अकाल तख्त की पांच सिंह साहिबान की बैठक में धार्मिक सजा का ऐलान; अमरजीत सिंह चावला के साथ एडिशनल हेड ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को भी पंथ से किया निष्कासित

आरके सेठी
चंडीगढ़, 20 सितम्बर।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सदस्य रहे और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज रेप की एफआईआर के बाद अब श्री अकाल तख्त साहिब ने बड़ा पंथक फैसला सुनाया है। 20 सितम्बर को श्री अकाल तख्त साहिब में हुई पांच सिंह साहिबान की बैठक में चावला को सिख पंथ से निष्कासित कर दिया गया। इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में श्री अकाल तख्त साहिब के एडिशनल हेड ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को भी पंथ से निष्कासित करने का फैसला सुनाया गया।
पांच सिंह साहिबान की बैठक में फैसला
यह फैसला श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में पांच सिंह साहिबान की बैठक के बाद सुनाया गया। बैठक में कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज, श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी केवल सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह, श्री अकाल तख्त साहिब के ग्रंथी ज्ञानी गुरबख्शिश सिंह और भाई मंगल सिंह शामिल रहे। बैठक के बाद चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह के खिलाफ पंथक कार्रवाई का ऐलान किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, फैसला गंभीर आरोपों, इस संबंध में प्राप्त पत्रों और पंथक स्तर पर उठे सवालों पर विचार के बाद लिया गया।
21 अगस्त को दर्ज हुई थी रेप की FIR
अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ 21 अगस्त 2026 को श्री आनंदपुर साहिब पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 64, 127(2) और 351(2) लगाई गई हैं। धारा 64 रेप से संबंधित है, जबकि बाकी धाराएं कथित गलत तरीके से हिरासत में रखने और आपराधिक धमकी से जुड़ी हैं। शिकायतकर्ता संगरूर जिले की बताई गई है और वर्तमान में बहरीन में रहती है। उसने पुलिस को दिए बयान में फरवरी से अगस्त 2026 के बीच की घटनाओं का जिक्र किया है।
सराय में बंधक बनाने और रेप का आरोप
एफआईआर के अनुसार, महिला का आरोप है कि वह धार्मिक यात्रा के सिलसिले में श्री आनंदपुर साहिब आई थी और उसे एसजीपीसी की सराय में ठहराया गया था। शिकायत में 27 फरवरी से 19 अगस्त के बीच की घटनाओं का उल्लेख है। महिला ने आरोप लगाया कि उसे अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया, उसके साथ रेप किया गया और विरोध करने पर धमकाया गया तथा एक समय उसे कमरे में बंद भी रखा गया। रिपोर्टों के मुताबिक शिकायतकर्ता का न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दर्ज कराया गया है। इन आरोपों की पुलिस जांच जारी है।
चावला ने आरोपों को बताया झूठा, पदों से दिया इस्तीफा
अमरजीत सिंह चावला ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने एफआईआर को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश करार दिया और कहा था कि वह अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने एसजीपीसी सदस्य पद के साथ-साथ शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद समेत पार्टी के अन्य पदों से भी इस्तीफा दे दिया था। चावला ने कहा था कि जब तक न्यायिक प्रक्रिया में उनका नाम पूरी तरह साफ नहीं हो जाता, तब तक वह सार्वजनिक पद पर नहीं रहेंगे।
ज्ञानी मलकीत सिंह और ड्राइवर मोहन सिंह का नाम भी सामने आया
इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के एडिशनल हेड ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह और तख्त श्री केसगढ़ साहिब में तैनात ड्राइवर मोहन सिंह का नाम भी शिकायत के संदर्भ में सामने आया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि दोनों की ओर से उसे अश्लील संदेश भेजे गए। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दोनों को मूल एफआईआर में आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया गया था। इसके बाद एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देश पर दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया और एसजीपीसी के फ्लाइंग विभाग को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए थे।
पुलिस जांच में अभी तक गिरफ्तारी नहीं
एफआईआर दर्ज होने के करीब एक महीने बाद तक पुलिस की ओर से चावला की गिरफ्तारी नहीं की गई थी। रूपनगर पुलिस ने कहा था कि मामले की जांच जारी है और सबूत जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने सार्वजनिक तौर पर यह भी स्पष्ट नहीं किया था कि चावला को जांच में शामिल होने के लिए कोई नोटिस जारी किया गया या उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
शिकायत पहले धार्मिक संस्थाओं तक पहुंचने के दावे
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि शिकायतकर्ता की ओर से यह दावा किया गया कि उसने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने से पहले कुछ सिख संगठनों और धार्मिक नेताओं से संपर्क किया था। 19 सितम्बर को केंद्रीय सिंह सभा ने भी अकाल तख्त से चावला के खिलाफ पंथक कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
अब अकाल तख्त ने दोनों को पंथ से किया बाहर
इन घटनाक्रमों के बीच 20 सितम्बर को पांच सिंह साहिबान की बैठक में अमरजीत सिंह चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह के खिलाफ धार्मिक कार्रवाई का फैसला सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार दोनों को सिख पंथ से निष्कासित किया गया है और सिख संस्थाओं में सेवा करने पर भी रोक लगाई गई है। चावला के मामले में पंथक मर्यादा और गंभीर आरोपों को फैसले के आधार के रूप में बताया गया है। कुछ रिपोर्टों में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मेल-जोल से दूरी बनाए रखने के निर्देश तथा सिख संस्थाओं में सेवा पर दीर्घकालीन रोक का भी उल्लेख है।
एसजीपीसी, अकाली राजनीति और पंथक संस्थाओं के लिए बड़ा घटनाक्रम
अमरजीत सिंह चावला का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह केवल किसी राजनीतिक दल के स्थानीय कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि एसजीपीसी के सदस्य और अकाली दल के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं। एफआईआर के बाद उनका पार्टी और एसजीपीसी पदों से इस्तीफा, दो एसजीपीसी कर्मचारियों का निलंबन और अब अकाल तख्त की ओर से पंथ से निष्कासन-तीनों घटनाक्रम इस मामले को राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बनाते हैं।
अब तीन स्तरों पर नजर
अब इस मामले में पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया, एसजीपीसी की आंतरिक जांच तथा अकाल तख्त के फैसले के बाद होने वाली पंथक कार्रवाई- तीनों महत्वपूर्ण होंगे। सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि आपराधिक जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, आरोपों के संबंध में पुलिस और अदालत के स्तर पर क्या तथ्य सामने आते हैं और एसजीपीसी की जांच में ज्ञानी मलकीत सिंह तथा मोहन सिंह की भूमिका को लेकर क्या निष्कर्ष निकलता है। इस बीच अकाल तख्त का 20 सितम्बर का फैसला इस पूरे मामले को धार्मिक संस्थागत कार्रवाई के एक नए चरण में ले गया है।

