तरह झोटा हत्याकांड पर BJP और कांग्रेस के हमलों के बीच AAP ने भी राजनीतिक जवाबी कार्रवाई की।
क्या हैं परिवार और इंसाफ कमेटी की मांगें?
राजनीतिक बयानबाजी के बीच झोटा के परिवार और इंसाफ कमेटी का धरना जारी है। उनकी प्रमुख मांगों में CBI जांच, मुख्यमंत्री भगवंत मान और DGP गौरव यादव के इस्तीफे तथा संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। परिवार की मांग है कि मामले में केवल निचले स्तर पर कार्रवाई करके जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया समाप्त न की जाए, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। SHO बेअंत कौर के निलंबन के बाद भी कमेटी संतुष्ट नहीं है। झोटा के पिता भीम सिंह ने कहा है कि मांगें पूरी होने के बाद ही बेटे का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शव मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ है और पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ है। परिवार पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील कर चुका है। प्रशासन की ओर से परिवार से बातचीत की गई है, लेकिन अब तक ऐसा समाधान सामने नहीं आया है जिसे परिवार और इंसाफ कमेटी स्वीकार कर लें।
19 अक्टूबर को AAP विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव
इंसाफ कमेटी ने आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का ऐलान किया है। 19 अक्टूबर को पंजाब में आम आदमी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों के घरों तथा दफ्तरों के घेराव की योजना बनाई गई है। कमेटी ने विरोध जताने के लिए उनके परिसरों के बाहर निंदा-पत्र चिपकाने की बात भी कही है। कमेटी ने झोटा के नाम पर स्टेडियम या ट्रॉमा सेंटर बनाने और गोलीबारी की घटना में घायल हुए चार लोगों को राज्य सरकार से 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी उठाई है। 19 अक्टूबर का कार्यक्रम सरकार पर राजनीतिक और जनदबाव बढ़ाने की रणनीति है। यदि घेराव व्यापक स्तर पर होता है, तो राज्य सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव और तेज हो सकता है।
पंजाब बंद के बाद भी नहीं निकला समाधान
झोटा की हत्या के विरोध में 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया था। विपक्षी दलों, किसान संगठनों और अन्य समूहों ने बंद का समर्थन किया। कई इलाकों में बाजार और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि आवश्यक सेवाएं जारी रखने की अपील की गई। बंद ने दिखाया कि मामला केवल झोटा के परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नशे के खिलाफ कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक विरोध का रूप ले चुका है। हालांकि, बंद के बाद भी परिवार की प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनी और धरना जारी रहा।
हत्या के बाद क्या-क्या हुआ?
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना फेसबुक लाइव के दौरान हुई। झोटा नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे और मेडिकल स्टोरों पर नशीली तथा आदत डालने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे। मामले में आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई थी। घटना के बाद गुस्साए लोगों ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ की और बुलडोजर से ढांचा गिराने के बाद आग लगा दी। प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को भी कथित अनधिकृत निर्माण के आधार पर गिराया था। परिवार और समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। 15 अक्टूबर को सिटी-2 थाने की SHO बेअंत कौर को निलंबित किया गया और आरोपी की पत्नी समेत दो अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किए जाने की खबर आई। इसके बावजूद परिवार ने अंतिम संस्कार से इनकार जारी रखा। झोटा की हत्या के बाद प्रदर्शन के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और भड़काऊ भाषणों से जुड़े दो मामले दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई। पुलिस ने प्रदर्शन से संबंधित आरोपियों की पहचान होने और गिरफ्तारी की बात कही है।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल
झोटा हत्याकांड पर केंद्र की रिपोर्ट, अमित शाह और भगवंत मान के बीच नशे के मुद्दे पर टकराव, केजरीवाल का पलटवार और राहुल गांधी की आलोचना ने पंजाब की राजनीति को गरमा दिया है। लेकिन इन बयानों के बीच परिवार का मूल सवाल अब भी कायम है- हत्या की निष्पक्ष जांच कैसे होगी, जिम्मेदारी किसकी तय होगी और मांगों पर फैसला कब आएगा? केंद्र ने पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी है। राज्य सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दे चुकी है, लेकिन परिवार और इंसाफ कमेटी अभी संतुष्ट नहीं हैं। 19 अक्टूबर के घेराव से पहले सरकार के सामने बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकालने की चुनौती है, जिससे परिवार की मांगों पर ठोस प्रगति हो और आंदोलन का समाधान निकल सके। फिलहाल झोटा हत्याकांड पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान, पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था पर एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि नेताओं के बीच किसका पलड़ा भारी रहा, बल्कि यह है कि इस पूरे टकराव के बीच झोटा के परिवार को न्याय कब मिलेगा।

