मोहाली में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के दौरान आशीष सूद का AAP और अरविंद केजरीवाल पर हमला; बोले- पंजाब के अलावा अब उनके पास ऐसा कोई ठिकाना नहीं, जहां ‘ऐशपरस्ती’ कर सकें

आरके सेठी
चंडीगढ़, 22 सितम्बर।
बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ मंगलवार को मोहाली पहुंची तो दिल्ली के होम मिनिस्टर आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सीधे निशाने पर लिया। सूद ने कहा कि दिल्ली में लोग केजरीवाल को नकार चुके हैं और अब वे पंजाब में ‘फरारी’ काटने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के अलावा अब उनके पास ऐसा कोई स्थान नहीं बचा है, जहां वे अपनी ‘ऐशपरस्ती’ कर सकें। सूद के इन शब्दों ने मोहाली में नशे के खिलाफ चल रहे बीजेपी के अभियान के बीच AAP और केजरीवाल पर राजनीतिक हमले को प्रमुखता दे दी।
नशे के मुद्दे पर भी सूद का फोकस
सूद ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर कहा कि यह गुरुओं की धरती है, लेकिन आज प्रदेश का युवा नशे की गिरफ्त में है। उन्होंने लोगों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर पंजाब को नशा मुक्त बनाने की लड़ाई में शामिल होने की अपील की। बीजेपी इस यात्रा को नशे के खिलाफ जन-जागरूकता और लोगों को जोड़ने वाले अभियान के रूप में पेश कर रही है।
मोहाली से खरड़ होते हुए चमकौर साहिब
मोहाली में यात्रा के दो प्रमुख कार्यक्रम रखे गए थे। पहला कार्यक्रम फेज-11 में और दूसरा फेज-1 में हुआ। इसके बाद यात्रा खरड़ के रास्ते चमकौर साहिब की ओर रवाना हुई। बीजेपी की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक इस रूट में मोहाली के साथ खरड़ और चमकौर साहिब सहित कई विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस लिहाज से मोहाली का कार्यक्रम राज्यव्यापी यात्रा के उस हिस्से का पड़ाव है, जो एक साथ कई विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।
117 विधानसभा सीटों तक पहुंचने का प्लान
बीजेपी ने 18 सितंबर से चार चरणों में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राएं’ शुरू की हैं। पार्टी के मुताबिक चारों यात्राएं मिलकर करीब 4,000 किलोमीटर का सफर तय करेंगी और पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर करेंगी। पहला चरण पठानकोट, दूसरा फतेहगढ़ साहिब, तीसरा फाजिल्का और चौथा तलवंडी साबो से शुरू किया गया। चारों यात्राओं का समापन 30 सितंबर को जालंधर में होना है।
नशे के साथ कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार भी मुद्दे
बीजेपी ने इस अभियान का दायरा केवल नशे तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने नशे के साथ बिगड़ती कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को भी पंजाब के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है। यानी यात्रा के जरिए बीजेपी जिन मुद्दों को राज्यभर में ले जा रही है, उनमें सामाजिक समस्या के साथ शासन और प्रशासन से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।
बीजेपी इसे गैर-राजनीतिक अभियान बता रही
बीजेपी ने यात्रा की घोषणा करते समय इसे नशे के खिलाफ जन-जागरूकता और जन-आंदोलन से जोड़ते हुए ‘अपॉलिटिकल’ यानी गैर-राजनीतिक अभियान बताया था। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी यात्रा के दौरान इसे नशे के खिलाफ अभियान के तौर पर पेश किया। हालांकि, यात्रा के दौरान बीजेपी नेताओं की ओर से पंजाब सरकार और AAP पर किए जा रहे राजनीतिक हमले इसे राज्य की मौजूदा राजनीतिक बहस से भी जोड़ रहे हैं।
2027 से पहले मुद्दों की राजनीतिक जमीन
चार यात्राओं का 4,000 किलोमीटर का रूट और सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की योजना बीजेपी को एक साथ सामाजिक मुद्दे और संगठनात्मक संपर्क का मौका देती है। नशे के अलावा कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को भी अभियान का हिस्सा बनाए जाने के कारण इसका इस्तेमाल पंजाब सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने के लिए किया जा रहा है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के इस अभियान को लेकर राजनीतिक विश्लेषण में भी इसे चुनावी तैयारी के व्यापक संदर्भ से जोड़ा गया है।
जालंधर में होगा अभियान का बड़ा समापन
राज्यभर में चल रही चारों यात्राएं 30 सितंबर को जालंधर में एक साथ समाप्त होंगी। बीजेपी ने समापन कार्यक्रम के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन का कार्यक्रम रखा है। ऐसे में मोहाली से लेकर जालंधर तक चलने वाला यह अभियान नशे के मुद्दे को पूरे पंजाब में लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अब AAP के जवाब पर नजर
मोहाली में आशीष सूद के केजरीवाल पर सीधे हमले के बाद इस मुद्दे पर AAP की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ बीजेपी नशे, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर पंजाब सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं AAP पहले से बीजेपी के इस अभियान के राजनीतिक उद्देश्य और उसके पुराने रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाती रही है। ऐसे में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के आगे बढ़ने के साथ नशे का मुद्दा केवल सामाजिक समस्या तक सीमित रहेगा या 2027 की राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बनेगा, इस पर नजर रहेगी।

