‘पंजाब बंद’ से कौन-सा मकसद पूरा हुआ! सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर, आरोपी का घर-दुकान तोड़ने और आग लगाने के मामले में भी याचिका दाखिल

आरके सेठी
चंडीगढ़, 15 अक्तूबर।
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के बाद पंजाब में गिरफ्तारी, बुलडोजर कार्रवाई और राज्यव्यापी बंद हो चुका है। मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया। प्रशासन ने उसके मकान का एक हिस्सा गिराया, जबकि आक्रोशित भीड़ ने मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। 15 अक्टूबर को पंजाब बंद भी रहा। इसके बावजूद झोटा का अंतिम संस्कार नहीं हुआ। परिवार हत्या की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग पर अड़ा है।
परिवार की मांगें क्या हैं?
झोटा के पिता भीम सिंह और न्याय की मांग कर रही संयुक्त एक्शन कमेटी ने हत्या की सीबीआई जांच, पीजीआई चंडीगढ़ में डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम और पुलिस की भूमिका की जांच की मांग उठाई है। परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी की है। परिवार का कहना है कि केवल आरोपी की गिरफ्तारी से न्याय की लड़ाई पूरी नहीं होती।
फेसबुक लाइव के दौरान गोली चली, पुलिस की भूमिका पर सवाल
13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर झोटा और दुकानदार अश्विनी कुमार के बीच कथित तौर पर आदत डालने वाली दवाओं की बिक्री को लेकर विवाद हुआ। झोटा उस समय फेसबुक लाइव कर रहे थे। इसी दौरान गोली चली और झोटा की मौत हो गई। उनके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की भी खबर सामने आई। सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका में आरोप लगाया गया है कि झोटा ने गोली चलने से पहले पुलिस को फोन किया था, लेकिन पुलिस समय पर नहीं पहुंची। याचिका के अनुसार, गोलीबारी के बाद पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने में करीब 20 से 25 मिनट लगे और घायल झोटा को अस्पताल पहुंचाने में भी देरी हुई। ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं, अदालत के निष्कर्ष नहीं।
आरोपी का मकान प्रशासन ने गिराया, दुकान में भीड़ ने लगाई आग
14 अक्टूबर को जिला प्रशासन ने आरोपी अश्विनी कुमार के मकान का अगला हिस्सा कथित अवैध निर्माण के आधार पर गिराया। मेडिकल स्टोर पर भी कार्रवाई हुई। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने दुकान में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। मकान गिराने की कार्रवाई प्रशासन ने की, जबकि दुकान में आगजनी भीड़ की कार्रवाई थी। दोनों घटनाओं ने हत्या के मामले के साथ प्रशासनिक प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
पंजाब बंद: बाजार बंद, हाईवे जाम, कई जिलों में प्रदर्शन
15 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक पंजाब बंद का आह्वान किया गया। झोटा के पिता और संयुक्त एक्शन कमेटी की अपील को कांग्रेस, भाजपा, शिरोमणि अकाली दल, अकाली दल वारिस पंजाब दे तथा विभिन्न किसान और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। मानसा, बरनाला, संगरूर, जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और अन्य जिलों में बाजार बंद रहने की खबरें आईं। कई निजी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों ने छुट्टी घोषित की। पटियाला-सिरहिंद मार्ग और बठिंडा-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कुछ प्रमुख रास्तों पर धरने लगे। जालंधर के परागपुर के पास अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित हुआ।
‘पंजाब बंद’ से कौन-सा मकसद पूरा हुआ?
बंद का पहला नतीजा यह रहा कि झोटा हत्याकांड मानसा तक सीमित नहीं रहा। किसान संगठनों, विपक्षी दलों और सामाजिक समूहों की भागीदारी से मामला राज्यव्यापी विरोध का मुद्दा बन गया। बाजार बंद होने और प्रमुख सड़कों पर प्रदर्शन से सरकार पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ा। लेकिन बंद का व्यापक असर होना और परिवार की मांगें पूरी होना अलग-अलग बातें हैं। मुख्य आरोपी गिरफ्तार हो चुका है और मानसा सिटी-2 थाने की एसएचओ बेअंत कौर को निलंबित किया गया है। इसके बावजूद सीबीआई जांच की मांग पर मंजूरी और परिवार की दूसरी मांगों पर परिवार अड़ा हुआ है। बंद के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या सरकार स्वतंत्र जांच की मांग पर कोई ठोस निर्णय लेती है।
हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग वाली जनहित याचिका दायर हुई है। याचिका हुकम सिंह की ओर से दाखिल की गई। इसमें हत्या की जांच के अलावा आरोपी के मेडिकल स्टोर के ड्रग लाइसेंस और हथियार के लाइसेंस जारी करने तथा नवीनीकरण की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई गई है। याचिका में चार प्रमुख सवाल उठाए गए हैं। आरोपी के मेडिकल स्टोर का ड्रग लाइसेंस किस आधार पर जारी और नवीनीकृत हुआ? हथियार का लाइसेंस कैसे मिला? घटना से पहले पुलिस को कथित फोन किए जाने के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई? गोली लगने के बाद झोटा को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई या नहीं? मानसा के सिटी-2 पुलिस स्टेशन में 14 अक्टूबर को दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 103(1), 109, 118(1), 61(2) और 3(5), तथा आर्म्स एक्ट की धाराएं 25 और 27 शामिल हैं।
दूसरी याचिका: आरोपी के घर-दुकान पर कार्रवाई और आगजनी का विवाद
आरोपी के मकान और मेडिकल स्टोर पर हुई कार्रवाई तथा दुकान में आगजनी के संबंध में दूसरी याचिका दाखिल होने का भी उल्लेख सामने आया है। हालांकि, इस याचिका का केस नंबर, याचिकाकर्ता का नाम और अदालत में की गई सटीक मांग स्पष्ट नहीं है। इसलिए यह पुष्ट नहीं है कि याचिका में मकान गिराने के प्रशासनिक आदेश को चुनौती दी गई है, दुकान पर हुई कार्रवाई को या आगजनी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
एसएचओ निलंबित, आरोपी की पत्नी भी मामले में बुक
मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी के अनुसार, सिटी-2 थाने की एसएचओ इंस्पेक्टर बेअंत कौर को निलंबित किया गया। पुलिस ने आरोपी की पत्नी नीलम रानी सहित अन्य लोगों को मामले में बुक किए जाने की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, मेडिकल स्टोर का फार्मेसी लाइसेंस नीलम रानी के नाम पर था।
मुख्यमंत्री का आश्वासन, परिवार की मांगें बरकरार
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया और कहा कि हत्या के पीछे यदि कोई साजिशकर्ता है, तो उसे भी कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने शांति बनाए रखने की अपील की। दूसरी ओर, परिवार सीबीआई जांच और पुलिस की भूमिका पर जवाबदेही की मांग पर कायम रहा।
अंतिम संस्कार अब भी क्यों रुका है?
परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार में देरी की मुख्य वजह परिवार का न्याय और स्वतंत्र जांच की मांग पर अड़े रहना है। इसके अलावा सीएम और डीजीपी के इस्तीफे की मांग भी जोर-शोर से उठाई जा रही। आरोपी की गिरफ्तारी, बुलडोजर कार्रवाई, आगजनी, पुलिस अधिकारी का निलंबन और पंजाब बंद- इन सभी घटनाओं के बावजूद परिवार अपनी बाकी की मांगों पर अड़ा हुआ है। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती, अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे। अब इस मामले की दिशा सीबीआई जांच की मांग पर होने वाले निर्णय, पुलिस की भूमिका से जुड़े सवालों के जवाब और परिवार की मांगों पर सरकार के रुख से तय होगी।

