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धीरेंद्र शास्त्री विवाद फिर भड़का: लुधियाना में शांत हुआ मामला, अमृतसर में FIR की मांग क्यों?

अमृतसर में ईसाई समुदाय का बड़ा प्रदर्शन; गिरफ्तारी की मांग- क्या धार्मिक विवाद फिर पंजाब की सियासत का मुद्दा बनने लगा?

आरके सेठी,
चंडीगढ़, 6 अक्तूबर।

पंजाब में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार विवाद का केंद्र लुधियाना नहीं, अमृतसर है। लुधियाना में शास्त्री के स्पष्टीकरण के बाद एक अक्टूबर को शाही इमाम ने विवाद को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था, लेकिन पांच दिन बाद अमृतसर में ईसाई समुदाय सड़कों पर उतर आया और शास्त्री के खिलाफ FIR तथा गिरफ्तारी की मांग कर दी। यानी जिस विवाद के शांत होने का दावा सामने आया था, वह अब दूसरे समुदाय की आपत्ति के साथ नए सिरे से राजनीतिक और सामाजिक सवाल खड़े कर रहा है।

अमृतसर में सड़कों पर उतरा ईसाई समुदाय

मंगलवार को अमृतसर में विभिन्न ईसाई संगठनों और समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर और बैनर लेकर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी की और पंजाब पुलिस तथा प्रशासन से कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शास्त्री की टिप्पणियों से ईसाई धर्म और उसकी धार्मिक मान्यताओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

FIR ही नहीं, गिरफ्तारी की भी मांग

प्रदर्शनकारियों ने पंजाब के DGP और स्थानीय प्रशासन से मांग की कि शास्त्री के खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की जाए। इसके साथ ही उन्हें पंजाब में ब्लैकलिस्ट करने और भविष्य में राज्य में प्रवेश करने पर गिरफ्तारी की मांग भी रखी गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।

केंद्र में ‘हालेलुया’ वाला विवाद

ईसाई समुदाय की आपत्ति खास तौर पर ‘हालेलुया’ शब्द से जुड़ी बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी नेताओं का आरोप है कि शास्त्री ने ईसाई धार्मिक अभिव्यक्ति ‘हालेलुया’ का मजाक उड़ाया और आपत्तिजनक अंदाज में उसका इस्तेमाल किया। यही आरोप अब अमृतसर के प्रदर्शन और FIR की मांग का प्रमुख आधार बन गया है।

लुधियाना में मामला कुछ और था

मौजूदा विवाद को समझने के लिए लुधियाना का घटनाक्रम अहम है। सितंबर के अंत में श्री हनुमंत कथा के दौरान शास्त्री ने पंजाब में नशे और धर्मांतरण को रोकने की बात कही थी। इसी दौरान उनकी कुछ टिप्पणियों पर मुस्लिम और ईसाई प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई। शाही इमाम ने सार्वजनिक माफी की मांग की और पुलिस शिकायत की चेतावनी दी थी।

शास्त्री ने क्या सफाई दी थी?

विवाद बढ़ने के बाद शास्त्री ने कहा था कि उनका निशाना किसी धर्म या मजहब के खिलाफ नहीं था और वह नशे तथा धर्मांतरण के मुद्दे पर बात कर रहे थे। उनके स्पष्टीकरण के बाद एक अक्टूबर को लुधियाना की जामा मस्जिद में हुई बैठक में शाही इमाम ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय इस मुद्दे को आगे नहीं खींचेगा। उस समय लगा था कि विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है।

लेकिन ईसाई समुदाय ने मामला फिर खोल दिया

अमृतसर का प्रदर्शन इसी कहानी में नया मोड़ है। यानी लुधियाना में मुस्लिम पक्ष से विवाद शांत होने के बाद अब ईसाई समुदाय ने उन्हीं टिप्पणियों के एक अलग हिस्से को लेकर कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। इससे मामला किसी एक धार्मिक समुदाय की आपत्ति तक सीमित नहीं रह गया और पंजाब में धार्मिक बयानों, धर्मांतरण और सामुदायिक संवेदनशीलता को लेकर बड़ी बहस फिर सामने आ गई है।

आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी

प्रदर्शनकारी नेताओं ने कहा है कि अगर FIR दर्ज नहीं होती और कार्रवाई नहीं होती तो आंदोलन को पंजाब के दूसरे जिलों तक ले जाया जाएगा। कुछ नेताओं ने धरना जारी रखने और जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल तथा मरणव्रत तक की चेतावनी दी है। यानी प्रशासन के लिए यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आगे बढ़ सकने वाला धार्मिक संवेदनशीलता वाला मामला बन सकता है।

2027 से पहले धार्मिक बयान क्यों संवेदनशील?

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से कुछ महीने पहले धार्मिक पहचान और धर्मांतरण से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक महत्व अपने आप बढ़ जाता है। अभी किसी राजनीतिक दल को इस विवाद से जोड़ना जल्दबाजी होगी, लेकिन अगर मामला FIR, गिरफ्तारी, विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं तक पहुंचता है तो अलग-अलग दलों के लिए इसका इस्तेमाल अपने-अपने नैरेटिव के लिए करने की संभावना जरूर बनेगी।

क्या विवाद अब तीसरे चरण में पहुंच गया?

पहला चरण लुधियाना में शास्त्री की टिप्पणियों के बाद शुरू हुआ, दूसरा चरण उनके स्पष्टीकरण और शाही इमाम की ओर से विवाद खत्म करने के फैसले के साथ शांत होता दिखा। अब अमृतसर के प्रदर्शन ने तीसरा चरण शुरू कर दिया है। इस बार मांग सीधी है- FIR, गिरफ्तारी और पंजाब में उनके प्रवेश पर रोक। अगर सरकार या पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई होती है तो विवाद का अगला अध्याय वहीं से तय होगा।

अब नजर पंजाब सरकार और पुलिस पर

धीरेंद्र शास्त्री की कथित टिप्पणियों पर राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा महत्वपूर्ण अब प्रशासन का अगला कदम है। क्या पुलिस शिकायत की जांच करेगी, क्या FIR दर्ज होगी, क्या शास्त्री का पक्ष लिया जाएगा और क्या सरकार धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस विवाद पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया देगी- इन सवालों के जवाब तय करेंगे कि यह विवाद एक प्रदर्शन तक सीमित रहता है या पंजाब की 2027 की पॉलिटिकल बहस में भी जगह बना लेता है।

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