आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2022 से नवंबर 2025 तक पंजाब पुलिस और गैंगस्टरों के बीच 324 आर्म्ड एक्सचेंज हुईं; 24 बदमाश मारे गए, 515 गिरफ्तार, जबकि कार्रवाई के दौरान 3 पुलिसकर्मी शहीद और 41 घायल हुए

आरके सेठी
चंडीगढ़, 20 सितंबर।
अमृतसर में ड्यूटी के दौरान ASI हरजीत सिंह की हत्या के करीब 48 घंटे के भीतर पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी दीपक सिंह को एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, दीपक सिंह अमृतसर के मुलेचक गांव का रहने वाला था और जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, टेक्निकल इनपुट, टावर डंप एनालिसिस, लोकल इंटेलिजेंस और ह्यूमन सोर्सेज के आधार पर उसकी पहचान की गई। शनिवार रात करीब 9:45 बजे पुलिस ने स्कूटी सवार दो संदिग्धों को नाके पर रुकने का इशारा किया, लेकिन पुलिस के अनुसार उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी और दूसरे नाके की तरफ भागे। वहां भी चार राउंड फायरिंग किए जाने का पुलिस ने दावा किया, जिसके बाद पुलिस ने सेल्फ-डिफेंस में जवाबी फायरिंग की। इस दौरान दीपक घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने उसके पास से .30 बोर पिस्तौल, दो मैगजीन, आठ जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन और एक्टिवा बरामद करने का दावा किया है। दूसरा संदिग्ध मौके से फरार हो गया और उसकी तलाश जारी है।
हरजीत सिंह की हत्या ने बढ़ाया लॉ एंड ऑर्डर का दबाव
18 सितंबर की रात अमृतसर के भगतांवाला अनाज मंडी इलाके में गेट हकीमा थाना क्षेत्र के तहत पीसीआर ड्यूटी पर तैनात ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें नजदीक से गोली मारी। घटना के बाद पंजाब में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सवाल तेज हुए। DGP गौरव यादव ने मौके का दौरा कर जांच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की तथा इलाके में निगरानी, पेट्रोलिंग और प्रिवेंटिव पुलिसिंग बढ़ाने के निर्देश दिए। राज्य सरकार ने परिवार को एक करोड़ रुपये एक्स-ग्रेशिया और HDFC की ओर से एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त इंश्योरेंस भुगतान घोषित किया।
पुलिसकर्मियों से जुड़ी हिंसक घटनाओं की कड़ी
हरजीत सिंह की हत्या से पहले फरवरी में गुरदासपुर के अधियन गांव में ASI गुरनाम सिंह और होमगार्ड जवान अशोक कुमार की हत्या हुई थी, जबकि मई में ASI जोगा सिंह को ड्यूटी पर जाते समय मजिठा के पास गोली मार दी गई थी। सितंबर में ही अमृतसर के अजनाला इलाके में ASI जसवंत सिंह पर फायरिंग की घटना भी सामने आई, जिसमें वह बच गए। हालांकि मार्च में ASI/कांस्टेबल जगजीत सिंह की हत्या का मामला पुरानी रंजिश से जुड़ा बताया गया था, इसलिए उसे बाकी घटनाओं के समान पुलिस ड्यूटी पर टारगेटेड अटैक के रूप में देखना उचित नहीं होगा। कुल मिलाकर 2026 में पुलिसकर्मियों से जुड़ी कई हिंसक घटनाओं ने पुलिस सुरक्षा और क्रिमिनल नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।
विपक्ष ने सरकार के लॉ एंड ऑर्डर रिकॉर्ड पर सवाल उठाए
हरजीत सिंह की हत्या के बाद कांग्रेस और बीजेपी ने पंजाब सरकार पर लॉ एंड ऑर्डर को लेकर हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने पुलिसकर्मी की ड्यूटी के दौरान हत्या को गंभीर चिंता बताया और सरकार से जवाबदेही की मांग की। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने भी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर चिंता जताई। बीजेपी नेता तरुण चुघ ने भी AAP सरकार पर लॉ एंड ऑर्डर को लेकर निशाना साधते हुए ड्रग माफिया, एक्सटॉर्शन और गैंगस्टरिज्म के कारण भय का माहौल होने का आरोप लगाया।
सितंबर में ही कांग्रेस का लॉ एंड ऑर्डर पर प्रदर्शन
ASI हत्याकांड से कुछ दिन पहले 8 सितंबर को पंजाब कांग्रेस ने भी लॉ एंड ऑर्डर और ड्रग्स के मुद्दे पर चंडीगढ़ में प्रदर्शन किया था। मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया था और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया था। कांग्रेस ने उस समय भी पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद 18 सितंबर को ASI हरजीत सिंह की हत्या ने इसी राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
लॉ एंड ऑर्डर पंजाब विधानसभा में भी बड़ा मुद्दा रहा
भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में लॉ एंड ऑर्डर को लेकर विधानसभा के भीतर भी कई बार टकराव देखने को मिला है। जून 2022 में कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था पर चर्चा के लिए एडजर्नमेंट मोशन दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया था और कांग्रेस विधायकों ने विरोध किया था। मार्च 2023 में अमृतपाल सिंह के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के दौरान कांग्रेस ने फिर लॉ एंड ऑर्डर पर चर्चा की मांग की। स्पीकर द्वारा एडजर्नमेंट मोशन मंजूर न किए जाने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन में विरोध किया और बाद में वॉकआउट किया। उस समय SAD विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने भी राज्य में बने “आतंक के माहौल” का उल्लेख किया था।
324 आर्म्ड एक्सचेंज का पुलिस रिकॉर्ड
लॉ एंड ऑर्डर और गैंगस्टरिज्म से निपटने के लिए पंजाब पुलिस की कार्रवाई का एक बड़ा आंकड़ा नवंबर 2025 में सामने आया था। DGP गौरव यादव के अनुसार अप्रैल 2022 से नवंबर 2025 तक पुलिस और गैंगस्टरों के बीच 324 आर्म्ड एक्सचेंज हुए। इन कार्रवाइयों में 24 गैंगस्टर/अपराधी मारे गए और 515 गिरफ्तार किए गए, जिनमें 319 को गोली लगने की बात पुलिस ने बताई। इन एक्सचेंज के दौरान तीन पुलिसकर्मी शहीद और 41 घायल हुए। यह आंकड़ा पुलिस और अपराधियों के बीच आर्म्ड एक्सचेंज का है।
AGTF के जरिए संगठित अपराध पर फोकस
DGP के मुताबिक इसी अवधि में पंजाब पुलिस ने 962 गैंगस्टर और क्रिमिनल मॉड्यूल्स को ध्वस्त किया तथा 2,536 अपराधियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने 2,086 अवैध हथियार, 564 वाहन, 79 किलो हेरोइन और 4.69 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद करने की जानकारी भी दी थी। DGP ने इन अभियानों में एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स यानी AGTF की भूमिका को प्रमुख बताया था। उनके अनुसार AGTF ने पंजाब के अलावा दूसरे राज्यों में भी गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन चलाए।
2025 के बाद भी एनकाउंटर का सिलसिला जारी
नवंबर 2025 में जारी 324 आर्म्ड एक्सचेंज के आंकड़े के बाद भी पंजाब में पुलिस एनकाउंटर जारी रहे। फरवरी 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के तीन महीनों में पुलिस रिकॉर्ड में 34 एनकाउंटर दर्ज किए गए, जिनमें पांच लोगों की मौत और 45 लोगों के घायल होने की जानकारी थी। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इनमें लगभग एक-तिहाई घटनाएं पुलिस कस्टडी में हुई थीं। इससे एनकाउंटर की प्रक्रिया, पुलिस कार्रवाई और निगरानी को लेकर बहस का एक अलग पहलू सामने आया।
ASI हत्याकांड में आतंकी कनेक्शन की भी जांच
हरजीत सिंह हत्याकांड की जांच सिर्फ स्थानीय क्रिमिनल नेटवर्क तक सीमित नहीं है। पुलिस पाकिस्तान आधारित आतंकी कनेक्शन की भी जांच कर रही है। जांच में सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हमले के पीछे सीमा पार से किसी व्यक्ति या मॉड्यूल की भूमिका थी। एक आरोपी के मारे जाने के बाद अब पुलिस के सामने दूसरे संदिग्ध को पकड़ना और पूरे नेटवर्क तथा हमले के पीछे की वजह को स्पष्ट करना अगला बड़ा टास्क है।
48 घंटे की कार्रवाई से बदला पॉलिटिकल नैरेटिव
हरजीत सिंह की हत्या के बाद विपक्ष ने जिस तेजी से लॉ एंड ऑर्डर का मुद्दा उठाया, उसके बीच पुलिस द्वारा करीब 48 घंटे में एक आरोपी को एनकाउंटर में मार गिराना सरकार और पंजाब पुलिस के लिए महत्वपूर्ण ऑपरेशनल डेवलपमेंट है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई संदिग्धों की ओर से की गई फायरिंग के जवाब में सेल्फ-डिफेंस में हुई। इसलिए इस कार्रवाई की राजनीतिक व्याख्या से अलग, तथ्यात्मक रूप से फिलहाल दो बातें स्पष्ट हैं- एक आरोपी की पहचान जांच के दौरान हुई और बाद में पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हुई, जबकि दूसरा आरोपी अभी फरार है। आगे की जांच यह स्पष्ट करेगी कि हरजीत सिंह की हत्या के पीछे पूरा नेटवर्क क्या था और इस एनकाउंटर की परिस्थितियां क्या थीं।
2027 से पहले लॉ एंड ऑर्डर की बड़ी राजनीतिक परीक्षा
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले लॉ एंड ऑर्डर, गैंगस्टरिज्म, ड्रग्स और पुलिस सुरक्षा ऐसे मुद्दे हैं जिन पर राजनीतिक दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं। हरजीत सिंह हत्याकांड ने इस बहस को एक बार फिर सीधे पुलिस की सुरक्षा से जोड़ दिया है, जबकि सरकार और पुलिस के पास गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ एनकाउंटर, गिरफ्तारियों और AGTF ऑपरेशन के आंकड़े हैं। आगे की राजनीतिक बहस सिर्फ एक घटना पर नहीं, बल्कि अपराध पर नियंत्रण, पुलिस की सुरक्षा, एनकाउंटर की प्रक्रिया, सीमा पार कनेक्शन और आम नागरिकों की सुरक्षा के व्यापक रिकॉर्ड पर केंद्रित होगी।

